कानपुर मंगल भवन कमेटी विवाद पर महापौर प्रमिला पांडेय नाराज, बोलीं- शासन से करूंगी शिकायत

कानपुर मंगल भवन की दोनों समितियां भंग होने पर महापौर प्रमिला पांडेय ने आपत्ति जताई। उन्होंने शासन में शिकायत की बात कही और जलभराव पर सवाल उठाए।

कानपुर में मंगल भवन की दोनों समितियां भंग किए जाने पर महापौर प्रमिला पांडेय ने आपत्ति जताई है। उन्होंने नगर निगम कार्यकारिणी और सदन की स्वीकृति के बिना कार्रवाई को गलत बताते हुए शासन में शिकायत की बात कही।

कानपुर: बृजेन्द्र स्वरूप पार्क, बेनाझाबर स्थित मंगल भवन की समितियां भंग किए जाने को लेकर महापौर प्रमिला पांडेय ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि नगर निगम कार्यकारिणी और सदन की स्वीकृति के बिना कमेटी भंग करना गलत है। महापौर ने इस मामले में शासन से शिकायत करने की बात कही। वहीं, अधिकारियों पर जलभराव और शहर के तालाबों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए।

मंगल भवन की समितियां भंग करने पर महापौर ने जताई आपत्ति

महापौर प्रमिला पांडेय ने नगर निगम कार्यकारिणी कक्ष, मोतीझील में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंगल भवन की समितियों को भंग किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नगर निगम कार्यकारिणी और सदन की स्वीकृति के बिना कमेटी भंग की गई है, जो उनके अनुसार उचित प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने इस मामले को शासन के सामने उठाने की बात कही।

मंगल भवन से जुड़ी दोनों समितियों को 21 सितंबर को नगर आयुक्त के आदेश के बाद भंग किया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मंडलायुक्त के निर्देश पर हुई जांच में समितियों के कामकाज में कुछ खामियां सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। अब मंगल भवन के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम के संपत्ति विभाग को दी गई है।

जलभराव को लेकर अधिकारियों पर उठाए सवाल

महापौर ने शहर में जलभराव की स्थिति को लेकर अधिकारियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जलभराव के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, अगर अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्रों का निरीक्षण करते तो शहर में ऐसी स्थिति नहीं बनती।

उन्होंने कहा कि जलभराव की समस्या का एक बड़ा कारण शहर के तालाबों का खत्म होना या उन पर कब्जा होना है। महापौर ने दावा किया कि शहर में करीब 312 से अधिक तालाबों का पता नहीं है और कल्याणपुर के एक तालाब का मामला वह मुख्यमंत्री के सामने भी रख चुकी हैं।

तालाबों को चिह्नित कराने की मांग

प्रमिला पांडेय ने मंडलायुक्त और केडीए उपाध्यक्ष से टीम बनाकर तालाबों को चिह्नित कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि तालाबों को संरक्षित किया जाए तो बारिश के पानी को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है और जल निकासी व्यवस्था पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है।

कानपुर में तालाबों पर कब्जे और उनके संरक्षण का मुद्दा पहले भी सामने आता रहा है। वर्ष 2019 के एक सर्वे में 312 तालाबों में से 134 पर कब्जे की बात सामने आई थी।

गड्ढों और बागी पार्षदों को लेकर भी बोलीं महापौर

सड़कों के गड्ढों को लेकर महापौर ने कहा कि यदि नगर आयुक्त यह बताते कि इन्हें भरने के लिए कितनी धनराशि की जरूरत है, तो वह 15वें वित्त आयोग से राशि स्वीकृत करातीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी खुद गड्ढे भरने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

बागी पार्षदों को लेकर महापौर ने कहा कि वे उनके पास आते तो उनकी बात सुनी जाती। उन्होंने यह भी कहा कि उनके क्षेत्रों में काम हुए हैं और उन्होंने किसी अधिकारी को काम रोकने के लिए नहीं कहा है।

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