त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार को पश्चिम त्रिपुरा के कालिबाजार में DYFI कार्यक्रम में जाते समय प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने वाहन घेरा और काले झंडे दिखाए। पुलिस और CRPF ने उन्हें सुरक्षित निकाला। CPI(M) और कांग्रेस ने विरोध जताया।
अगरतला: त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और CPI(M) नेता माणिक सरकार को रविवार को पश्चिम त्रिपुरा जिले के कालिबाजार में विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस के अनुसार, DYFI के एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे सरकार के वाहन को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया और उन्हें वापस जाने के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे भी दिखाए। पुलिस और CRPF के जवानों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित पार्टी कार्यालय पहुंचाया।
DYFI सम्मेलन में जा रहे थे माणिक सरकार
माणिक सरकार रविवार दोपहर करीब 12 बजे कालिबाजार में CPI(M) के युवा संगठन डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के मोहनपुर डिविजनल कमेटी सम्मेलन में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उनके वाहन को घेर लिया।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए उनसे वापस लौटने को कहा और काले झंडे दिखाए। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी। पुलिस को सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान मौके पर पहुंचे। मोहानपुर के सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी (SDPO) आशीष दास गुप्ता ने बताया कि सुरक्षा बलों ने माणिक सरकार को सुरक्षित रूप से स्थानीय CPI(M) कार्यालय तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने निर्धारित कार्यक्रम को संबोधित किया और फिर सुरक्षित रूप से अगरतला लौट गए।
1998 से 2018 तक रहे त्रिपुरा के मुख्यमंत्री
माणिक सरकार त्रिपुरा के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1998 से 2018 तक राज्य की सरकार का नेतृत्व किया। 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में CPI(M) के लंबे शासन का अंत हुआ और BJP के नेतृत्व में नई सरकार बनी।
मौजूदा घटना ऐसे समय में हुई है जब त्रिपुरा में BJP और वाम दलों के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार बने हुए हैं। सितंबर की शुरुआत में भी माणिक सरकार ने आरोप लगाया था कि आगामी स्थानीय चुनावों के लिए वाम मोर्चा उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में बाधाओं का सामना करना पड़ा। BJP ने इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर अपनी राजनीतिक स्थिति रखी है।
CPI(M) ने बताया जानबूझकर किया गया विरोध
CPI(M) के राज्य सचिव और त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह पूर्व मुख्यमंत्री को पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने का जानबूझकर किया गया प्रयास था।
चौधरी के मुताबिक, उन्होंने पुलिस महानिदेशक (प्रभारी) जीएस राव से बात की है। उन्होंने बताया कि पुलिस महानिदेशक ने मामले को देखने का आश्वासन दिया है।
CPI(M) नेता ने प्रदर्शन के पीछे BJP नेताओं की भूमिका का आरोप लगाया। हालांकि, यह आरोप पार्टी की ओर से लगाया गया है और उपलब्ध पुलिस बयान में प्रदर्शनकारियों को BJP से जोड़ने की पुष्टि नहीं की गई है।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों को BJP समर्थक बताया गया है, लेकिन इस संबंध में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए घटना को रिपोर्ट करते समय प्रदर्शनकारियों की राजनीतिक पहचान और कथित भूमिका को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने भी घटना पर जताया विरोध
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने भी माणिक सरकार के साथ हुए विरोध पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पूर्व मुख्यमंत्री को इस तरह रोका जाना राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है।
रॉय बर्मन ने प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी स्थानीय BJP नेताओं के कहने पर वहां पहुंचे थे। BJP की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
पुलिस ने सुरक्षित निकाला, कार्यक्रम हुआ
घटना के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और CRPF की तैनाती की गई। सुरक्षा बलों ने माणिक सरकार के वाहन को प्रदर्शन स्थल से निकालकर स्थानीय CPI(M) कार्यालय तक पहुंचाया।
इसके बाद सरकार ने DYFI के सम्मेलन में भाग लिया। पुलिस के मुताबिक, कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह अगरतला के लिए रवाना हुए और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
इस घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि राज्य में राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, रविवार की घटना के संबंध में पुलिस की आधिकारिक जानकारी मुख्य रूप से प्रदर्शन, नारेबाजी और काले झंडे दिखाए जाने तक सीमित है।
घटना को लेकर अलग-अलग दावे
घटना के बाद राजनीतिक दलों और स्थानीय स्तर पर इसके कारणों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। CPI(M) नेताओं ने इसे पार्टी कार्यक्रम को बाधित करने की कोशिश बताया, जबकि कुछ स्थानीय रिपोर्टों में प्रदर्शन को BJP समर्थकों से जोड़ा गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में माणिक सरकार के काफिले पर हमले या उसे निशाना बनाने के प्रयास का भी आरोप लगाया गया है। इन दावों को पुलिस के उपलब्ध बयान से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं किया गया है, इसलिए इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
त्रिपुरा की राजनीति में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
त्रिपुरा में हाल के दिनों में स्थानीय और स्वायत्त परिषद से जुड़े चुनावों को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रही हैं। सितंबर की शुरुआत में माणिक सरकार ने आरोप लगाया था कि कुछ इलाकों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जा रहा है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग भी उठाई थी।
ऐसे राजनीतिक माहौल में कालिबाजार की घटना ने राज्य में सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी CPI(M)-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप को फिर सामने ला दिया है। हालांकि, रविवार की घटना में किसी बड़े नुकसान की पुलिस ने पुष्टि नहीं की है और माणिक सरकार कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सुरक्षित अगरतला लौट गए।
फिलहाल पुलिस की ओर से यह बताया गया है कि सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और पूर्व मुख्यमंत्री को सुरक्षित बाहर निकाला। दूसरी ओर, CPI(M) और कांग्रेस ने घटना की जांच तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। BJP की ओर से आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।











