माधवी लता की बागलकोट में एंट्री पर रोक, 23 अक्टूबर तक प्रतिबंध; गणपति विसर्जन कार्यक्रम में होना था शामिल

कर्नाटक के बागलकोट में BJP नेता माधवी लता के प्रवेश पर 23 सितंबर से 23 अक्टूबर तक रोक लगी है। पुलिस की सिफारिश पर DC ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया।

कर्नाटक के बागलकोट में भाजपा नेता माधवी लता के प्रवेश पर 23 सितंबर से 23 अक्टूबर तक रोक लगा दी गई है। डिप्टी कमिश्नर ने पुलिस की सिफारिश के बाद आदेश जारी किया। माधवी लता गणपति विसर्जन कार्यक्रम में बतौर वक्ता शामिल होने वाली थीं।

नई दिल्ली: तेलंगाना की भाजपा नेता माधवी लता के कर्नाटक के बागलकोट जिले में प्रवेश पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। जिला प्रशासन के आदेश के मुताबिक यह प्रतिबंध 23 सितंबर 2026 से 23 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगा। माधवी लता को बागलकोट में आयोजित होने वाले हिंदू महा गणपति विसर्जन कार्यक्रम में बतौर वक्ता शामिल होना था। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए उनके जिले में प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है।

डिप्टी कमिश्नर ने जारी किया आदेश

माधवी लता के बागलकोट में प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश जिले के डिप्टी कमिश्नर (DC) संगप्पा की ओर से जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस प्रशासन ने उन्हें इस प्रतिबंध की जानकारी देने के लिए ईमेल भी भेजा है।

आदेश के तहत माधवी लता को निर्धारित अवधि के दौरान बागलकोट जिले में आने या जाने की अनुमति नहीं होगी। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब जिले में गणपति विसर्जन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन के लिए ऐसे धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। इसी संदर्भ में पुलिस की सिफारिश के आधार पर जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

गणपति विसर्जन कार्यक्रम में शामिल होने वाली थीं माधवी लता

माधवी लता को बागलकोट में आयोजित हिंदू महा गणपति विसर्जन कार्यक्रम में वक्ता के तौर पर आमंत्रित किया गया था। हालांकि, कार्यक्रम में उनके पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने जिले में उनके प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया।

रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस को आशंका थी कि उनके कार्यक्रम में शामिल होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ गोयल ने डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर माधवी लता के जिले में प्रवेश पर रोक लगाने की सिफारिश की थी।

SP की रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला

बताया गया है कि बागलकोट के SP सिद्धार्थ गोयल ने डिप्टी कमिश्नर को भेजे पत्र में माधवी लता से जुड़े पूर्व के विवादों और उनके खिलाफ दर्ज मामलों का उल्लेख किया था।

पुलिस की ओर से यह आशंका जताई गई कि उनके भाषण या सार्वजनिक उपस्थिति से जिले में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी आधार पर SP ने प्रशासन से उनके प्रवेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया।

इसके बाद डिप्टी कमिश्नर ने पुलिस की सिफारिश को आधार बनाकर प्रतिबंध का आदेश जारी किया। उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासन के फैसले का मुख्य आधार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आशंका बताया गया है।

पुलिस ने पुराने विवादों का भी दिया हवाला

पुलिस की रिपोर्ट में माधवी लता के पूर्व के सार्वजनिक बयानों और विवादों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें वर्ष 2024 में हैदराबाद में सामने आया एक विवाद भी शामिल है।

अप्रैल 2024 में हैदराबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान माधवी लता का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह कथित तौर पर एक मस्जिद की दिशा में काल्पनिक तीर चलाने जैसा इशारा करती दिखाई दी थीं। इस वीडियो को लेकर विवाद हुआ था। माधवी लता ने उस समय कहा था कि वीडियो अधूरा था और उन्होंने किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो माफी मांगी थी।

बाद में इस मामले में उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी। पुलिस शिकायत में भारतीय दंड संहिता की धारा 295A समेत विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख किया गया था। माधवी लता ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनके वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया।

‘भड़काऊ भाषण’ को लेकर पुलिस की चिंता

बागलकोट पुलिस की सिफारिश में माधवी लता के पूर्व सार्वजनिक बयानों को कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर उनके खिलाफ दर्ज FIR का भी हवाला दिया।

हालांकि, किसी व्यक्ति के पूर्व विवाद या FIR का उल्लेख अपने आप में यह साबित नहीं करता कि किसी नए कार्यक्रम में कानून-व्यवस्था निश्चित रूप से बिगड़ेगी। मौजूदा मामले में यह प्रशासन और पुलिस की ओर से व्यक्त की गई आशंका है, जिसके आधार पर प्रतिबंध लगाया गया है।

यही वजह है कि इस आदेश को रिपोर्ट करते समय पुलिस की आशंका और किसी स्थापित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

बागलकोट में धार्मिक कार्यक्रमों के बीच फैसला

बागलकोट में माधवी लता को जिस कार्यक्रम में शामिल होना था, वह गणपति विसर्जन से संबंधित था। ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी होती है और प्रशासन को भीड़ प्रबंधन तथा कानून-व्यवस्था की निगरानी करनी होती है।

इसी पृष्ठभूमि में जिला प्रशासन ने उनकी प्रस्तावित यात्रा को लेकर पुलिस की रिपोर्ट पर विचार किया और 23 सितंबर से 23 अक्टूबर तक प्रवेश पर रोक लगा दी।

यह आदेश केवल कार्यक्रम में उनकी भागीदारी को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्धारित अवधि के दौरान पूरे बागलकोट जिले में उनके प्रवेश पर लागू है।

माधवी लता के खिलाफ कार्रवाई का व्यापक संदर्भ

माधवी लता भारतीय जनता पार्टी की प्रमुख तेलंगाना नेताओं में शामिल हैं और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हैदराबाद सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। चुनाव के दौरान भी उनके कई बयान और सार्वजनिक गतिविधियां राजनीतिक विवाद का विषय बनी थीं।

2024 के रामनवमी जुलूस से जुड़े तीर वाले वीडियो पर उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया और मीडिया में प्रसारित वीडियो अधूरा था। उन्होंने यह भी कहा था कि उनका इशारा आकाश की ओर था और वीडियो के संदर्भ को गलत तरीके से पेश किया गया। दूसरी ओर, उनके राजनीतिक विरोधियों ने इस घटना को लेकर आपत्ति जताई थी।

इस पुराने विवाद को बागलकोट पुलिस की मौजूदा सिफारिश में संदर्भ के तौर पर शामिल किया गया है।

23 अक्टूबर तक लागू रहेगा प्रतिबंध

प्रशासन के आदेश के अनुसार माधवी लता के बागलकोट जिले में प्रवेश पर रोक 23 सितंबर से 23 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। इस अवधि में वह जिले में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकेंगी।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह फैसला पुलिस अधीक्षक की सिफारिश और जिला प्रशासन के कानून-व्यवस्था संबंधी आकलन के आधार पर लिया गया है। आदेश का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी संभावित तनाव या सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान की आशंका को रोकना बताया गया है।

इस मामले में आगे यदि प्रशासन, पुलिस या माधवी लता की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, तो उससे प्रतिबंध के आधार और इसके खिलाफ उपलब्ध कानूनी या प्रशासनिक विकल्पों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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