झारखंड में बड़ा नक्सल विरोधी अभियान: पोड़ाहाट जंगल में मुठभेड़, दो माओवादी ढेर

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के पोड़ाहाट जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में 2 माओवादी मारे गए। इलाके में सर्च ऑपरेशन और हाई अलर्ट जारी है।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के पोड़ाहाट जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में दो माओवादी मारे गए। इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया है।

सिंहभूम: Jharkhand के पश्चिमी सिंहभूम जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। सोनुवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत पोड़ाहाट जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में अब भी व्यापक सर्च ऑपरेशन जारी है और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया गया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब सुरक्षा एजेंसियां झारखंड के जंगलों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि नक्सली संगठन अब अपने पुराने गढ़ सारंडा से निकलकर नए इलाकों में पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं।

पोड़ाहाट जंगल में सुबह-सुबह शुरू हुई मुठभेड़

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार तड़के करीब छह बजे COBRA 209 Battalion के जवान सोनुवा और गोइलकेरा क्षेत्र के घने जंगलों में कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे थे। इसी दौरान केड़ाबीर इलाके के पास जवानों का सामना माओवादियों से हो गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुरक्षाबलों को देखते ही नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके जवाब में जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से कई घंटों तक रुक-रुक कर फायरिंग होती रही।

मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया, जिसमें दो माओवादियों के शव बरामद किए गए। अधिकारियों का कहना है कि जंगल में अभी भी अन्य नक्सलियों के छिपे होने की आशंका है।

पुलिस और सुरक्षाबलों ने बढ़ाई सतर्कता

पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक Amit Renu ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए कहा कि इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

उन्होंने बताया कि पूरे सारंडा और पोड़ाहाट क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन निगरानी, जंगल ट्रैकिंग और खुफिया नेटवर्क की मदद से नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक पूरे इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता।

सारंडा से नए इलाकों की ओर बढ़ रहे नक्सली

खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुख्यात माओवादी कमांडर Misir Besra के नेतृत्व में सक्रिय नक्सली समूह पिछले कुछ समय से अपनी रणनीति बदल रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि माओवादी अब सारंडा के पारंपरिक ठिकानों से हटकर कोल्हान और पोड़ाहाट जंगल क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

हाल ही में गोइलकेरा इलाके में पूर्व नक्सली रमेश चांपिया की हत्या के बाद से सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई थीं। अधिकारियों का मानना है कि यह हत्या नक्सली संगठनों की अंदरूनी रणनीति और दबदबा बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है।

नक्सल विरोधी अभियान में तेजी

झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने हाल के महीनों में नक्सलियों के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए हैं।

29 अप्रैल को भी सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में एक लाख रुपये के इनामी नक्सली इसराइल पूर्ति उर्फ अमृत को मार गिराया था। इसके अलावा कई इलाकों में हथियार, विस्फोटक और नक्सली सामग्री भी बरामद की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन लगातार कार्रवाइयों से माओवादी संगठनों का नेटवर्क कमजोर हुआ है। हालांकि जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों का कठिन भूगोल अब भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ है।

झारखंड में नक्सलवाद की चुनौती

Counterinsurgency से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड लंबे समय से नक्सली हिंसा से प्रभावित रहा है। पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और लातेहार जैसे जिले कई वर्षों तक माओवादी गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे हैं।

घने जंगल, कठिन पहाड़ी इलाके और सीमित बुनियादी ढांचा नक्सलियों को छिपने और गतिविधियां चलाने में मदद करता रहा है।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार ने संयुक्त अभियानों, सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क विस्तार और स्थानीय विकास योजनाओं के जरिए नक्सली प्रभाव कम करने की कोशिश की है।

स्थानीय लोगों में दहशत और सतर्कता

मुठभेड़ के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल देखा गया। कई ग्रामीणों ने जंगल की ओर जाने से परहेज किया और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की।

सुरक्षा बलों ने स्थानीय नागरिकों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।

CRPF और कोबरा यूनिट की अहम भूमिका

Central Reserve Police Force और उसकी विशेष कोबरा यूनिट को जंगल युद्ध और नक्सल विरोधी अभियानों में विशेषज्ञ माना जाता है।

कोबरा बटालियन के जवान कठिन जंगल इलाकों में ऑपरेशन चलाने, ट्रैकिंग और गुरिल्ला रणनीति से निपटने में प्रशिक्षित होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया सफलता सुरक्षा बलों की बेहतर खुफिया जानकारी और समन्वित रणनीति का परिणाम है।

आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं अभियान

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि माओवादी संगठन नए इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से आने वाले दिनों में और बड़े सर्च ऑपरेशन चलाए जा सकते हैं।

अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जंगल के कई संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी जारी रहेगी। इसके अलावा स्थानीय पुलिस, CRPF और खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय और मजबूत किया जा रहा है।

विकास और सुरक्षा दोनों पर फोकस

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से नक्सल समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है।

सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और रोजगार योजनाओं को बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि विकास और सुरक्षा रणनीति साथ-साथ चलने से ही नक्सली प्रभाव को स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है।

क्षेत्र में फिलहाल हाई अलर्ट

मुठभेड़ के बाद पूरे पोड़ाहाट और सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। जंगल के कई हिस्सों में अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं और लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है।

अधिकारियों के अनुसार, अभी भी कुछ नक्सलियों के इलाके में छिपे होने की संभावना है। इसलिए सुरक्षाबल हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं और ऑपरेशन को अगले कुछ दिनों तक जारी रखा जा सकता है।

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