चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बयान जारी किए जाने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर निशाना साधा। नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर हमला करने के लिए अपने आरोपों का आधार एक ‘गढ़े हुए झूठ’ को बनाया।
SIR Row: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। चुनाव आयोग की ओर से SIR से जुड़े फैसलों पर स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद नबीन ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के लिए एक कथित तौर पर गढ़े गए दावे को आधार बनाया।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि SIR को लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई। उनका यह बयान एक राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि के रूप में इसे नहीं देखा जाना चाहिए। विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर सामने आई खबरें हैं।
इन रिपोर्टों में आयोग के दो सदस्यों की ओर से कुछ फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए जाने का उल्लेख किया गया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि SIR से संबंधित उसके आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से जारी किए गए थे।
चुनाव आयोग ने SIR को लेकर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने जारी बयान में कहा कि देशभर में SIR से संबंधित सभी प्रमुख फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र आयोग की नीति या उसके आईटी विभाग से संबंधित नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे।
आयोग ने फॉर्म-6 से संबंधित बदलावों पर भी अपना पक्ष रखा। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए किया जाता है। आयोग ने कहा कि SIR के तहत इससे जुड़े बदलावों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बरकरार रखा गया है। इस मुद्दे को लेकर हालांकि कानूनी और राजनीतिक बहस अभी जारी है।

नितिन नबीन ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद नितिन नबीन ने कांग्रेस और विपक्षी दलों के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने SIR के संबंध में अपने आरोपों के लिए एक “manufactured lie” यानी कथित रूप से गढ़े गए झूठ को आधार बनाया। नबीन के मुताबिक, आयोग के स्पष्टीकरण के बाद SIR को लेकर विपक्ष की आलोचना पर सवाल खड़े हुए हैं।
नबीन ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर एक जैसा रवैया होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए दावा किया कि जब कांग्रेस या उसके सहयोगी दल चुनाव जीतते हैं, तब चुनावी प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं होने पर वही संस्थाएं निशाने पर आ जाती हैं। यह नबीन का राजनीतिक तर्क है।
SIR को लेकर विपक्ष के सवाल क्या हैं?
SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से मतदाता सूची में नाम हटाए जाने, दस्तावेजों की जरूरत और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन करना और अपात्र, मृत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।
इस बीच दिल्ली में SIR से जुड़े कुछ मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल किए हैं। अदालत ने “logical discrepancy” के आधार पर जारी किए गए कुछ नोटिसों के बारे में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा था। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने प्रक्रिया में जवाब देने के तरीकों को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए ईमेल और व्हाट्सऐप जैसे विकल्पों पर भी विचार करने का सुझाव दिया।











