उन्नाव रेप केस से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट आज पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। यह मामला पीड़िता के पिता की मौत से जुड़ा है, जिसमें सेंगर को 10 साल की सजा मिल चुकी है।
Unnao Rape Case: उन्नाव रेप केस से जुड़े एक अहम मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। यह सुनवाई पीड़िता के पिता की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत अर्जी पर होगी। इस मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह केस पहले से ही न्याय व्यवस्था, राजनीति और कानून व्यवस्था को लेकर बड़ी बहस का विषय रहा है।
पीड़िता के पिता की मौत से जुड़ा यह मामला लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि सेंगर को इस मामले में राहत मिलती है या नहीं।
13 मार्च 2020 का फैसला
इस मामले में 13 मार्च 2020 को सुनवाई अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार दिया था। अदालत ने उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। अधीनस्थ अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा था कि पीड़िता के पिता परिवार के इकलौते कमाने वाले थे और उनकी मौत को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस तरह के अपराध में नरमी बरतने का कोई आधार नहीं बनता। इसी वजह से अधिकतम सजा दी गई थी। यह फैसला उस समय काफी चर्चा में रहा था और इसे पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ी न्यायिक जीत माना गया था।
गैर इरादतन हत्या का मामला
अधीनस्थ अदालत ने इस केस में कुलदीप सिंह सेंगर को हत्या का दोषी नहीं ठहराया था। हालांकि अदालत ने यह माना कि यह मामला गैर इरादतन हत्या के दायरे में आता है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें गैर इरादतन हत्या के अपराध में अधिकतम सजा सुनाई थी।

फैसले में कहा गया था कि भले ही यह मामला सीधे हत्या की श्रेणी में न आए, लेकिन परिस्थितियां इतनी गंभीर हैं कि आरोपी को कड़ी सजा देना जरूरी है। अदालत ने पीड़ित परिवार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया था।
दुष्कर्म केस में आजीवन कारावास
कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही दुष्कर्म के मुख्य मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं। दिसंबर 2019 में इस मामले में फैसला सुनाया गया था। अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा दी थी। यह मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा था और इसे न्यायिक इतिहास के महत्वपूर्ण मामलों में गिना गया।
दुष्कर्म के इस मुख्य केस के खिलाफ सेंगर की अपील हाई कोर्ट में लंबित है। इसके साथ ही पीड़िता के पिता की मौत से जुड़ा मामला भी हाई कोर्ट में विचाराधीन है। दोनों ही मामलों में सेंगर की कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
हाई कोर्ट में सजा निलंबन
दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील लंबित रहने के दौरान हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को बड़ा फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट ने सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया था। इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया था।
सजा निलंबन का मतलब था कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक सेंगर को राहत मिल सकती है। हालांकि यह राहत ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त रोक
हाई कोर्ट के सजा निलंबन के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को हस्तक्षेप किया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सेंगर को मिली राहत खत्म हो गई और वह दोबारा जेल में ही बने रहे।










