Khatron Ke Khiladi 15: फरहाना भट्ट ने बताया सबसे डरावना अनुभव, बोलीं- एक पल लगा भारत लौट जाऊं

Khatron Ke Khiladi 15: फरहाना भट्ट ने शो के दौरान अपने सबसे डरावने अनुभव का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एक स्टंट के दौरान ऐसा पल आया, जब उन्हें लगा कि स

रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की शूटिंग के लिए केप टाउन पहुंचीं फरहाना भट्ट के लिए यह सफर सिर्फ खतरनाक स्टंट्स और चुनौतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खुद के डर से लड़ने का भी अनुभव बना।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: टेलीविजन का लोकप्रिय रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ इन दिनों अपने खतरनाक स्टंट और प्रतियोगियों की चुनौतियों को लेकर चर्चा में है। शो में अभिनेत्री फरहाना भट्ट भी बतौर कंटेस्टेंट नजर आ रही हैं। दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में शो की शूटिंग के दौरान फरहाना ने कई ऐसे स्टंट किए, जो उनके लिए शारीरिक चुनौती के साथ-साथ मानसिक परीक्षा भी साबित हुए।

शो से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए फरहाना ने बताया कि शूटिंग के दौरान एक ऐसा भी वक्त आया था, जब वह बेहद घबरा गई थीं और उनके मन में भारत वापस लौटने का विचार तक आने लगा था। उनके मुताबिक, उस समय उन्हें लगा था कि शायद वह आगे स्टंट नहीं कर पाएंगी।

पहला स्टंट ही था बड़ी चुनौती

फरहाना के लिए ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की शुरुआत आसान नहीं रही। उन्होंने बताया कि शो का पहला स्टंट ही उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन था। वह अपने सामान्य कंफर्ट जोन से पूरी तरह बाहर चली गई थीं और उन्हें खुद भी भरोसा नहीं था कि वह चुनौती पूरी कर पाएंगी या नहीं। हालांकि, उन्होंने हिम्मत जुटाई और स्टंट को सफलतापूर्वक पूरा किया। फरहाना के मुताबिक, उनका प्रदर्शन देखकर शो के होस्ट रोहित शेट्टी भी हैरान रह गए थे। उनके लिए यह पहला स्टंट एक तरह से खुद की क्षमताओं को परखने का अनुभव था।

फरहाना का कहना है कि उस चुनौती ने उन्हें यह एहसास कराया कि कई बार इंसान अपनी क्षमता का अंदाजा तब तक नहीं लगा पाता, जब तक वह किसी मुश्किल परिस्थिति का सामना नहीं करता।

एक स्टंट के दौरान टूट गया था हौसला

फरहाना ने अपने सफर के सबसे मुश्किल पलों में से एक को याद करते हुए बताया कि एक स्टंट के दौरान उन्हें बेहद डर लगा था। उस समय स्थिति इतनी कठिन हो गई थी कि उनके दिमाग में केवल घर वापस जाने का ख्याल चल रहा था। उन्होंने बताया कि कुछ समय के लिए वह पूरी तरह घबरा गई थीं। उन्हें लगा कि अब वह इस चुनौती को आगे नहीं संभाल पाएंगी और भारत लौट जाना ही बेहतर होगा।

हालांकि, उन्होंने उस डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया। मुश्किल परिस्थिति के बावजूद उन्होंने शो में बने रहने और आगे बढ़ने की कोशिश जारी रखी। यही अनुभव उनके लिए इस रियलिटी शो की सबसे बड़ी व्यक्तिगत सीखों में से एक बन गया।

शो ने डर खत्म नहीं किया

आमतौर पर ‘खतरों के खिलाड़ी’ के कई प्रतियोगी शो के बाद अपने डर पर काबू पाने की बात करते हैं। लेकिन फरहाना का अनुभव इससे थोड़ा अलग है।उन्होंने साफ कहा कि शो में हिस्सा लेने के बावजूद उनके सभी डर खत्म नहीं हुए हैं। यानी खतरनाक स्टंट करने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद भी वह यह नहीं मानतीं कि उनके अंदर से हर तरह का डर निकल गया है। इसके बजाय, उनके मुताबिक इस अनुभव ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों को अलग नजरिए से देखना सिखाया है।

जिंदगी को लेकर बदला नजरिया

फरहाना के अनुसार, शो ने उनके व्यक्तित्व और जिंदगी को देखने के तरीके में बड़ा बदलाव जरूर किया है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति बेहद कठिन और डरावनी परिस्थितियों से गुजरता है, तो रोजमर्रा की छोटी परेशानियां पहले जैसी बड़ी नहीं लगतीं। अब कई छोटी-छोटी समस्याओं या अप्रत्याशित परिस्थितियों को देखकर उन्हें घबराहट के बजाय हंसी आती है। उनका मानना है कि जब वह पहले ही बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर चुकी हैं, तो जिंदगी की सामान्य मुश्किलों से परेशान होने की वजह कम रह जाती है।

रुबिना और करण ने दिया सबसे ज्यादा साथ

शो के दौरान प्रतियोगियों के बीच दोस्ती और सपोर्ट भी देखने को मिलता है। फरहाना ने बताया कि उन्हें कई कंटेस्टेंट्स से सहयोग मिला, लेकिन अगर दो नाम चुनने हों तो वह रुबिना और करण का नाम लेंगी। उनके मुताबिक, दोनों ने पूरे सफर में उनका साथ दिया और कठिन परिस्थितियों में उनका हौसला बढ़ाया। रियलिटी शो के चुनौतीपूर्ण माहौल में ऐसा समर्थन प्रतियोगियों के लिए मानसिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

खुद को बताया ‘ड्रामा क्वीन’

फरहाना की बातचीत का एक मजेदार हिस्सा तब सामने आया, जब उनसे साथी प्रतियोगियों को अलग-अलग टैग देने के लिए कहा गया। ‘ड्रामा क्वीन’ का खिताब उन्होंने बिना किसी झिझक के खुद को ही दे दिया। वहीं, ‘ओवरकॉन्फिडेंट’ के टैग के लिए उन्होंने किसी प्रतियोगी का नाम लेने से इनकार किया।
‘अंडररेटेड’ की कैटेगरी में उन्होंने अपना नाम और ओरी का नाम चुना। खुद को उन्होंने ‘डेंजरस कॉम्पिटिटर’ भी माना, जबकि सबसे बड़े एंटरटेनर का टैग उन्होंने हर्ष गुजराल को दिया।

फरहाना ने अपने अनुभव के आधार पर ‘बिग बॉस’ और ‘खतरों के खिलाड़ी’ के बीच भी तुलना की। उनका मानना है कि ‘खतरों के खिलाड़ी’ ज्यादा कठिन है, क्योंकि इसमें प्रतियोगी को सिर्फ शारीरिक ताकत ही नहीं बल्कि मानसिक मजबूती की भी जरूरत पड़ती है। उनके मुताबिक, प्रत्येक स्टंट के दौरान दिमाग और शरीर दोनों को पूरी क्षमता से काम करना पड़ता है। अगर प्रतियोगी मानसिक रूप से तैयार नहीं है, तो उसके लिए स्टंट पूरा करना काफी मुश्किल हो सकता है।

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