कानपुर। कानपुर में रिटायर्ड शिक्षक की हत्या के मामले की जांच में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। आरोप है कि बहू ने अपने ससुर की हत्या से पहले इंटरनेट पर ऐसे सवाल सर्च किए थे, जिनका उद्देश्य हत्या को आत्महत्या जैसा दिखाना था। पुलिस जांच में सामने आए इन डिजिटल सुरागों के बाद मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने आरोपी बहू से जेल में पूछताछ के दौरान करीब 30 सवाल किए और घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को समझने की कोशिश की।
जांच एजेंसियां अब हत्या की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले आरोपी की गतिविधियां क्या थीं, उसने किन लोगों से संपर्क किया था और हत्या के बाद मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश क्यों की गई। डिजिटल साक्ष्य, घटनास्थल से मिले सबूत और आरोपितों के बयानों को आपस में मिलाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
मामले में पुलिस को सबसे महत्वपूर्ण सुराग कथित तौर पर आरोपी के मोबाइल फोन से मिला। जांच के दौरान इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की पड़ताल की गई तो हत्या से पहले की गई कुछ संदिग्ध ऑनलाइन सर्च सामने आईं। पुलिस को ऐसे सवालों के सर्च किए जाने की जानकारी मिली, जिनसे यह संकेत मिलता है कि घटना को आत्महत्या जैसा दिखाने की योजना पर पहले से विचार किया गया हो सकता है। हालांकि इन सर्च का वास्तविक उद्देश्य और उनकी परिस्थितियां जांच का विषय हैं।
पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि संबंधित सर्च किस समय की गई थीं और उस समय आरोपी कहां मौजूद थी। डिजिटल फोरेंसिक जांच में मोबाइल फोन की सर्च हिस्ट्री, कॉल डिटेल, मैसेज और अन्य गतिविधियों को देखा जा सकता है। इन जानकारियों को घटनाक्रम के साथ मिलाकर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या की योजना कब और कैसे बनी।
आरोपी बहू फिलहाल कानपुर जेल में है। जांच के सिलसिले में उससे कई सवाल पूछे गए। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान करीब 30 सवालों के जरिए पुलिस ने घटना से पहले, घटना के समय और घटना के बाद की गतिविधियों की जानकारी लेने का प्रयास किया। पुलिस यह जानना चाहती है कि आरोपी का ससुर के साथ संबंध कैसा था, घर में पहले से कोई विवाद चल रहा था या नहीं और हत्या के पीछे कोई व्यक्तिगत या संपत्ति संबंधी कारण था या नहीं।
जांच में पुलिस के सामने यह सवाल भी है कि अगर हत्या की गई थी तो उसे आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश किस वजह से की गई। ऐसी स्थिति में पुलिस को घटनास्थल के साक्ष्यों की बारीकी से जांच करनी पड़ती है। कमरे की स्थिति, शव की स्थिति, चोटों के निशान, आसपास मौजूद वस्तुएं और अन्य भौतिक साक्ष्यों को फोरेंसिक रिपोर्ट से मिलाया जा रहा है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वारदात में आरोपी के साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। यदि किसी दूसरे व्यक्ति ने घटना में मदद की थी तो उसकी भूमिका सामने लाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड के जरिए संदिग्ध संपर्कों की पड़ताल की जा सकती है।
मामले में पुलिस आरोपी के बयानों की भी दूसरे साक्ष्यों से तुलना कर रही है। जांच में किसी आरोपी का बयान तभी अधिक महत्वपूर्ण होता है जब वह घटनास्थल और तकनीकी साक्ष्यों से मेल खाता हो। इसलिए पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट और प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को एक साथ रखकर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है।
ससुर की मौत के बाद शुरुआती तौर पर घटना को किस रूप में प्रस्तुत किया गया था और बाद में जांच किस दिशा में आगे बढ़ी, यह भी पुलिस की पड़ताल का हिस्सा है। यदि घटनास्थल पर आत्महत्या का स्वरूप देने की कोशिश की गई थी तो पुलिस यह जानना चाहेगी कि इसके लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए और उन्हें किसने अंजाम दिया।
इस मामले में डिजिटल साक्ष्य इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गए हैं क्योंकि किसी व्यक्ति की इंटरनेट गतिविधियां जांचकर्ताओं को घटना से पहले की मानसिक तैयारी या योजना के बारे में सुराग दे सकती हैं। हालांकि केवल किसी सर्च हिस्ट्री के आधार पर हत्या का उद्देश्य या अपराध में भूमिका तय नहीं की जा सकती। पुलिस को इसे अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखना होगा।
कानपुर पुलिस अब हत्या के पीछे के वास्तविक कारण का पता लगाने की कोशिश कर रही है। परिवार के भीतर के संबंध, आर्थिक या संपत्ति से जुड़े विवाद, पुराने मतभेद और अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि मृतक और आरोपी के बीच घटना से पहले किसी बात को लेकर विवाद हुआ था या नहीं।
जेल में हुई पूछताछ के दौरान पुलिस ने घटना से जुड़े कई सवालों के जवाब लेने की कोशिश की। पूछताछ का उद्देश्य सिर्फ आरोपी से बयान लेना नहीं, बल्कि उसके बयान की घटनास्थल और तकनीकी साक्ष्यों से पुष्टि करना भी है। अगर आरोपी के बयान और डिजिटल रिकॉर्ड में विरोधाभास मिलता है तो पुलिस उस बिंदु पर अलग से जांच कर सकती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस के सामने कई कड़ियों को जोड़ने की चुनौती है। आरोपी के मोबाइल से मिले डिजिटल सुराग, जेल में पूछताछ, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और फोरेंसिक रिपोर्ट को मिलाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हत्या की पूरी साजिश और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने आए।
घटना ने परिवार के भीतर होने वाले विवादों और अपराध की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की अहमियत को भी सामने ला दिया है। इंटरनेट सर्च, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड अब पुलिस जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।











