ईरान की अदालत ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को साढ़े सात साल की अतिरिक्त जेल सजा सुनाई है। इसके साथ उनकी कुल सजा 44 साल हो गई। इस फैसले से ईरान में मानवाधिकार स्थिति पर सवाल उठे हैं।
World News: नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) विजेता नरगिस मोहम्मदी को ईरान की अदालत ने एक बार फिर सख्त सजा सुनाई है। इस बार उन्हें साढ़े सात साल की अतिरिक्त जेल की सजा दी गई है। इस फैसले के बाद उनकी कुल सजा 44 साल तक पहुंच गई है। ईरान के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार (Human Rights) को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नरगिस मोहम्मदी पहले से ही राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सजा काट रही थीं और अब यह नया फैसला उनके संघर्ष को और लंबा कर देता है।
कौन हैं नरगिस मोहम्मदी
53 वर्षीय नरगिस मोहम्मदी ईरान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखिका और इंजीनियर हैं। वह लंबे समय से ईरान में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार, राजनीतिक दमन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। नरगिस को एक साहसी एक्टिविस्ट के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने लगातार सरकारी दबाव के बावजूद अपने विचारों से समझौता नहीं किया।
मानवाधिकार आंदोलन में भूमिका
नरगिस मोहम्मदी मानवाधिकार रक्षक केंद्र (DHRC) की उपाध्यक्ष हैं। इस संगठन की स्थापना नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने की थी। डीएचआरसी का उद्देश्य ईरान में मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करना और पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोशिश करना है। इसी भूमिका के कारण नरगिस लगातार ईरानी प्रशासन के निशाने पर रही हैं।
जेल और संघर्ष का लंबा इतिहास
पिछले एक दशक में नरगिस मोहम्मदी ने अपना अधिकांश समय जेल में बिताया है। उन्हें अब तक 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है और पांच बार दोषी ठहराया गया है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में विरोध प्रदर्शन आयोजित करना, सरकार विरोधी प्रचार करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाना शामिल रहा है। नरगिस और उनके समर्थक इन आरोपों को खारिज करते हैं और कहते हैं कि यह सब शांतिपूर्ण एक्टिविज्म को दबाने की कोशिश है।

कुल सजा 44 साल तक पहुंची
नरगिस फाउंडेशन के अनुसार, नई सजा के बाद उनके खिलाफ कुल जेल अवधि 44 साल हो गई है। वह पहले से ही 2021 से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में 13 साल की सजा काट रही थीं। इसके साथ-साथ उन्हें कई बार एकांतवास और अन्य कठोर दंडों का भी सामना करना पड़ा है। यह आंकड़ा अपने आप में ईरान में असहमति के प्रति सरकार के रवैये को दिखाता है।
नोबेल शांति पुरस्कार की मान्यता
2023 में नरगिस मोहम्मदी को महिलाओं के अधिकारों और मानवाधिकारों के लिए किए गए संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उस समय वह तेहरान की जेल में बंद थीं। इसलिए यह पुरस्कार उनके बच्चों ने उनकी ओर से ग्रहण किया था। यह क्षण पूरी दुनिया के लिए एक मजबूत संदेश था कि जेल की सलाखों के पीछे भी आवाजें दबाई नहीं जा सकतीं।
नई सजा का कारण
नरगिस मोहम्मदी को 12 दिसंबर 2025 को मशहद में गिरफ्तार किया गया था। वह मानवाधिकार वकील खोसरो अलीकोर्डी के लिए आयोजित एक शोक सभा में शामिल हुई थीं। ईरानी अधिकारियों ने उन पर भड़काऊ बयान देने, नियमों का उल्लंघन करने वाले नारे लगाने और शांति भंग करने के आरोप लगाए। अदालत ने इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें साढ़े सात साल की अतिरिक्त सजा सुनाई।
सरकार बनाम एक्टिविज्म
ईरानी सरकार का कहना है कि नरगिस मोहम्मदी कानून व्यवस्था के खिलाफ काम करती हैं और लोगों को उकसाती हैं। वहीं नरगिस और उनके समर्थकों का साफ कहना है कि यह कार्रवाई केवल उनकी आवाज को दबाने के लिए की जा रही है। उनका तर्क है कि अगर सवाल उठाना और शांतिपूर्ण विरोध अपराध है, तो यह ईरान में लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थिति को दर्शाता है।











