कानपुर गैस किल्लत: लाइन में खड़े लोग बेहोश, 3000 लोगों ने किया सड़क जाम

कानपुर में गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइन में खड़े लोग भीषण गर्मी में बेहोश हो गए। 3000 से ज्यादा लोग एजेंसी पहुंचे, गुस्से में सड़क जाम, पुलिस मौके पर पहुंची।

उत्तरप्रदेश के कानपूर में गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण हजारों लोग लाइन में बेहोश हो गए। भीड़ ने सड़क जाम कर दिया। 3000 से अधिक लोग सिलेंडर के लिए एजेंसी के बाहर परेशान नजर आए। पुलिस ने स्थिति संभाली।

कानपूर: यूपी के कानपुर में घरेलू गैस सिलेंडर की भारी किल्लत ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के मसवानपुर और भगवतदास इंडेन गैस एजेंसी के बाहर हजारों लोग सिलेंडर लेने के लिए सुबह 4 बजे से लंबी कतारों में खड़े रहे। तापमान करीब 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के बावजूद लोग घंटों धूप में खड़े रहने को मजबूर हुए।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई लोग भीषण गर्मी और भीड़ के कारण बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

3,000 से ज्यादा लोग लाइन में, हालात बेकाबू

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 3,000 से अधिक लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के बाहर पहुंचे थे। महीनों से सिलेंडर न मिलने की वजह से लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली।

कतार में खड़े लोगों ने बताया कि वे कई दिनों से लगातार गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस बार भी सिलेंडर न मिलने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

भीषण गर्मी में बेहोश हुए लोग, बच्चों और बुजुर्गों की हालत खराब

तेज धूप और उमस भरी गर्मी के कारण कई लोग कतार में खड़े-खड़े बेहोश होकर गिर गए। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। मौके पर मौजूद लोगों ने प्राथमिक मदद के तौर पर पास के गुरुद्वारे से पानी लाकर पिलाया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई बच्चों को प्लास्टिक और कपड़ों के सहारे धूप से बचाने की कोशिश की गई। कुछ बच्चों की हालत भूख और गर्मी के कारण बिगड़ गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

स्थानीय लोगों का आरोप: महीनों से नहीं मिल रहा सिलेंडर

पीड़ित उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से उन्हें नियमित रूप से गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है।

एक उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने 2 महीने पहले बुकिंग कराई थी, लेकिन अभी तक सिलेंडर नहीं मिला है। वहीं कई लोगों ने कहा कि वे 4-6 दिनों से रोजाना लाइन में खड़े हो रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगती है।

लोगों का कहना है कि अगर सिलेंडर नहीं देना था तो बुकिंग क्यों की गई।

महिलाओं और मजदूर वर्ग पर सबसे ज्यादा असर

इस गैस संकट का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ा है। कई किराएदार परिवारों ने बताया कि मकान मालिक उन्हें चूल्हा जलाने की अनुमति नहीं देते, ऐसे में गैस सिलेंडर ही उनका एकमात्र विकल्प है।

कई परिवारों ने बताया कि गैस न मिलने की वजह से बच्चों को भूखा रहना पड़ रहा है और घर का खाना पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन

गैस न मिलने और अव्यवस्था से नाराज लोगों ने गैस एजेंसी के बाहर सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और तुरंत गैस आपूर्ति बहाल करने की मांग की।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर जाम हटवाया। हालांकि, लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।

प्रशासन पर गंभीर सवाल, व्यवस्था पर उठी उंगली

इस पूरी घटना ने स्थानीय प्रशासन और गैस वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसी में पारदर्शिता की कमी है और वितरण प्रणाली पूरी तरह से अव्यवस्थित हो चुकी है।

कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि हर दिन सीमित संख्या में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं, जबकि बाकी लोगों को इंतजार कराया जा रहा है।

सिलेंडर वितरण में अनियमितता के आरोप

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि एक दिन में आने वाले सिलेंडरों का पूरा वितरण नहीं हो रहा है। कुछ लोगों ने दावा किया कि निर्धारित सिलेंडर संख्या के बाद भी गाड़ियां अचानक गायब हो जाती हैं, जिससे संदेह और बढ़ जाता है।

लोगों ने मांग की है कि वितरण प्रक्रिया की जांच की जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका

इस मामले को लेकर जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) राकेश कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों की राय: सप्लाई चेन और निगरानी में खामी

ऊर्जा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति सप्लाई चेन में गंभीर खामी और कमजोर निगरानी व्यवस्था की ओर इशारा करती है। यदि समय पर आपूर्ति और उचित वितरण सुनिश्चित नहीं किया गया तो ऐसे संकट बार-बार उत्पन्न हो सकते हैं।

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