जनवरी 2026 में खुदरा महंगाई दर 2.75 प्रतिशत रही। शहरी क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 2.44 प्रतिशत और ग्रामीण में 1.96 प्रतिशत रही। हाउसिंग महंगाई 2.05 प्रतिशत दर्ज की गई। नई CPI सीरीज (2024 आधार वर्ष) के आंकड़े MoSPI ने जारी किए।
CPI: भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी 2026 में 2.75 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने नई सीरीज (आधार वर्ष 2024) के अनुसार जारी किया। वहीं, खाद्य महंगाई पर ध्यान दें तो जनवरी में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) आधारित महंगाई दर 2.13 प्रतिशत रही।
आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में 1.96 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह बढ़कर 2.44 प्रतिशत हो गई। हाउसिंग महंगाई दर जनवरी में सालाना आधार पर 2.05 प्रतिशत रही। ग्रामीण क्षेत्रों में मकान और किराए से जुड़े खर्च 2.39 प्रतिशत बढ़े, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 1.92 प्रतिशत रही।
नई CPI सीरीज और आधार वर्ष में बदलाव
MoSPI के तहत कार्यरत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने महंगाई के आंकड़ों में आधार वर्ष को 2024 कर दिया है। पहले CPI के आंकड़े 2012 के आधार वर्ष पर आधारित थे। नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़ाकर 308 और सेवाओं की संख्या 40 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पिछले 12 वर्षों में उपभोक्ताओं के खर्च के पैटर्न में आए बदलाव को सही तरीके से दर्शाया जा सके।
इस नई संरचना में सेवाओं (services) का वेटेज बढ़ाया गया है, जबकि खाद्य पदार्थों का हिस्सा घटाया गया है। इसके अलावा, कुछ पुराने आइटम हटाए गए हैं और कई नए आइटम जोड़े गए हैं।
नए शामिल किए गए आइटमों में ग्रामीण आवास, ऑनलाइन मीडिया और स्ट्रीमिंग सेवाएं, वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पाद, जौ और उससे बने उत्पाद, पेन ड्राइव और एक्सटर्नल हार्ड डिस्क, अटेंडेंट, बेबीसिटर और जिम इक्विपमेंट शामिल हैं। हटाए गए आइटमों में वीसीआर, डीवीडी प्लेयर, रेडियो, टेप रिकॉर्डर, सेकेंड हैंड कपड़े और नारियल रेशा या रस्सी जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इस बदलाव से CPI अब आधुनिक जीवनशैली और उपभोक्ताओं की नई प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से दर्शाएगा।
ग्रामीण और शहरी महंगाई में अंतर
CPI आंकड़ों में यह भी दिखा कि महंगाई का असर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग रहा। खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि शहरी क्षेत्रों में ज्यादा रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अपेक्षाकृत कम रही। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती मांग और बदलते उपभोक्ता पैटर्न के कारण यह अंतर आया है। वहीं हाउसिंग महंगाई में ग्रामीण क्षेत्र अपेक्षाकृत ज्यादा प्रभावित रहा, जो ग्रामीण आवास और किराए की बढ़ोतरी का संकेत देता है।
विशेषज्ञों का नजरिया
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा कि नई CPI सीरीज से निकली महंगाई दर की गणना नियर टर्म में मौद्रिक नीति या ब्याज दरों पर बड़ा असर नहीं डालेगी। उनका कहना है कि लंबी अवधि में ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहने की संभावना ज्यादा है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं भारत में ग्रोथ और महंगाई में साइक्लिकल अपटर्न और अमेरिका-भारत ट्रेड डील के पूरा होने के बाद बढ़ता भरोसा।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि नई सीरीज में खाद्य पदार्थों का वेटेज घटने और सेवाओं का वेटेज बढ़ने से अब महंगाई के आंकड़े अधिक वास्तविक जीवन के खर्च पैटर्न को दर्शाएंगे। यह उपभोक्ता और नीति निर्माताओं दोनों के लिए ज्यादा उपयोगी साबित होगा।
नई सीरीज का असर और वेटेज
CPI के नए आधार वर्ष में अब सेवाओं का वेटेज ज्यादा होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और अन्य सेवाओं के दाम महंगाई की गणना में अधिक योगदान देंगे। वहीं, खाद्य पदार्थों का वेटेज घटने से केवल खाने-पीने की चीजों में उतार-चढ़ाव महंगाई को प्रभावित करने में कम भूमिका निभाएगा। इस बदलाव से यह समझना आसान होगा कि उपभोक्ता वास्तव में अपनी आय कहां खर्च कर रहे हैं और उनके जीवनस्तर पर महंगाई का क्या असर पड़ रहा है।
नई सीरीज में यह भी साफ किया गया है कि हर श्रेणी को दिया गया वेटेज आधिकारिक घरेलू खर्च सर्वेक्षण के आधार पर तय किया गया है। इससे यह पता चलता है कि औसत भारतीय परिवार कितना पैसा खाने-पीने, आवास, ईंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवाओं पर खर्च करता है।
क्यों जरूरी था नया आधार वर्ष
CPI में नया आधार वर्ष इसलिए लाया गया क्योंकि पिछले आधार वर्ष 2012 से उपभोक्ता खर्च के पैटर्न में कई बदलाव आ चुके थे। डिजिटल मीडिया, स्ट्रीमिंग सर्विसेज, वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पाद और नए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट अब आम जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। वहीं पुराने आइटम जैसे वीसीआर, टेप रिकॉर्डर और सेकेंड हैंड कपड़े अब व्यापक रूप से इस्तेमाल नहीं होते। नया आधार वर्ष इन बदलावों को सही तरीके से आंकड़ों में दर्शाता है।










