भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। मंगलवार को भी बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी छह महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गए। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से बाजार की धारणा कमजोर रही।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भी जारी रहा। कमजोर वैश्विक संकेतों, पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI/FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाए रखा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों अपने करीब छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए।
बाजार में दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखी गई। खासतौर पर आईटी, कंज्यूमर और कुछ बैंकिंग शेयरों में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को बढ़ाया।
सेंसेक्स 242 अंक टूटा, निफ्टी 22,700 के ऊपर बंद
मंगलवार के कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,529.07 पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 64.05 अंक यानी 0.28 प्रतिशत फिसलकर 22,716.20 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार के व्यापक सूचकांकों में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.02 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 करीब 0.95 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि मंगलवार को बिकवाली का दबाव केवल चुनिंदा लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं था।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी शामिल रही। पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.74 प्रतिशत बढ़कर 107.1 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर देश के आयात बिल, मुद्रास्फीति और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। निवेशक इसी वजह से तेल की कीमतों में तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट कमाई के लिए महत्वपूर्ण जोखिम के तौर पर देख रहे हैं। अगर क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य लागत आधारित कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है। इससे कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन को लेकर भी बाजार में सतर्कता बढ़ती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से सेंटीमेंट कमजोर
भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी भी चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने के दौरान विदेशी निवेशक अक्सर अपने पोर्टफोलियो में जोखिम कम करने की रणनीति अपनाते हैं। भारतीय बाजार से पूंजी की निकासी बढ़ने पर शेयरों में बिकवाली का दबाव और मजबूत हो सकता है। पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक बाजारों की दिशा फिलहाल भारतीय इक्विटी के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बने हुए हैं।
Titan, Wipro और HCL Tech में बड़ी गिरावट
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में मंगलवार को कई कंपनियों के स्टॉक में तेज गिरावट देखने को मिली। टाइटन का शेयर करीब 3 प्रतिशत नीचे रहा। विप्रो में 2.95 प्रतिशत और HCL Technologies में 2.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा टेक महिंद्रा 2.06 प्रतिशत, TCS 1.85 प्रतिशत और अल्ट्राटेक सीमेंट 1.78 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए।
रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी 1.30 प्रतिशत और ICICI Bank में करीब 0.75 प्रतिशत की गिरावट रही। आईटी शेयरों में कमजोरी को वैश्विक तकनीकी कंपनियों से जुड़े कारोबारी माहौल और बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति से जोड़कर देखा जा रहा है।










