जिबूती चुनाव: इस्माइल उमर गुएलेह को मिली बड़ी जीत, छठी बार बने राष्ट्रपति

जिबूती में राष्ट्रपति इस्माइल उमर गुलेह ने 98% वोटों से लगातार छठी जीत दर्ज की। शांतिपूर्ण चुनाव में सीमित विपक्ष के बीच सत्ता बरकरार रही।

जिबूती में इस्माइल उमर गुलेह ने एक बार फिर भारी बहुमत से राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। उन्हें लगभग 98 प्रतिशत वोट मिले और यह उनकी लगातार छठी जीत है। सीमित विपक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के बीच यह परिणाम देश की राजनीतिक निरंतरता और लंबे शासन को दर्शाता है।

Djibouti Presidential Election 2026: अफ्रीकी देश जिबूती में हुए राष्ट्रपति चुनाव में इस्माइल उमर गुलेह ने एक बार फिर सत्ता हासिल कर ली है, जहां उन्हें लगभग 98 प्रतिशत वोट मिले। यह चुनाव 2026 में हुआ और देश की करीब 10 लाख आबादी के बीच शांतिपूर्ण मतदान के रूप में संपन्न बताया गया। गुलेह ने अपने एकमात्र प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद फराह समातर को हराकर लगातार छठी बार राष्ट्रपति पद संभाला है। वे 1999 से देश का नेतृत्व कर रहे हैं और इस बार भी उनकी जीत ने जिबूती की राजनीतिक व्यवस्था और लंबे समय से चले आ रहे नेतृत्व ढांचे को फिर सामने ला दिया है।

भारी जीत के साथ फिर सत्ता में वापसी

रिपोर्ट्स के अनुसार इस्माइल उमर गुलेह को चुनाव में 98 प्रतिशत के करीब वोट मिले। यह उनकी लगातार छठी राष्ट्रपति जीत है, जो देश की राजनीतिक स्थिरता और एकतरफा मुकाबले की तस्वीर को दर्शाती है।

उनके सामने सिर्फ एक प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार थे, मोहम्मद फराह समातर, जो पहले सत्ताधारी पार्टी से जुड़े रहे हैं। चुनाव अधिकारियों ने मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बताया, जबकि नतीजों के बाद राजधानी में समर्थकों ने जश्न मनाया।

दो दशक से अधिक समय से सत्ता में गुलेह

इस्माइल उमर गुलेह पहली बार साल 1999 में राष्ट्रपति बने थे और तब से लगातार देश का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने अपने चाचा और पूर्व राष्ट्रपति हसन गौलेद अप्तिदोन के बाद सत्ता संभाली थी।

उनके लंबे कार्यकाल के दौरान जिबूती की राजनीति में परिवार-आधारित नेतृत्व का प्रभाव बना रहा है। विपक्षी दल अक्सर चुनावों का बहिष्कार करते हैं और राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

रणनीतिक रूप से अहम देश जिबूती

जिबूती अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देश है। यहां अमेरिका, चीन, फ्रांस और जापान जैसे देशों के सैन्य अड्डे मौजूद हैं, जिससे इसकी वैश्विक अहमियत बढ़ जाती है।

देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से इन विदेशी सैन्य ठिकानों से मिलने वाली आय और इथियोपिया को दी जाने वाली बंदरगाह सेवाओं पर निर्भर है। रेड सी और एडेन की खाड़ी को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर इसकी स्थिति इसे और भी खास बनाती है।

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