योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों के लिए कोलकाता की रेड रोड सात दिनों से बंद है। इस पर दायर याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को वैकल्पिक यातायात व्यवस्था करने और कार्यक्रम के बाद सड़क तुरंत खोलने का निर्देश दिया।
कोलकाता: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम से पहले कोलकाता का ऐतिहासिक रेड रोड प्रशासनिक और कानूनी बहस का केंद्र बन गया है। 21 जून को आयोजित होने वाले योग दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है, जिसके चलते कार्यक्रम स्थल की तैयारियों के लिए 14 जून से रेड रोड को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।
हालांकि सुरक्षा और आयोजन संबंधी तैयारियों को देखते हुए लिया गया यह फैसला अब अदालत तक पहुंच गया है। सड़क बंद होने से शहर में आवाजाही प्रभावित होने की शिकायतों के बाद मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में पहुंचा, जहां अदालत ने राज्य सरकार को नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने को कहा
ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि रेड रोड को लंबे समय तक बंद रखने से वकीलों, सरकारी कर्मचारियों, व्यवसायियों और आम नागरिकों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि शहर के महत्वपूर्ण यातायात मार्गों में शामिल रेड रोड को पूरी तरह बंद करने के बजाय आंशिक रूप से खुला रखा जा सकता था।
मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सड़क बंद रहने की अवधि में लोगों के लिए पर्याप्त वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि योग दिवस कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद सड़क को फिर से खोल दिया जाना चाहिए ताकि सामान्य यातायात बहाल हो सके।
कोर्ट ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।
सरकार का पक्ष: लोगों को परेशानी नहीं होगी
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत को बताया कि योग दिवस कार्यक्रम भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है और इसके लिए व्यापक सुरक्षा तथा व्यवस्थागत तैयारियां आवश्यक हैं।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि रेड रोड के आसपास कई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं और ट्रैफिक प्रबंधन की विशेष योजना तैयार की गई है। प्रशासन का दावा है कि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। सरकार ने यह भी कहा कि कार्यक्रम राष्ट्रीय महत्व का है और बड़ी संख्या में प्रतिभागियों तथा सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी को देखते हुए विशेष व्यवस्था जरूरी है।
राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज
रेड रोड बंद किए जाने के फैसले ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी बड़े आयोजन के लिए शहर के प्रमुख मार्ग को कई दिनों तक बंद रखना नागरिक सुविधाओं के लिहाज से उचित नहीं माना जा सकता।
विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने भी यातायात बाधित होने की चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बड़े सरकारी आयोजनों और आम नागरिकों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि आयोजन की व्यापकता और सुरक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए यह कदम अपरिहार्य था।
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सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी पर भी उठा सवाल
योग दिवस कार्यक्रम को लेकर एक अन्य विवाद सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी को लेकर सामने आया है। कुछ कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यक्रम में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है।
इस मुद्दे पर भी अदालत में चर्चा हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि कार्यक्रम में भाग लेना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों से केवल स्वैच्छिक रूप से कार्यक्रम में शामिल होने का अनुरोध किया गया है। सरकार के अनुसार, योग दिवस एक स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम है और इसमें भागीदारी पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय पर आधारित है।
रेड रोड पर 35 हजार लोगों के जुटने की उम्मीद
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में लगभग 35 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा एजेंसियां, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न सरकारी विभाग पिछले कई दिनों से आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
कार्यक्रम में योग प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामूहिक योग सत्र आयोजित किए जाएंगे। आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व दिया जा रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त वैश्विक स्वास्थ्य पहल के रूप में देखा जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है।
हुगली नदी में 500 नावों पर योग प्रदर्शन की तैयारी
इस वर्ष के आयोजन की सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक हुगली नदी पर प्रस्तावित योग प्रदर्शन है। अधिकारियों के अनुसार, 500 से अधिक नावों पर सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।
सुंदरबन बोट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने पुष्टि की है कि उन्हें राज्य परिवहन विभाग की ओर से कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। आयोजन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नदी पर नावों की मदद से विशेष योग आकृतियां और समन्वित प्रदर्शन भी किए जा सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य योग दिवस को अधिक आकर्षक और वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनाना है।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश
आयोजकों के अनुसार, हुगली नदी में बड़ी संख्या में नावों पर एक साथ योग प्रदर्शन कर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की भी कोशिश की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन तैयारियों का स्तर संकेत देता है कि आयोजन को ऐतिहासिक बनाने की योजना पर काम चल रहा है।
यदि यह प्रयास सफल होता है, तो कोलकाता का नाम दुनिया के सबसे बड़े जल-आधारित योग आयोजनों में दर्ज हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और शहरी प्रबंधन की चुनौती
कोलकाता में रेड रोड बंद होने को लेकर उठी बहस केवल एक स्थानीय प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह इस सवाल को भी सामने लाती है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
एक ओर सरकारें वैश्विक महत्व के आयोजनों को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां करती हैं, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना आवश्यक होता है। हाईकोर्ट के निर्देश इसी संतुलन को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
फिलहाल सभी की नजरें 21 जून को होने वाले योग दिवस कार्यक्रम पर टिकी हैं, जहां हजारों प्रतिभागियों के साथ कोलकाता दुनिया के सबसे बड़े योग आयोजनों में से एक की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है।









