Penny Stocks: ₹10 से कम कीमत वाले शेयरों में बार-बार क्यों लगता है Upper Circuit? जानें बड़े जोखिम

Penny Stocks: ₹10 से कम कीमत वाले शेयरों में बार-बार Upper Circuit लगने की वजह कम लिक्विडिटी और अचानक बढ़ी खरीदारी हो सकती है। जानें इन शेयरों में निवेश के

शेयर बाजार में 5 रुपये, 8 रुपये या 10 रुपये से कम कीमत वाले शेयर अक्सर छोटे निवेशकों को आकर्षित करते हैं। इसकी वजह यह है कि कम भाव देखकर निवेशकों को लगता है कि सीमित रकम में बड़ी संख्या में शेयर खरीदे जा सकते हैं और अगर शेयर की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो रिटर्न भी कई गुना हो सकता है।

बिजनेस न्यूज़: शेयर बाजार में 5 रुपये, 8 रुपये या 10 रुपये से कम कीमत वाले शेयर अक्सर छोटे निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। कम भाव देखकर कई लोगों को लगता है कि कम पूंजी में बड़ी संख्या में शेयर खरीदे जा सकते हैं और अगर स्टॉक में तेजी आती है तो कुछ ही समय में पैसा कई गुना हो सकता है। यही वजह है कि Penny Stocks में अचानक तेजी और लगातार अपर सर्किट देखकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ जाती है।

लेकिन कम कीमत वाला शेयर हमेशा सस्ता नहीं होता। इसी तरह किसी स्टॉक में लगातार Upper Circuit लगना भी इस बात का प्रमाण नहीं है कि कंपनी का कारोबार मजबूत है या उसकी वित्तीय स्थिति बेहतर है। पेनी स्टॉक्स में कीमत और वास्तविक कंपनी वैल्यू के बीच बड़ा अंतर हो सकता है। ऐसे शेयरों में निवेश करने से पहले जोखिम को समझना बेहद जरूरी है।

Penny Stocks में क्यों आता है इतना तेज उतार-चढ़ाव?

पेनी स्टॉक्स में अक्सर कारोबार की मात्रा यानी ट्रेडिंग वॉल्यूम बड़े शेयरों की तुलना में कम होती है। बाजार में खरीदार और विक्रेता कम होने की वजह से थोड़ी सी खरीदारी या बिकवाली भी कीमत पर बड़ा असर डाल सकती है। मान लीजिए किसी शेयर की कीमत 8 रुपये है और उसमें अचानक खरीदारी बढ़ जाती है। कम उपलब्ध शेयरों और सीमित बिक्री के कारण भाव तेजी से ऊपर जा सकता है। 

प्रतिशत के हिसाब से यह बदलाव बहुत बड़ा दिखाई देता है। दूसरी ओर, जब बिकवाली बढ़ती है और खरीदार कम हो जाते हैं, तो इसी तरह कीमत तेजी से नीचे भी आ सकती है।

लगातार Upper Circuit क्यों लगता है?

शेयर बाजार में हर स्टॉक के लिए एक तय दैनिक प्राइस बैंड होता है। जब किसी शेयर में खरीदारी इतनी बढ़ जाती है कि कीमत उस निर्धारित ऊपरी सीमा तक पहुंच जाती है, तो Upper Circuit लग जाता है। इसके बाद उसी दिन उससे ऊपर के स्तर पर सामान्य ट्रेडिंग नहीं हो पाती। पेनी स्टॉक्स में कम फ्री-फ्लोट, सीमित बिक्री और अचानक बढ़ी मांग के कारण यह स्थिति बार-बार बन सकती है। 

ऐसे में निवेशकों के बीच FOMO यानी Fear of Missing Out बढ़ जाता है। लोग यह सोचकर शेयर खरीदने लगते हैं कि अगर अभी निवेश नहीं किया तो अगली तेजी का मौका हाथ से निकल जाएगा। हालांकि, केवल अपर सर्किट देखकर कंपनी की गुणवत्ता का फैसला करना सही नहीं है। शेयर की तेजी के पीछे वास्तविक कारोबारी कारण हैं या सिर्फ मांग और सीमित उपलब्धता, यह समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

सबसे बड़ा खतरा Lower Circuit में फंसने का

पेनी स्टॉक्स में जोखिम तब और बढ़ जाता है, जब शेयर में लगातार Lower Circuit लगने लगे। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में निवेशक शेयर बेचना चाहते हैं, लेकिन खरीदार पर्याप्त संख्या में मौजूद नहीं होते। नतीजा यह होता है कि निवेशक के पास शेयर तो रहते हैं, लेकिन उन्हें बेचने का वास्तविक मौका नहीं मिलता। कई बार लगातार कई कारोबारी सत्रों तक स्टॉक लोअर सर्किट में फंसा रह सकता है। 

स्क्रीन पर कीमत दिखाई देती है, लेकिन उस भाव पर सौदा होना मुश्किल हो सकता है। यही कम Liquidity का सबसे बड़ा जोखिम है। जरूरत पड़ने पर निवेशक अपनी रकम को तुरंत नकदी में नहीं बदल पाता।

अफवाहों से भी प्रभावित हो सकते हैं ऐसे शेयर

कम कीमत वाले शेयरों में सोशल मीडिया पोस्ट, ऑनलाइन फोरम, मैसेजिंग ग्रुप और अपुष्ट खबरों का असर भी तेजी से पड़ सकता है। किसी कंपनी के बड़े ऑर्डर, नई साझेदारी, अधिग्रहण या विस्तार की खबर सामने आने पर निवेशक अचानक खरीदारी शुरू कर सकते हैं। लेकिन बाजार में चल रही हर खबर कंपनी के वास्तविक प्रदर्शन को नहीं दर्शाती। कई बार किसी अफवाह के आधार पर शुरू हुई तेजी बाद में तेज गिरावट में भी बदल सकती है। इसलिए किसी भी स्टॉक में सिर्फ सोशल मीडिया टिप्स या दूसरों के दावों के आधार पर निवेश करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

₹5 का शेयर ₹500 वाले शेयर से सस्ता नहीं

शेयर की कीमत देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि स्टॉक सस्ता है या महंगा। किसी कंपनी का मूल्यांकन समझने के लिए Market Capitalisation, Earnings, Debt, Cash Flow, Promoter Holding और Valuation जैसे कई संकेतकों का अध्ययन करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, 5 रुपये का शेयर जरूरी नहीं कि 500 रुपये के शेयर से सस्ता हो। कंपनी के कुल शेयरों की संख्या और उसके कारोबार का आकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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