रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी दौरे के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा भारत की ऊर्जा आपूर्ति, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा असर डालती है, इसलिए हालात पर लगातार नजर रखना जरूरी है।
Strait of Hormuz Impact on India: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी के बर्लिन दौरे के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी घटनाक्रम पर चिंता जताई है। तीन दिवसीय यात्रा के तहत उन्होंने रक्षा एवं सुरक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत इस क्षेत्र पर ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक निर्भर है, इसलिए वहां किसी भी तरह की बाधा देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
होर्मुज में तनाव और भारत की चिंता
राजनाथ सिंह ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही में रुकावट कोई दूर की समस्या नहीं है, बल्कि यह भारत के लिए एक वास्तविक और तत्काल चिंता का विषय है। मौजूदा वैश्विक हालात में यह मार्ग ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम बना हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहा संघर्ष अब वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है। इसका प्रभाव तेल आपूर्ति, व्यापार और महंगाई जैसे कई अहम क्षेत्रों पर देखा जा रहा है।

सरकार की रणनीति और निगरानी व्यवस्था
रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने हालात पर नजर रखने के लिए एक मंत्रियों का समूह (GoM) बनाया है, जो लगातार ऊर्जा आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं की स्थिति की समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित संकट से पहले तैयारी सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रित रखना और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखना है, ताकि आम लोगों पर असर कम से कम पड़े।
भारत-जर्मनी सहयोग पर जोर
राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जर्मनी की औद्योगिक क्षमता और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलाकर रक्षा उत्पादन में नई संभावनाएं तैयार की जा सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, जो भविष्य में रक्षा तकनीक और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा दे सकती है।








