झारखंड विधानसभा बजट सत्र में रिकॉर्ड समय और प्रश्न, लोकतांत्रिक परिपक्वता का दिया संकेत

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में रिकॉर्ड समय में सवाल-जवाब हुए, दिखा लोकतांत्रिक परिपक्वता और पारदर्शिता। जानें विधानसभा सत्र में उठाए गए प्रमुख मुद्दे और वाद

बुधवार को समाप्त हुआ झारखंड विधानसभा का बजट सत्र कई मायनों में उल्लेखनीय रहा। राज्य की राजनीति में अक्सर विधानसभा सत्रों के दौरान लगातार हंगामे और स्थगन की स्थिति देखने को मिलती रही है, लेकिन इस बार कार्यवाही अपेक्षाकृत सुचारु ढंग से चली।

रांची: झारखंड विधानसभा का बजट सत्र इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। तय 66 घंटे के बजट सत्र की अवधि इस बार 74 घंटे तक बढ़ गई, जिससे यह पारंपरिक समय से अधिक लंबा रहा। सत्र के दौरान रिकॉर्ड संख्या में प्रश्न पूछे गए और नीतिगत मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई, जो राज्य की लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली में परिपक्वता का संकेत है।

राज्य की राजनीति में अक्सर विधानसभा सत्रों के दौरान हंगामे और स्थगन की घटनाएं देखने को मिलती रही हैं। लेकिन इस बजट सत्र में कार्यवाही अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और सुचारु रही। इससे सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद की गुणवत्ता में सुधार और संसदीय प्रक्रियाओं के प्रति विधायकों की बढ़ती गंभीरता का प्रमाण मिलता है।

प्रश्नकाल में रिकॉर्ड सक्रियता

सत्र की सबसे बड़ी विशेषता रही विधायकों द्वारा पूछे गए रिकॉर्ड संख्या में प्रश्न। प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न विभागों और प्रशासनिक मामलों पर विस्तार से जवाब मांगे गए। इससे न केवल शासन की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ी, बल्कि यह भी संकेत मिलता है कि विधायक अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों के प्रति अधिक सजग और सक्रिय हो रहे हैं।

इस सत्र में कुल 242 अल्पसूचित प्रश्न पूछे गए, जिनमें से 62 का उत्तर मिला। इसके अलावा 758 तारांकित प्रश्न पूछे गए, जिनमें से 57 का उत्तर सदन में प्रस्तुत किया गया। साथ ही, 72 ध्यानाकर्षण सूचनाओं में से 55 का जवाब दिया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सदन में चर्चा केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि वास्तविक जनहित और नीति निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ी थी।

स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो की संतुलित भूमिका

सत्र में स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो ने सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित और लोकतांत्रिक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने नियमों का पालन सुनिश्चित किया और विपक्ष को पर्याप्त समय तथा अवसर प्रदान किया। कई बार जब सदन का माहौल गरमाने लगा, तो स्पीकर ने संयमित हस्तक्षेप कर स्थिति को सामान्य किया।

एक घटना के दौरान मांडू के आजसू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो गुस्से में आसन के पास आ गए और रिपोर्टर टेबल पर मुक्का मारा। उन्हें मार्शलों ने तुरंत बाहर निकाला। सत्तापक्ष ने भी इस व्यवहार का विरोध किया। इस दौरान स्पीकर ने पूरी तरह संयम बरता और सदन की कार्यवाही पर किसी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़ा।

बेहतर समन्वय और राजनीतिक परिपक्वता

सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की एक नई शैली देखने को मिली। विभिन्न विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों पर तीखी बहस हुई, लेकिन यह लोकतांत्रिक बहस की सीमाओं में ही रही। कई मामलों में सर्वसम्मति या आंशिक सहमति बनती दिखी, जो राज्य की राजनीतिक संस्कृति में धीरे-धीरे परिपक्वता का संकेत है।

यदि यह परिपक्वता लगातार बनी रहती है, तो नीति निर्माण की प्रक्रिया और भी प्रभावी हो सकती है। सांसदों और विधायकों की सक्रिय भागीदारी, सवाल-जवाब और संतुलित बहस यह दर्शाती है कि विधानसभा न केवल कानून बनाने का मंच है, बल्कि जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

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