उत्तरप्रदेश के कानपुर में डिलीवरी बॉय के बैंक खाते से 9 महीने में 130 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ। पुलिस ने खाते को किराए पर लेकर फर्जी कंपनियों के जरिए लेनदेन करने वाले B.Com छात्र समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
कानपुर; उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में साइबर फ्रॉड और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक डिलीवरी बॉय के बैंक खाते से महज नौ महीने में 130 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन होने का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने B.Com फाइनल ईयर के एक छात्र और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों आरोपियों ने 19 फर्जी कंपनियों के जरिए रकम मंगवाई और कई खातों में ट्रांसफर की।
मामले ने न सिर्फ बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे साइबर अपराधी आम लोगों के खातों का इस्तेमाल बड़े वित्तीय नेटवर्क के लिए कर रहे हैं। पुलिस अब आरोपियों के पूरे नेटवर्क, अन्य बैंक खातों और संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच कर रही है।
डिलीवरी बॉय को कमीशन देकर लिया गया खाता
कानपुर के बेकनगंज इलाके के पेचबाग निवासी मोहम्मद ओवैस एक निजी कंपनी में डिलीवरी बॉय का काम करते हैं। कुछ साल पहले वह गल्ले के कारोबार से जुड़े थे और उसी दौरान उन्होंने बैंक में एक करंट अकाउंट खुलवाया था। व्यापार में नुकसान होने के बाद उन्होंने डिलीवरी का काम शुरू कर दिया, लेकिन पुराना बैंक खाता चालू रहा।
इसी दौरान उनकी मुलाकात मोहम्मद अमान और मोहम्मद वसीउद्दीन उर्फ सरताज से हुई। दोनों ने ओवैस को भरोसे में लेते हुए कहा कि उनके विदेश में रहने वाले भाई को भारत में पैसे भेजने हैं, जिसके लिए बैंक खाते की जरूरत है।
आरोपियों ने ओवैस को हर महीने 20 हजार रुपए कमीशन देने का लालच दिया। इसके बाद अगस्त 2025 में ओवैस ने अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी। अमान और वसीउद्दीन ने खाते की चेकबुक, एटीएम कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज भी अपने कब्जे में ले लिए।
शुरुआत में ओवैस को लगा कि यह सामान्य लेनदेन है, लेकिन कुछ महीनों बाद खाते में असामान्य गतिविधियों ने उसे शक में डाल दिया।

35 करोड़ से बढ़कर 130 करोड़ तक पहुंचा ट्रांजेक्शन
ओवैस के मुताबिक, पहले उसे जानकारी मिली थी कि उसके खाते से करीब 35 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है। हालांकि बाद में साइबर सेल की जांच में यह आंकड़ा बढ़कर 130 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
शक तब गहराया, जब एक महीने पहले ओवैस ने अमान से 9 हजार रुपए मांगे। इसके जवाब में अमान ने उसे 18 हजार रुपए दे दिए। इस असामान्य व्यवहार ने ओवैस को सतर्क कर दिया।
इसके बाद उसने आरोपियों से अपने खाते से जुड़े दस्तावेज वापस मांगे, लेकिन दोनों टालमटोल करने लगे। ओवैस खुद बैंक पहुंचा और ट्रांजेक्शन की जानकारी लेने की कोशिश की। शुरुआत में पासबुक नहीं होने की वजह से बैंक ने जानकारी देने से मना कर दिया।
काफी प्रयास के बाद बैंक से उसे पता चला कि छह महीने में ही उसके खाते से 35 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। इसके बाद उसने करीब 20 दिन पहले साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।
साइबर टीम ने जब बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और संदिग्ध लेनदेन की गहराई से जांच की, तो सामने आया कि पिछले नौ महीने में कुल 130 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया है।
19 फर्जी कंपनियों का नेटवर्क और दो गिरफ्तार
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कानपुर के अलावा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में मौजूद 19 संदिग्ध कंपनियों के खातों से रकम मंगवाई। पुलिस को शक है कि ये कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं और इन्हें फर्जी वित्तीय लेनदेन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
कानपुर पुलिस ने जांच के बाद मोहम्मद अमान और मोहम्मद वसीउद्दीन उर्फ सरताज को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी बेकनगंज इलाके के रहने वाले हैं।
पुलिस के मुताबिक, अमान B.Com फाइनल ईयर का छात्र है, जबकि वसीउद्दीन बीए पास है। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि दोनों ने सुनियोजित तरीके से बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और डिजिटल ट्रांसफर चैनलों का इस्तेमाल कर यह नेटवर्क खड़ा किया।
म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर अपराध का नया पैटर्न
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला ‘म्यूल अकाउंट’ के इस्तेमाल का बड़ा उदाहरण है। म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल अपराधी अपनी असली पहचान छिपाकर अवैध पैसे के लेनदेन के लिए करते हैं।
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आरोपियों के पास ऐसे कितने और बैंक खाते हैं और इस नेटवर्क से और कौन लोग जुड़े हैं।
लोगों के लिए सबक और सावधानी
यह मामला आम लोगों के लिए बड़ी चेतावनी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी हालत में:
- अपना बैंक खाता किसी और को इस्तेमाल के लिए न दें
- एटीएम, चेकबुक और पासवर्ड साझा न करें
- कमीशन या किराए के लालच में न आएं










