पीएम मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि देश की ऊर्जा, खाद्य और नागरिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में प्रयासरत है।
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी जंग और भारत पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर स्पष्ट रुख पेश किया। पीएम मोदी ने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में हालात बेहद चिंताजनक हैं और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट अस्वीकार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है और किसी भी तरह के नागरिक या पावर प्लांट पर हमले को स्वीकार नहीं करता। पीएम मोदी ने कहा कि इस संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है और भारत ने इसे लेकर पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ कदम उठाए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की भूमिका स्पष्ट है और हमारा लक्ष्य है कि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द से जल्द समाप्त हो। उन्होंने लोकसभा में जोर देकर कहा कि युद्धरत देशों और प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक और आर्थिक संबंध हैं। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।
सरकार का फोकस
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर आवश्यक सहायता के लिए तत्पर है। भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी जरूरी वस्तुएं हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती हैं। उन्होंने बताया कि युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आना-जाना चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए बीते दशक में कच्चे तेल के भंडारण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्तमान में भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन तक के अतिरिक्त रिजर्व की व्यवस्था पर काम चल रहा है। इस भंडार के कारण वैश्विक तेल संकट या आपूर्ति में बाधा आने पर भी देश को पर्याप्त समय और संसाधन मिलते हैं।
भारत के सामने आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियां
पीएम मोदी ने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दृष्टि से गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि युद्धरत क्षेत्र के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं और यह क्षेत्र दुनिया के अन्य देशों के साथ व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग भी है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता हमेशा अपने नागरिकों की सुरक्षा रही है। खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार उपाय किए जा रहे हैं। भारत में और अन्य प्रभावित देशों में 24x7 कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं। इन माध्यमों से सभी प्रभावित नागरिकों को समय पर जानकारी और मदद प्रदान की जा रही है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित

प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के दौरान देश और विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में हर भारतीय को जरूरी मदद मिल रही है और परिवारों को आवश्यक समर्थन प्रदान किया जा रहा है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उन्होंने पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ फोन पर बातचीत की और सभी ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया।
ऊर्जा और आपूर्ति की तैयारी
प्रधानमंत्री ने बताया कि बीते 11 वर्षों में भारत ने अपनी रिफाइनरी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। साथ ही अलग-अलग देशों के सप्लायर्स के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। उन्होंने कहा कि बीते दिनों होर्मुज स्ट्रेट में फंसे कई भारतीय जहाज सुरक्षित भारत लौट चुके हैं।
पीएम मोदी ने इथेनॉल उत्पादन और ब्रॉन्डिंग पर हुए अभूतपूर्व काम का भी उल्लेख किया। एक दशक पहले देश में इथेनॉल बैंडिंग क्षमता केवल 1-1.5 प्रतिशत थी, लेकिन अब यह करीब 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसके कारण प्रति वर्ष लगभग 4.5 करोड़ बैरल तेल के आयात की बचत हो रही है। इससे ऊर्जा सुरक्षा में मजबूती आई है और देश को वैश्विक तेल संकट के प्रभाव से बचाया जा रहा है।
कृषि और खाद्य सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा, यह एक बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि देश के किसानों ने अन्न भंडार भर रखे हैं और भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध है। खरीफ सीजन की बुआई को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आपात स्थिति में खाद्य आपूर्ति और वितरण का पूरा इंतजाम किया है।
पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध के समय बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग भी बढ़ सकती है। इसके लिए देश के सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक उपलब्ध है। भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। पावर जेनेरेशन और सप्लाई के सभी सिस्टम की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि किसी तरह की बिजली संकट न पैदा हो।
वैश्विक एकजुटता की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की संसद से इस संकट पर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से प्रभावित क्षेत्रों में भारतीयों को हर संभव मदद दी जा रही है। पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के अधिकांश राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो बार फोन पर बातचीत की और सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि संकट की इस स्थिति में भारत ने लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म प्लान पर काम किया है। पहले भारत 27 देशों से ईंधन का आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है। इसके अलावा मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया गया है जो आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मॉनिटर कर रहा है।









