जोधपुर के बासनी में फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद केमिकल की तेज बदबू से आसपास के करीब 20 मकान खाली कराए गए। 14 फायर ब्रिगेड कर्मचारी झुलसे हैं। चार की हालत गंभीर है, जबकि तीन वेंटिलेटर पर हैं।
जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर के बासनी इलाके में SR हैंडीक्राफ्ट फैक्ट्री में आग के दौरान केमिकल से भरे ड्रमों में हुए धमाकों के बाद आसपास के रिहायशी इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हादसे के करीब 20 घंटे बाद भी फैक्ट्री से धुआं निकलता रहा और थिनर, लीकर तथा सीलर जैसे केमिकल की तेज गंध आसपास की कॉलोनी तक फैलती रही। बदबू और धुएं से परेशान कई परिवारों को अपने घर खाली कर रिश्तेदारों के यहां जाना पड़ा। हादसे में फायर ब्रिगेड के 14 कर्मचारी झुलस गए थे। इनमें से चार की हालत गंभीर बताई गई है और तीन कर्मचारी वेंटिलेटर पर हैं। घायलों का इलाज महात्मा गांधी हॉस्पिटल में चल रहा है।
करीब 20 मकान खाली करवाए गए
फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोगों के अनुसार, आग और धमाकों के बाद सुरक्षा को देखते हुए करीब 20 मकानों को खाली करवाया गया। प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह जाने के लिए कहा गया, जिसके बाद कई लोग अपने रिश्तेदारों के घर चले गए।
कुछ परिवारों ने रात रिश्तेदारों के यहां बिताई। गुरुवार सुबह कुछ लोग अपने घर लौटे, लेकिन फैक्ट्री और आसपास के क्षेत्र में मौजूद केमिकल की तेज गंध के कारण उन्हें दोबारा घर छोड़ना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों के आसपास खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा है। कई परिवारों ने बच्चों और अन्य सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है।
20 घंटे बाद भी फैक्ट्री से निकल रहा था धुआं
घटना के करीब 20 घंटे बाद गुरुवार सुबह लगभग 11 बजे तक फैक्ट्री से धुआं निकलता दिखाई दिया। फैक्ट्री की दीवारों पर कालिख जमा थी और अंदर रखे सामान तथा केमिकल ड्रमों से भी धुआं निकलने की बात सामने आई।
फैक्ट्री के एक हिस्से की दीवार ढह चुकी थी। आग और धमाकों की वजह से आसपास का क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, थिनर, लीकर और सीलर केमिकल की गंध पूरी कॉलोनी में फैल गई थी। इसी कारण कई परिवारों के लिए अपने घरों में वापस जाकर रहना संभव नहीं हो पा रहा था।
धमाका इतना तेज कि RCC की छत गिर गई
हादसे की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री की RCC छत का एक हिस्सा भी टूटकर गिर गया। आसपास के मकानों की दीवारों में भी दरारें आने की बात स्थानीय निवासियों ने कही है। फैक्ट्री से सटे एक मकान के मालिक नरपत ने बताया कि धमाके के बाद उनके घर की दीवारों में दरारें आ गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि छत पर रखी पानी की टंकी तक पिघल गई। नरपत के मुताबिक, उनका परिवार भी हादसे के बाद दूसरी जगह रहने को मजबूर है क्योंकि सुबह तक घर के आसपास की स्थिति सामान्य नहीं हुई थी।
स्थानीय निवासी बोले- बदबू की वजह से लौटना मुश्किल
कॉलोनी में रहने वाले रामनिवास ने बताया कि हादसे के बाद उनके परिवार के पांच सदस्य दूसरी जगह चले गए थे। उन्होंने कहा कि परिवार के लोग गुरुवार सुबह घर वापस आए, लेकिन केमिकल की तेज गंध सहन नहीं कर पाए। इसके बाद बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को दोबारा रिश्तेदारों के यहां भेज दिया गया।
रामनिवास के अनुसार, पानी भी कॉलोनी के रास्ते में फैल गया था। उन्होंने दावा किया कि हादसे के बाद भी इलाके में ड्रम फूले हुए दिखाई दे रहे थे और स्थिति सामान्य नहीं हुई थी। स्थानीय निवासियों की ये बातें हादसे के बाद रिहायशी क्षेत्र में बनी परिस्थितियों को दर्शाती हैं। हालांकि, पानी और केमिकल के फैलाव से जुड़े तकनीकी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

10 साल से शिकायत का दावा
फैक्ट्री के आसपास रहने वाले घेवराम ने बताया कि उनका परिवार करीब 10 वर्षों से कॉलोनी में रह रहा है। उनके अनुसार, आग लगने के बाद आसपास के घरों को खाली कराया गया और लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा गया।
घेवराम ने बताया कि उनके परिवार में 12 लोग हैं। हादसे के बाद वह सभी सदस्यों को लेकर शोभावतों की ढाणी स्थित रिश्तेदार के घर चले गए और रात वहीं बिताई।
उन्हें उम्मीद थी कि सुबह तक स्थिति सामान्य हो जाएगी। लेकिन गुरुवार सुबह जब उनके बेटे की बहू घर आईं तो उन्हें उल्टियां होने लगीं। इसके बाद परिवार को फिर रिश्तेदारों के यहां भेज दिया गया।
घेवराम ने दावा किया कि उन्होंने फैक्ट्री से जुड़ी समस्याओं को लेकर पिछले करीब 10 वर्षों में कई जगह शिकायतें कीं, लेकिन उनके अनुसार कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
फैक्ट्री से सटे मकानों को नुकसान
हादसे में केवल फैक्ट्री परिसर ही प्रभावित नहीं हुआ, बल्कि आसपास के रिहायशी मकानों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, धमाके की तीव्रता के कारण फैक्ट्री से सटे मकानों की दीवारों में दरारें आईं। कुछ घरों में रखी वस्तुओं को भी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
नरपत ने बताया कि उनके घर की दीवारों में दरारें आने के अलावा पानी की टंकी भी गर्मी के कारण पिघल गई। उनका परिवार फिलहाल दूसरी जगह रह रहा है।
इन दावों के आधार पर प्रभावित मकानों की संरचनात्मक सुरक्षा और नुकसान का आधिकारिक आकलन किया जाना बाकी है।
फायर ब्रिगेड के 14 कर्मचारी झुलसे
हादसे के दौरान आग बुझाने और स्थिति नियंत्रित करने पहुंचे फायर ब्रिगेड कर्मचारियों को भी गंभीर खतरे का सामना करना पड़ा। केमिकल से भरे ड्रमों में धमाके होने के कारण 14 फायर ब्रिगेड कर्मचारी झुलस गए।
घायलों को महात्मा गांधी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चार कर्मचारियों की हालत गंभीर है और इनमें तीन वेंटिलेटर पर हैं।
केमिकल से जुड़ी आग में बचाव और अग्निशमन अभियान सामान्य आग की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में घटना के बाद फैक्ट्री परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण बनी हुई है।
लोगों की सुरक्षा और स्थिति सामान्य होने पर नजर
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता फैक्ट्री के आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर है। कई लोग घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं, जबकि कुछ परिवारों ने लौटने की कोशिश की लेकिन तेज गंध के कारण वापस जाना पड़ा। गुरुवार सुबह तक फैक्ट्री से धुआं निकलने और आसपास के क्षेत्र में केमिकल की गंध बने रहने की स्थानीय लोगों की जानकारी के बाद प्रभावित क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है।
फिलहाल हादसे से जुड़े नुकसान, केमिकल के प्रभाव और फैक्ट्री में आग लगने के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। स्थानीय लोगों की शिकायतें और प्रभावित मकानों का नुकसान भी इस घटना के बाद जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।
जोधपुर के बासनी क्षेत्र की यह घटना औद्योगिक इकाइयों और रिहायशी इलाकों के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करती है। फिलहाल प्राथमिकता घायलों के इलाज, प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और फैक्ट्री परिसर में बचे हुए केमिकल तथा धुएं से जुड़े जोखिम को नियंत्रित करने की है।











