Jaipur में पुलिस ने IPL क्रिकेट मैच पर ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी ‘DX-13’ सट्टा लाइन से लोगों को जोड़ रहे थे। मौके से लैपटॉप, मोबाइल और लाखों रुपए का हिसाब-किताब बरामद हुआ।
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) क्रिकेट मैचों पर चल रहे एक बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस की स्पेशल टीम ने शहर के खोरा बिसल इलाके में छापा मारकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित रूप से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को क्रिकेट सट्टे से जोड़ रहे थे।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और लाखों रुपए के लेन-देन से जुड़ी डायरी जब्त की हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी “DX-13” नामक सट्टा लाइन के माध्यम से IPL मैचों पर अवैध बेटिंग ऑपरेट कर रहे थे।
गोविंद नगर इलाके में चल रहा था ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई जयपुर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स विंग की निगरानी में की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि खोरा बिसल क्षेत्र के गोविंद नगर स्थित एक मकान में IPL मैचों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन किया जा रहा है।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने देर रात इलाके की घेराबंदी कर मकान पर छापा मारा। अंदर प्रवेश करने पर तीन लोग मोबाइल और लैपटॉप के जरिए लाइव सट्टा संचालन करते हुए मिले।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार, अंकित और संजय के रूप में हुई है।
“DX-13” सट्टा लाइन से जोड़े जा रहे थे ग्राहक
जांच में सामने आया कि आरोपी “DX-13” नामक सट्टा लाइन का इस्तेमाल कर लोगों को ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ते थे।
सट्टा लाइन आमतौर पर अवैध ऑनलाइन नेटवर्क होते हैं, जिनके जरिए मैच के हर ओवर, रन, विकेट और अन्य घटनाओं पर दांव लगाया जाता है। पुलिस का कहना है कि आरोपी मोबाइल ऐप और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों से संपर्क बनाए हुए थे।

छापे में भारी मात्रा में उपकरण और दस्तावेज जब्त
पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग सामग्री बरामद की है। जब्त सामान में शामिल हैं:
- 18 मोबाइल फोन
- 5 लैपटॉप
- 24 एटीएम कार्ड
- 13 बैंक पासबुक
- 5 सट्टा डायरी
वाई-फाई राउटर और अन्य डिजिटल उपकरण
पुलिस का कहना है कि सट्टा डायरी में लाखों रुपए के लेन-देन का रिकॉर्ड मिला है, जिसकी जांच की जा रही है।
ऑनलाइन बेटिंग और डिजिटल पेमेंट की जांच शुरू
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह नेटवर्क केवल जयपुर तक सीमित था या अन्य शहरों और राज्यों से भी जुड़ा हुआ था।
पुलिस डिजिटल ट्रांजैक्शन, बैंक खातों और मोबाइल डेटा की फॉरेंसिक जांच कर रही है। शुरुआती संकेतों से यह भी संभावना जताई जा रही है कि नेटवर्क कई ऑनलाइन खातों और फर्जी बैंकिंग माध्यमों का उपयोग कर रहा था।
IPL के दौरान बढ़ती सट्टेबाजी चिंता का विषय
भारत में IPL दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिकेट लीगों में से एक है, लेकिन इसके साथ अवैध सट्टेबाजी का नेटवर्क भी लगातार बढ़ता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों के विस्तार के कारण अवैध बेटिंग रैकेट को संचालित करना पहले की तुलना में आसान हो गया है।
हर साल IPL सीजन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में सट्टेबाजी से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।
कानून और साइबर निगरानी की चुनौती
ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क को रोकना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कई नेटवर्क विदेशी सर्वर, एन्क्रिप्टेड चैट ऐप और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी पहचान करना कठिन हो जाता है।
जयपुर पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कई राज्य सरकारें ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ा रही हैं।
आरोपियों से पूछताछ जारी
पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े हुए थे।
वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक खातों की होगी जांच
जांच एजेंसियां जब्त किए गए एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक और डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही हैं। पुलिस को आशंका है कि कई बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध रकम के लेन-देन के लिए किया गया।
वित्तीय जांच एजेंसियों को भी इस मामले में शामिल किया जा सकता है, ताकि मनी ट्रेल और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की पहचान की जा सके।
विशेषज्ञों की राय: युवाओं को बनाया जाता है निशाना
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क अक्सर युवाओं और क्रिकेट प्रशंसकों को जल्दी पैसे कमाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के जरिए ऐसे प्लेटफॉर्म तेजी से फैलते हैं, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए निगरानी और कार्रवाई मुश्किल हो जाती है।









