जयपुर: बीजेपी का पलटवार: मदन राठौड़ बोले- अगर वोट चोरी करते तो केरल और तमिलनाडु में भी करते

पश्चिम बंगाल चुनाव में वोट चोरी के आरोपों पर BJP नेता मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधा। कहा कि अगर वोट चोरी होती तो केरल और तमिलनाडु में भी नतीजे अलग होते।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा चुनाव प्रक्रिया और वोटिंग को लेकर सवाल उठाए जाने के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा पलटवार किया है।

जयपुर: राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि भाजपा वास्तव में “वोट चोरी” करती, तो वह केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहती। उन्होंने कहा कि भाजपा ने केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी चुनाव लड़ा, जहां पार्टी को सीमित सफलता मिली, लेकिन वहां किसी तरह की शिकायत नहीं की गई।

अगर वोट चोरी करते तो केरल भी जीत लेते

मदन राठौड़ ने कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उस पर इस प्रकार के आरोप लगाना लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान है।

उन्होंने कहा:

अगर भाजपा वोट चोरी करती, तो केरल में भी कर लेती। वहां कांग्रेस जीत गई, तो क्या वहां की जीत भी फर्जी है? तमिलनाडु में भाजपा सिर्फ एक सीट जीतकर आई है। यदि चुनाव में धांधली संभव होती, तो वहां भी परिणाम अलग हो सकते थे।

राठौड़ ने कहा कि विपक्ष अपनी हार स्वीकार करने के बजाय चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

कांग्रेस पर “दोहरा चरित्र” अपनाने का आरोप

भाजपा नेता ने कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केरल में जीत का जश्न मना रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में हार के बाद चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं पर सवाल उठा रही है।

उनके अनुसार

  • केरल में वही चुनाव आयोग था
  • वही मतदान प्रणाली इस्तेमाल हुई
  • वही संवैधानिक संस्थाएं थीं

फिर भी कांग्रेस वहां के परिणाम स्वीकार कर रही है, जबकि बंगाल में हार के बाद आरोप लगा रही है।

मदन राठौड़ ने कहा कि यह “राजनीतिक सुविधा के हिसाब से लोकतंत्र को स्वीकार करने” जैसा व्यवहार है।

“जनादेश का सम्मान करना चाहिए”

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा ने भी कई राज्यों में लंबे समय तक संघर्ष किया और कई चुनाव हारे, लेकिन कभी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए।

उन्होंने कहा:

“हमने केरल में वर्षों संघर्ष किया। तमिलनाडु में भी सीमित सीटें मिलीं, लेकिन हमने जनादेश को स्वीकार किया। लोकतंत्र में जीत और हार दोनों को स्वीकार करना पड़ता है।”

राठौड़ ने विपक्ष पर जनता के फैसले का अपमान करने का आरोप लगाया।

पश्चिम बंगाल चुनाव और बढ़ता विवाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR), वोट कटौती और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

विशेष रूप से:

  • वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाने का मुद्दा
  • कई सीटों पर कम जीत का अंतर
  • और चुनाव बाद हिंसा

इन सभी मामलों ने राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही, जबकि भाजपा इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है।

चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस

भाजपा लगातार चुनाव आयोग का बचाव कर रही है और इसे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष संस्था बता रही है। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि कुछ राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं की गहन जांच की जरूरत है।

  • चुनाव आयोग की विश्वसनीयता लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ी है
  • लगातार राजनीतिक हमले संस्थाओं पर जनता का भरोसा कमजोर कर सकते हैं
  • इसलिए सभी दलों को जिम्मेदार बयान देने की आवश्यकता है

राष्ट्रीय राजनीति पर असर

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के चुनाव परिणामों ने राष्ट्रीय राजनीति की दिशा को भी प्रभावित किया है।

  • बंगाल में भाजपा की बढ़त
  • तमिलनाडु में क्षेत्रीय दलों का उदय
  • और केरल में कांग्रेस की सफलता

इन सभी ने विपक्षी गठबंधन और भाजपा दोनों की रणनीति को नया रूप दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए यह बयानबाजी और राजनीतिक ध्रुवीकरण आगे और बढ़ सकता है।

प्रधानमंत्री के बयान का भी जिक्र

मदन राठौड़ ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में राजनीतिक दलों से “बदले की राजनीति छोड़ने” की अपील की थी।

राठौड़ के अनुसार, लोकतंत्र में स्वस्थ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद संस्थाओं और जनादेश पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

विपक्ष की रणनीति पर सवाल

भाजपा नेताओं का दावा है कि विपक्ष चुनावी हार के बाद अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए संस्थाओं पर आरोप लगा रहा है। वहीं विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाना उसका अधिकार है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बहस आने वाले महीनों में और तेज हो सकती है, खासकर यदि चुनाव परिणामों को अदालतों में चुनौती दी जाती है।

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