सरकारी कंपनी नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड ₹1,083.06 करोड़ का डिविडेंड दिया है। यह कंपनी की ओर से अब तक किया गया सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान बताया जा रहा है।
बिजनेस न्यूज़: सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी ने केंद्र सरकार को ₹1,083.06 करोड़ का डिविडेंड दिया है, जो NALCO की ओर से अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान बताया जा रहा है। कंपनी ने इस वित्त वर्ष में टैक्स के बाद ₹5,815.76 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया।
रिकॉर्ड डिविडेंड के साथ सरकार अब एल्युमीनियम क्षेत्र में सिर्फ प्राथमिक धातु उत्पादन बढ़ाने के बजाय वैल्यू-एडेड और हाई-फिनिश उत्पादों की घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है।
NALCO ने कुल ₹2,112 करोड़ का डिविडेंड दिया
नवरत्न श्रेणी की Central Public Sector Enterprise (CPSE) NALCO ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान शेयरधारकों को कुल ₹2,112.12 करोड़ का डिविडेंड वितरित किया। यह कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल का लगभग 230 प्रतिशत है। इस कुल भुगतान में तीन अंतरिम डिविडेंड के साथ अंतिम डिविडेंड भी शामिल है।
कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रिजेंद्र प्रताप सिंह ने केंद्र सरकार को डिविडेंड का चेक केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी को सौंपा। इस अवसर पर खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। केंद्र सरकार की हिस्सेदारी के अनुपात में मिला यह भुगतान सरकारी खजाने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
₹5,815 करोड़ का टैक्स के बाद मुनाफा

NALCO का वित्त वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन कंपनी के लिए महत्वपूर्ण रहा। कंपनी ने इस अवधि में ₹5,815.76 करोड़ का Profit After Tax (PAT) दर्ज किया। मजबूत मुनाफे ने कंपनी की वित्तीय स्थिति और शेयरधारकों को रिटर्न देने की क्षमता को रेखांकित किया है। एल्युमीनियम की मांग भारत के बुनियादी ढांचे, ऑटोमोबाइल, बिजली, निर्माण और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में घरेलू एल्युमीनियम उद्योग के लिए उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और तैयार उत्पादों की क्षमता बढ़ाना भी रणनीतिक प्राथमिकता बन रहा है।
भारत हर साल करीब 4 अरब डॉलर के तैयार एल्युमीनियम उत्पाद आयात करता है
सरकार के मुताबिक भारत के पास एल्युमीनियम के प्राथमिक उत्पादन की पर्याप्त क्षमता है, लेकिन इसके बावजूद देश हर साल करीब 4 अरब डॉलर मूल्य के हाई-फिनिश एल्युमीनियम उत्पादों का आयात करता है। इसका मतलब है कि कच्चे या प्राथमिक एल्युमीनियम के उत्पादन में क्षमता होने के बावजूद वैल्यू-एडेड उत्पादों के क्षेत्र में घरेलू उद्योग को अभी और विस्तार की जरूरत है।
खान मंत्रालय का जोर अब इस अंतर को कम करने पर है। प्राथमिक एल्युमीनियम से आगे बढ़कर ऐसे उत्पाद तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें अधिक तकनीकी मूल्य और औद्योगिक उपयोगिता हो। इसके लिए आधुनिक तकनीक, घरेलू रिसर्च एंड डेवलपमेंट और बेहतर विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई जा रही है।
एल्युमिना को देश में ही वैल्यू-एडेड उत्पादों में बदलने की योजना
NALCO के उत्पादन ढांचे में एल्युमिना की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी हर साल करीब 2.1 मिलियन टन एल्युमिना का उत्पादन करती है। इसमें से लगभग 0.13 मिलियन टन एल्युमिना का निर्यात किया जाता है। सरकार की रणनीति है कि भविष्य में एल्युमिना के निर्यात को कम करके उसका इस्तेमाल भारत में ही अधिक मूल्य वाले एल्युमीनियम उत्पादों के निर्माण में किया जाए।
इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूती मिल सकती है और हाई-वैल्यू एल्युमीनियम उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।











