झारखंड में परीक्षाओं में कथित धांधली और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। अपनी मांगों को लेकर छात्र पिछले 6 दिनों से अनशन पर बैठे हैं। लंबे समय से खाना नहीं खाने के कारण कई छात्रों की हालत कमजोर बताई जा रही है। आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि अब उनके पास खड़े होने तक की ताकत नहीं बची है, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार उनकी समस्याओं को सीधे सुने। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे किसी प्रतिनिधिमंडल या बीच के माध्यम से बातचीत नहीं करना चाहते। वे सीधे सरकार के जिम्मेदार प्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं और परीक्षा से जुड़े मामलों पर स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
छात्रों का आरोप है कि झारखंड में विभिन्न परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और जिन मामलों में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
अनशन के छठे दिन छात्रों ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि लगातार भूखे रहने के कारण शरीर कमजोर हो चुका है। कई छात्र काफी देर तक खड़े नहीं रह पा रहे हैं। इसके बावजूद उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में नहीं है। वे परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवाओं के कई साल लग जाते हैं और यदि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है तो उनकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं।










