झारखंड में छात्रों का आंदोलन 17वें दिन विधानसभा घेराव तक पहुंच गया। हजारों छात्र रांची में मार्च कर रहे हैं। प्रशासन ने बैरिकेडिंग और वाहनों की जांच बढ़ाई है, जबकि बीजेपी नेताओं ने भी भर्ती परीक्षाओं की जांच की मांग की।
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को हजारों छात्रों ने विधानसभा की ओर मार्च किया। पिछले 16 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और सरकारी नौकरियों से जुड़ी व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने शहर के प्रमुख मार्गों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है।
रांची की सड़कों पर हजारों छात्रों का मार्च
झारखंड में छात्रों का आंदोलन सोमवार को 17वें दिन भी जारी रहा। राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे और विधानसभा की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों में पोस्टर और बैनर दिखाई दिए, जबकि सड़कों पर लगातार नारेबाजी होती रही।

छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे सरकार के सामने अपनी मांगें रखना चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग भर्ती परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ी है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं हो रही है।
जगन्नाथपुर के पास जुटे छात्र
पिछले कई दिनों से छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे हैं। स्टेडियम से विधानसभा की दूरी करीब 12 किलोमीटर बताई गई है। सभी प्रदर्शनकारियों को एक स्थान पर जुटाने के लिए जगन्नाथपुर थाना के पास स्थित मैदान को निर्धारित किया गया।
सोमवार सुबह करीब 11 बजे तक बड़ी संख्या में छात्र यहां जमा हो गए। इसके बाद छात्रों ने विधानसभा की तरफ आगे बढ़ना शुरू किया। विधानसभा से करीब दो किलोमीटर पहले प्रदर्शनकारियों की बड़ी भीड़ जुट गई।
प्रशासन ने प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
बैरिकेडिंग और वाहनों की जांच से बढ़ी निगरानी
छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद प्रशासन ने रांची में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। जिला सीमाओं और राजधानी में आने वाले प्रमुख रास्तों पर बसों तथा निजी वाहनों की जांच की जा रही है।
प्रशासन की कोशिश है कि राजधानी में प्रदर्शनकारियों की संख्या को नियंत्रित रखा जाए और विधानसभा के आसपास कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे। वहीं छात्रों ने कुछ स्थानों पर उन्हें रोके जाने और हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। पुलिस का कहना है कि छात्रों को आंदोलन से रोका नहीं गया है।
विधानसभा के आसपास धारा 163 लागू की गई है। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्र सड़कों पर बैठकर भी अपनी मांगें उठाते नजर आए।
भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो भी मार्च में शामिल
आंदोलन में शामिल देवेंद्र महतो, जो भूख हड़ताल पर बैठे हैं, भी एंबुलेंस के जरिए छात्रों के मार्च में पहुंचे। इससे प्रदर्शनकारियों के बीच आंदोलन को लेकर उत्साह देखने को मिला।
एक छात्र ने कहा कि सरकार को युवाओं की बात सुननी चाहिए और उनकी मांगों पर जवाब देना चाहिए। छात्रों का कहना है कि सरकारी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता युवाओं के भविष्य के लिए जरूरी है।
JPSC मामले की जांच पर भी उठ रहे सवाल
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित अनियमितता के मामलों को लेकर जांच की मांग भी तेज है। JPSC से जुड़े मामले में संभावित वित्तीय लेनदेन, परीक्षा प्रक्रिया, OMR और एडमिट कार्ड में कथित हेरफेर तथा पेपर लीक से जुड़े आर्थिक पहलुओं की जांच पर चर्चा हो रही है।
जांच के दौरान कथित लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की जानकारी के साथ परीक्षा से पहले और बाद के संदिग्ध वित्तीय ट्रांजैक्शन की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है। कथित तौर पर अवैध तरीके से हासिल धन को संपत्ति या अन्य माध्यमों में लगाए जाने के पहलू की भी जांच की जा सकती है।
सीएम आवास के बाहर BJP नेताओं का प्रदर्शन
छात्रों के आंदोलन के बीच बीजेपी नेताओं ने भी सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराने की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने किया। प्रदर्शन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए और हाथों में प्लेकार्ड लेकर अपनी मांग रखी।
पुलिस के अनुसार, आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी समेत बीजेपी के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। बीजेपी की ओर से यह भी दावा किया गया कि कुछ नेताओं को सुबह से ही नजरबंद किया गया था। इस बीच रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग लगातार चर्चा में बनी हुई है।










