फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंदी में संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया और भारत-फ्रांस मित्रता को अमर बताया। छह दिन के फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे के बाद मोदी भारत लौट रहे हैं, जहां उन्होंने G7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया।
पेरिस: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया फ्रांस यात्रा के समापन पर हिंदी में एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर भारत-फ्रांस संबंधों की गर्मजोशी को प्रदर्शित किया। मैक्रों ने अपने संदेश में कहा, “प्रिय मित्र नरेंद्र, आपका नीस, एवियन और पेरिस के दौरे में स्वागत करके मुझे बहुत खुशी हुई। फ्रांस और भारत की दोस्ती अमर रहे।”
हिंदी में संदेश देने के बाद मैक्रों मुस्कुराते हुए दिखाई दिए और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनका उच्चारण सही रहा होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए अगले वर्ष फरवरी में भारत यात्रा के दौरान फिर मिलने की उम्मीद भी जताई।
यह संदेश ऐसे समय आया है जब भारत और फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के 12 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, अंतरिक्ष तथा इंडो-पैसिफिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
छह दिवसीय फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा समाप्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिनों के फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे के बाद गुरुवार देर रात भारत के लिए रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया, कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं और तकनीक तथा निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लिया।
भारत लौटने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह यात्रा सहभागिता, संवाद और उपलब्धियों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि इस दौरे ने भारत के वैश्विक साझेदारों के साथ संबंधों को और मजबूत करने में मदद की है।
विवाटेक समिट में भारत की तकनीकी ताकत का प्रदर्शन
18 जून को प्रधानमंत्री मोदी ने पेरिस में आयोजित विवाटेक (VivaTech) समिट में हिस्सा लिया, जिसे यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और नवाचार मंचों में से एक माना जाता है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत और यूरोप के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन और उभरती तकनीकों के क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में भारत ने आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है।
लोकतंत्र की ताकत और विकास की कहानी
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक शक्ति ने एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति को देश का नेतृत्व करने का अवसर दिया।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना हुआ है और देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री के अनुसार, एयरपोर्ट, विश्वविद्यालय और बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि राजमार्ग निर्माण की गति कई गुना बढ़ी है।
मोदी ने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है और पिछले एक दशक में मोबाइल विनिर्माण इकाइयों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
गरीबी उन्मूलन और सामाजिक परिवर्तन पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सामाजिक विकास को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिनाया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि भारत में जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाए गए घरों की संख्या फ्रांस के कुल आवासों से भी अधिक है। उनके अनुसार, यह परिवर्तन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे करोड़ों लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। मोदी ने कहा कि देश के किसानों, महिलाओं, छात्रों, मछुआरों और छोटे उद्यमियों को तकनीक के माध्यम से नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है।
G7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक मुद्दों पर चर्चा
फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कई महत्वपूर्ण वैश्विक विषयों पर भारत का पक्ष रखा। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला, क्षेत्रीय संघर्ष, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
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भारत, G7 का सदस्य नहीं होने के बावजूद, वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक महत्व के कारण लगातार इस मंच पर आमंत्रित किया जाता रहा है। इस बार भी भारत की भागीदारी को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने विशेष महत्व दिया।
ट्रम्प और मोदी की मुलाकात रही चर्चा में
G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी। दोनों नेताओं के बीच लगभग 18 मिनट तक बातचीत हुई, जिसमें व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भारत वैश्विक मंच पर लगातार अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों की निरंतर मजबूती का संकेत मानी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीयों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया
प्रधानमंत्री मोदी ने G7 सम्मेलन में होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने उन भारतीय नागरिकों का उल्लेख किया जिन्होंने क्षेत्रीय तनाव के दौरान अपनी जान गंवाई और वैश्विक नेताओं से समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
कई वैश्विक नेताओं के साथ हुई अहम मुलाकातें
G7 सम्मेलन और फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के कई प्रमुख नेताओं के साथ मुलाकात की। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी शामिल रहे।
इन बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, तकनीकी नवाचार और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा की गई।
भारत-फ्रांस संबंधों को मिली नई गति
मैक्रों के हिंदी संदेश और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने एक बार फिर भारत-फ्रांस संबंधों की गहराई को उजागर किया है। दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और फ्रांस की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इसी बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम मानी जा रही है।









