महाराष्ट्र में NCP ने 'लाडकी बहिन योजना' का नाम बदलकर दिवंगत उप मुख्यमंत्री अजित पवार के नाम पर रखने की मांग की। योजना महिलाओं को मासिक 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र में राज्य की प्रमुख महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजना 'लाडकी बहिन योजना' का नाम बदलने की मांग अब राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) के अजित पवार गुट से उठी है। एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी ने 3 फरवरी को देवेंद्र फडणवीस सरकार से आग्रह किया कि इस योजना का नाम दिवंगत उप मुख्यमंत्री अजित पवार के नाम पर रखा जाए।
मिटकरी ने कहा कि अजित पवार राज्य की महिलाओं और बहनों के लिए एक भाई की तरह थे। उन्होंने बताया कि जब पवार अपने राज्य भ्रमण पर जाते थे, तो उनकी कलाई राखियों से भरी होती थी। इस वजह से, योजना का नाम बदलकर 'अजितदादांची लाडकी बहिण योजना' रखा जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सियासी परिप्रेक्ष्य
अमोल मिटकरी की यह मांग राज्य में एनसीपी की मौजूदगी और प्रभाव को बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है। बीते शुक्रवार को ही अजित पवार की पत्नी ने डिप्टी सीएम की शपथ ली थी। अब पार्टी की ओर से इस योजना के नाम में बदलाव की मांग ने यह संकेत दिया कि एनसीपी अपनी सियासी मजबूती दिखाना चाहती है।
राज्य की सियासत में यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 'लाडकी बहिन योजना' महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली प्रमुख योजना के रूप में जानी जाती है। इस योजना का नाम बदलने की मांग ने राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को फिर से सक्रिय कर दिया है।
अजित पवार का योगदान और यादें
अमोल मिटकरी ने मीडिया से कहा कि अजित पवार को राज्य की महिलाएं बहुत पसंद करती थीं। उन्होंने बताया कि पवार जब भी राज्य के किसी हिस्से में भ्रमण करते थे, तो महिलाओं द्वारा उन्हें राखियां बांधकर सम्मान दिया जाता था। इसके चलते योजना का नाम बदलकर उनके नाम पर रखने की मांग उन्हें श्रद्धांजलि देने का सही तरीका माना जा रहा है।
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अजित पवार 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गए थे। इस हादसे में उनके साथ चार अन्य लोग भी मारे गए थे। पवार की इस योजना ने महिलाओं के बीच उन्हें एक लोकप्रिय और सम्मानित नेता के रूप में स्थापित किया था।
लाडकी बहिन योजना की विशेषताएँ
'लाडकी बहिन योजना' की शुरुआत पवार ने जुलाई 2024 में वित्त मंत्री रहते हुए की थी। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की योग्य महिलाओं को सीधे बैंक ट्रांसफर के माध्यम से मासिक 1,500 रुपये की सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
योजना के तहत लाभार्थियों को बैंक अकाउंट में राशि सीधे जमा की जाती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और सहायता सीधे सही हाथों तक पहुंचती है। इस योजना को महिलाओं के लिए एक सशक्तिकरण योजना के रूप में देखा जाता है।
योजना का चुनावी प्रभाव
इस योजना ने 2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार की जीत पर भी असर डाला। महिलाओं के बीच वित्तीय सहायता मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और यह राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस वजह से, अब योजना का नाम बदलने का प्रस्ताव राजनीतिक रूप से भी चर्चित हो गया है। यह कदम महिलाओं और एनसीपी समर्थकों के लिए भावनात्मक महत्व रखता है।
वित्तीय सहायता बढ़ाने की संभावना
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सरकार 'लाडकी बहिन योजना' के तहत महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता जारी रखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि योजना के तहत राशि को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये करने की योजना है। इसका उद्देश्य महिलाओं को और अधिक आर्थिक सहायता प्रदान करना और उनकी जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।









