वीरों की धरती झुंझुनूं के पूर्व सैनिक डॉ. दशरथ सिंह शेखावत ने 138 डिग्रियां हासिल कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। तीन पीढ़ियों से सेना से जुड़े शेखावत कारगिल युद्ध का हिस्सा रहे और अब सैनिकों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
सक्सेस स्टोरी: राजस्थान के झुंझुनूं जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने शिक्षा और समर्पण की नई मिसाल कायम की है। पूर्व सैनिक Dashrath Singh Shekhawat को International Book of Records द्वारा “मोस्ट एजुकेशनली क्वालिफाइड पर्सन ऑफ द वर्ल्ड” का खिताब दिया गया है। उनके पास कुल 138 डिग्रियां, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट्स हैं, जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है।
हाल ही में उन्हें Indira Gandhi National Open University के 39वें दीक्षांत समारोह में ‘वैदिक अध्ययन’ में परास्नातक (PG) की 138वीं डिग्री विशिष्ट योग्यता के साथ प्रदान की गई।
तीन पीढ़ियों से सेना में सेवा का इतिहास
डॉ. दशरथ सिंह शेखावत का जीवन केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश सेवा से भी गहराई से जुड़ा रहा है। वे भारतीय सेना की 9th Rajput Infantry Battalion में वर्ष 1988 में सिपाही के रूप में भर्ती हुए थे।
उनका परिवार भी देशभक्ति की परंपरा से जुड़ा रहा है। उनके दादा बाघ सिंह और पिता रघुवीर सिंह शेखावत भी सेना में रह चुके हैं, जिससे वे परिवार की तीसरी पीढ़ी के सैनिक बने।
संघर्षों से भरा बचपन और पढ़ाई का जुनून
झुंझुनूं के नवलगढ़ तहसील के खिरोड़ गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे डॉ. शेखावत का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में शिक्षा का माहौल नहीं था और पढ़ाई जारी रखना उनके लिए आसान नहीं था।
कई बार उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए खेतों की सब्जियां बेचकर फीस जुटानी पड़ी। एक समय ऐसा भी आया जब फीस न भर पाने के कारण कॉलेज से उनका नाम तक काट दिया गया।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा के प्रति अपने जुनून को जारी रखा। यही जिद आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
सेना में रहते हुए भी जारी रखी पढ़ाई
सेना में सेवा के दौरान भी डॉ. शेखावत ने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी। उनकी तैनाती पंजाब, असम और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में रही, जहां वे Kargil War का भी हिस्सा रहे।
उन्होंने बताया कि वे हर साल अपनी दो महीने की छुट्टी केवल परीक्षा देने के लिए लेते थे। उन्होंने कभी त्योहारों के लिए छुट्टी नहीं ली, बल्कि उस समय का उपयोग भी अपनी पढ़ाई में किया।
यह अनुशासन और समर्पण ही उनकी सफलता की असली कुंजी रहा।

138 डिग्रियों का अद्भुत रिकॉर्ड
डॉ. शेखावत की शैक्षणिक उपलब्धियां बेहद व्यापक और विविध हैं। उन्होंने अलग-अलग विषयों में उच्च शिक्षा हासिल की है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में कई पीएचडी, दर्जनों पोस्टग्रेजुएट डिग्रियां, ग्रेजुएशन, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट शामिल हैं।
उन्होंने एलएलबी, एलएलएम, बीजेएमसी और बीएड जैसी डिग्रियां नियमित छात्र के रूप में पूरी कीं, जबकि कई अन्य कोर्स उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पूरे किए।
11 अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड्स
डॉ. शेखावत के नाम केवल डिग्रियां ही नहीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज हैं।
उन्हें विभिन्न वैश्विक रिकॉर्ड संस्थाओं जैसे हॉवर्ड बुक, एशिया बुक, लंदन बुक और यूएसए बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है।
इन सभी उपलब्धियों ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में एक वैश्विक पहचान दिलाई है।
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा की राह
साल 2004 में सेना से रिटायर होने के बाद डॉ. शेखावत ने अपने ज्ञान का उपयोग समाज सेवा के लिए करने का निर्णय लिया।
वर्तमान में वे रक्षा क्षेत्र से जुड़े मामलों में कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं और पूर्व सैनिकों व जवानों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।
उन्होंने अब तक लगभग 2,500 कानूनी मामलों में सहायता की है और इनमें से अधिकांश में सफलता प्राप्त की है।
शिक्षा और समर्पण की मिसाल
डॉ. दशरथ सिंह शेखावत की कहानी यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है।
उनका जीवन न केवल छात्रों के लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को पूरा करना चाहता है।








