झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) से जुड़े कथित पेपर लीक और अनियमितता मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। झारखंड CID की विशेष जांच टीम यानी SIT ने अब तक इस मामले में कुल 36 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। गिरफ्तार किए गए लोगों में अभ्यर्थी, एजेंट, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी ICN के कर्मचारी और ऐसे सफल अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन पर परीक्षा में अनुचित तरीके से लाभ लेने या दूसरे अभ्यर्थियों से पैसे के लेनदेन में भूमिका होने के आरोप हैं। हालांकि जांच के इस चरण तक JSSC के किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ ऐसा साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी की जा सके।
SIT की जांच में अब तक जिस नेटवर्क की तस्वीर सामने आई है, उसमें परीक्षा में सफल होने वाले कुछ अभ्यर्थियों के साथ एजेंट और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है। जांच टीम ने अलग-अलग चरणों में संदिग्धों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का सत्यापन तथा पैसों के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की है। इसी प्रक्रिया के आधार पर गिरफ्तारियां की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर गिरफ्तार नहीं किया जा रहा, बल्कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
मामले की जांच के दौरान JSSC कार्यालय भी SIT की जांच के दायरे में रहा है। टीम कई बार आयोग के नामकुम स्थित कार्यालय पहुंची और वहां उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की। जांच टीम ने आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता के सामने दस्तावेजों और रिकॉर्ड का सत्यापन भी कराया। इससे साफ है कि जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक और दस्तावेजी पहलुओं को भी देख रही है। हालांकि अभी तक आयोग के किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ गिरफ्तारी लायक साक्ष्य मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि परीक्षा में कथित तौर पर पैसे के लेनदेन, प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने और अभ्यर्थियों तक जानकारी पहुंचाने का नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और इसकी जानकारी परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली व्यवस्था तक क्यों नहीं पहुंची। जांच एजेंसी इन सवालों के जवाब तलाश रही है। वहीं, यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी संस्था के अधिकारियों के खिलाफ केवल इसलिए जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती कि उनके कार्यकाल में कोई अनियमितता हुई। इसके लिए प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्य का सामने आना जरूरी है। फिलहाल SIT की जांच में आयोग के अधिकारियों के खिलाफ ऐसा प्रमाण नहीं मिलने की बात कही गई है।
अब तक गिरफ्तार किए गए 36 लोगों में परीक्षा से जुड़े अलग-अलग स्तर के लोग शामिल हैं। इनमें पहले गिरफ्तार किए गए 16 आरोपितों के अलावा बाद में नए सिरे से जांच के दौरान 20 और लोगों की गिरफ्तारी की गई। नए चरण में गिरफ्तार लोगों में कथित मास्टरमाइंड और सफल अभ्यर्थी अभय कुमार तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी, अक्षय तिवारी, परीक्षा संचालन एजेंसी ICN के कर्मचारी सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार, सफल अभ्यर्थी दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी, आनंद कुमार सिंह, समीर कुमार और कुंदन कुमार समेत कई नाम शामिल हैं।
जांच में सरकारी पदों पर काम कर रहे कुछ सफल अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें जमशेदपुर का फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार और स्वास्थ्य विभाग का कनीय सचिवालय सहायक अजय कुमार भी शामिल हैं। दोनों की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि इससे जांच का दायरा केवल परीक्षा में शामिल सामान्य अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा। इसके अलावा कुछ ऐसे सफल अभ्यर्थियों की भूमिका भी जांच में सामने आई है, जिन पर खुद लाभ लेने के साथ-साथ दूसरे अभ्यर्थियों से पैसे लेने या उन्हें कथित तौर पर परीक्षा में अनुचित लाभ दिलाने की कोशिश का आरोप है।
SIT की कार्रवाई में एजेंटों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। पटना के राजन कुमार, एजेंट दिलीप कुमार पासवान, कोडरमा के राजेश प्रसाद यादव और संदीप कुमार तथा देवघर के सुधाकर यादव समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बाद छपरा से मनु कुमार सिंह की गिरफ्तारी भी हुई। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये एजेंट किन अभ्यर्थियों के संपर्क में थे और इनके माध्यम से पैसों का लेनदेन किस स्तर तक हुआ।
जांच में परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी ICN के दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इससे जांचकर्ताओं के सामने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी और संचालनात्मक पहलुओं की जांच का रास्ता खुला है। वहीं, ICN के संचालक मिथिलेश सिंह अब तक फरार बताए जा रहे हैं। SIT उसकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। जांच एजेंसी के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है कि परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों और बाहरी एजेंटों के बीच किस तरह का संपर्क था और कथित अनियमितताओं को अंजाम देने के लिए किस स्तर पर समन्वय हुआ।
मामले की जांच में अभ्यर्थियों से पैसे लिए जाने की बात भी सामने आई है। पूर्व की जांच में SIT को ऐसे साक्ष्य मिले थे, जिनसे यह संकेत मिला कि कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे वसूले। झारखंड हाई कोर्ट में 2025 में प्रस्तुत जांच संबंधी रिकॉर्ड में भी यह बात दर्ज थी कि आरोपितों द्वारा प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे की वसूली के पर्याप्त साक्ष्य मिले थे, हालांकि उस समय अदालत के सामने पेश रिकॉर्ड में पूरे मूल प्रश्नपत्र के संगठित तरीके से लीक होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला था। बाद की जांच में SIT ने नए आरोपितों और कथित नेटवर्क के संबंध में और साक्ष्य जुटाए हैं।
इसी वजह से इस मामले को केवल 'पेपर लीक' कहकर देखना जांच की पूरी तस्वीर नहीं बताता। जांच एजेंसी कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे की वसूली, अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर याद कराने, एजेंटों के नेटवर्क और परीक्षा में अनुचित लाभ लेने जैसे कई पहलुओं की पड़ताल कर रही है। सितंबर में सामने आई जांच संबंधी रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले बाहर ले जाकर प्रश्न-उत्तर रटवाए गए थे और उनसे बड़ी रकम वसूली गई। इन दावों की पुष्टि और प्रत्येक आरोपित की भूमिका का निर्धारण जांच के साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
जांच में बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ भी की गई है। इससे पहले SIT करीब 350 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी थी। जांच टीम का फोकस यह पता लगाने पर रहा कि किन अभ्यर्थियों ने परीक्षा से पहले किसी संदिग्ध व्यक्ति से संपर्क किया, किसने पैसे का भुगतान किया और किसे परीक्षा से संबंधित अनुचित जानकारी मिली। पूछताछ के बाद जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले, उनके विरुद्ध गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
इस जांच का असर उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ रहा है, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा दी और चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। भर्ती परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता का सीधा असर उन हजारों युवाओं पर पड़ता है जो वर्षों तक तैयारी करते हैं। इसी कारण JSSC CGL मामले में जांच की पारदर्शिता और सभी जिम्मेदार लोगों की पहचान का मुद्दा लगातार चर्चा में है। हालांकि किसी भी व्यक्ति या संस्था की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निकाला जा सकता है।
JSSC के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सार्वजनिक स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि यदि परीक्षा में इतना बड़ा नेटवर्क सक्रिय था और पैसे का लेनदेन हो रहा था, तो आयोग के स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। कुछ नेताओं ने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग भी की है। दूसरी ओर, SIT की अब तक की कार्रवाई से यह सामने आया है कि जांच एजेंसी ने आयोग कार्यालय जाकर रिकॉर्ड की जांच की है और आयोग के अधिकारियों से पूछताछ भी की है, लेकिन फिलहाल उनके खिलाफ गिरफ्तारी योग्य साक्ष्य मिलने की जानकारी नहीं है।
SIT की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामले में सभी आरोपित सामने आ चुके हैं या जांच का दायरा यहीं तक सीमित रहेगा। ICN के संचालक मिथिलेश सिंह के फरार होने और एजेंटों के नेटवर्क की जांच जारी रहने से यह संभावना बनी हुई है कि आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसी अब तक गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर उनके संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
JSSC CGL परीक्षा विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि परीक्षा में सफल होकर सरकारी पद हासिल करने वाले कुछ लोगों पर भी जांच की आंच पहुंची है। फूड इंस्पेक्टर और कनीय सचिवालय सहायक की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट है कि SIT केवल परीक्षा में बैठे सामान्य अभ्यर्थियों तक जांच सीमित नहीं रख रही है। यदि किसी सफल अभ्यर्थी के खिलाफ कथित अनुचित तरीके से परीक्षा पास करने या नेटवर्क का हिस्सा होने के साक्ष्य मिलते हैं, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अब तक की स्थिति में जांच की सबसे अहम बात यही है कि 36 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं, लेकिन JSSC के किसी अधिकारी या कर्मचारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आयोग के अधिकारियों को जांच से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी भूमिका की जांच जारी है और फिलहाल उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। आगे की जांच में यदि कोई नया तथ्य सामने आता है तो एजेंसी उसी के आधार पर कार्रवाई कर सकती है।
मामले में आगे की दिशा अब फरार आरोपितों की गिरफ्तारी, गिरफ्तार लोगों से पूछताछ, वित्तीय लेनदेन की पड़ताल और परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन से तय होगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी अदालत के सामने किन साक्ष्यों को प्रस्तुत करती है और आरोपितों के खिलाफ आरोप किस तरह स्थापित होते हैं। फिलहाल 36 गिरफ्तारियों के बाद भी जांच जारी है और JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आने में अभी समय लग सकता है।










