मणिपुर में जनगणना और परिसीमन से पहले NRC की मांग, JTCM ने दी आंदोलन की चेतावनी

मणिपुर में JTCM ने जनगणना और परिसीमन से पहले NRC लागू करने की मांग की है। परिषद ने 1951 को आधार वर्ष बनाने और मांगें नहीं मानने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

मणिपुर में JTCM ने जनगणना और परिसीमन से पहले NRC लागू करने की मांग की है। परिषद 1951 को आधार वर्ष बनाकर नागरिकता सत्यापन चाहती है। संगठन ने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो बंद, रैली और धरना शुरू किया जाएगा।

इम्फाल: मणिपुर में जनजातीय संगठन जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर (JTCM) ने जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC लागू करने की मांग तेज कर दी है। परिषद का कहना है कि राज्य में नागरिकता का सत्यापन किए बिना जनसंख्या के आंकड़े तैयार करना या निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करना भविष्य में गंभीर सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव पैदा कर सकता है। JTCM ने केंद्र सरकार और मणिपुर सरकार से मांग की है कि पहले वास्तविक और वैध नागरिकों की पहचान के लिए NRC प्रक्रिया पूरी की जाए। परिषद ने NRC के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाने की मांग भी रखी है। संगठन का तर्क है कि सत्यापित नागरिक आबादी के आधार पर ही जनगणना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े फैसले किए जाने चाहिए।

जनसंख्या संरचना में बदलाव को लेकर चिंता

JTCM ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से लोगों के लगातार आने और इसके कारण मणिपुर की जनसांख्यिकीय संरचना में संभावित बदलाव को लेकर चिंता जताई है। परिषद का कहना है कि आबादी में होने वाले बदलाव का असर राज्य की आदिवासी समुदायों की पहचान, जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और राजनीतिक अधिकारों पर पड़ सकता है।

परिषद के मुताबिक, मणिपुर जैसे संवेदनशील और विविध सामाजिक संरचना वाले राज्य में जनसंख्या संबंधी किसी भी बड़े प्रशासनिक या चुनावी फैसले से पहले नागरिकता की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। संगठन का कहना है कि वास्तविक नागरिकों और कथित अवैध प्रवासियों के बीच अंतर किए बिना तैयार किए गए आंकड़े भविष्य में नीति निर्माण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, अवैध प्रवासन और जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े दावों को लेकर स्वतंत्र और आधिकारिक सत्यापन आवश्यक है। ऐसे मुद्दे संवेदनशील होने के कारण आंकड़ों और नागरिकता संबंधी निष्कर्षों को प्रमाणित रिकॉर्ड के आधार पर देखना महत्वपूर्ण है।

1951 को आधार वर्ष बनाने की मांग

JTCM ने NRC लागू करने के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाने की मांग की है। परिषद के अनुसार, इससे मणिपुर के वास्तविक और वैध नागरिकों की पहचान करने तथा बाद में आए लोगों की नागरिकता स्थिति की जांच करने में मदद मिल सकती है।

NRC का उद्देश्य किसी क्षेत्र में वैध नागरिकों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करना होता है। हालांकि, नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया कानूनी, प्रशासनिक और मानवीय दृष्टि से बेहद जटिल हो सकती है। दस्तावेजों की उपलब्धता, पुराने रिकॉर्ड, जन्म और निवास संबंधी प्रमाण तथा अपील की प्रक्रिया इसके महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं।

मणिपुर में NRC की मांग को लेकर JTCM का कहना है कि राज्य में नागरिकता से संबंधित एक विश्वसनीय और सत्यापन योग्य रिकॉर्ड तैयार किए बिना आगे की जनसंख्या और चुनावी प्रक्रियाओं को शुरू करना उचित नहीं होगा।

जनगणना रोकने की मांग

परिषद ने मणिपुर में जनगणना प्रक्रिया को NRC पूरा होने तक स्थगित करने की मांग की है। JTCM का तर्क है कि जनगणना में दर्ज होने वाली आबादी का आंकड़ा सत्यापित नागरिक आबादी से जुड़ा होना चाहिए।

हालांकि, जनगणना और नागरिकता रजिस्टर अलग-अलग प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं। जनगणना का उद्देश्य सामान्य रूप से आबादी की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी जुटाना होता है, जबकि नागरिक रजिस्टर नागरिकता की स्थिति से संबंधित होता है। इसलिए दोनों प्रक्रियाओं को एक-दूसरे का विकल्प नहीं माना जा सकता।

JTCM इसके बावजूद दोनों प्रक्रियाओं को आपस में जोड़कर देख रहा है। परिषद का कहना है कि यदि जनगणना पहले होती है, तो बाद में सामने आने वाले नागरिकता सत्यापन के आंकड़ों के साथ अंतर पैदा हो सकता है।

परिसीमन पर भी उठाए सवाल

JTCM ने परिसीमन को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है। परिसीमन का मतलब आबादी और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर चुनावी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण होता है।

परिषद का कहना है कि यदि परिसीमन ऐसे जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर किया जाता है, जिनमें नागरिकता की स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो इससे राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

JTCM चाहता है कि पहले नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड को सत्यापित किया जाए और उसके बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। परिषद के अनुसार, इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व वास्तविक और सत्यापित जनसंख्या के अनुरूप निर्धारित करने में मदद मिलेगी।

कथित अवैध बस्तियों की मान्यता रद्द करने की मांग

JTCM ने उन कथित अवैध बस्तियों की मान्यता समाप्त करने की भी मांग की है, जिन्हें गांव के रूप में मान्यता दी गई है लेकिन जो राज्य के कानूनों में निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करतीं।

परिषद का कहना है कि ऐसी बस्तियों की कानूनी स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए। संगठन के अनुसार, यदि किसी क्षेत्र को प्रशासनिक रूप से गांव का दर्जा दिया गया है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह राज्य में लागू कानूनी और प्रशासनिक मानकों के अनुरूप हो।

यह मांग मणिपुर में भूमि, प्रशासनिक सीमाओं और बस्तियों की मान्यता से जुड़े व्यापक विवादों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

NRC, जनगणना और परिसीमन को जोड़कर देख रहा संगठन

JTCM ने NRC, जनगणना और परिसीमन को एक-दूसरे से जुड़े हुए मुद्दे के रूप में पेश किया है। परिषद का कहना है कि नागरिकता का सत्यापित रिकॉर्ड पहले तैयार होना चाहिए और उसके बाद आबादी तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े अभ्यास किए जाने चाहिए।

संगठन के मुताबिक, इस क्रम से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सरकारी नीतियां और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सत्यापित जनसांख्यिकीय जानकारी पर आधारित हों।

दूसरी ओर, इन प्रक्रियाओं को अलग-अलग कानूनी और प्रशासनिक उद्देश्यों के तहत संचालित किया जाता है। इसलिए किसी भी बदलाव के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मौजूदा कानूनों, न्यायिक फैसलों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखना होगा।

आदिवासी समुदायों के अधिकारों पर जोर

JTCM ने अपनी मांगों को मणिपुर के स्वदेशी और जनजातीय समुदायों की पहचान, भूमि अधिकार तथा राजनीतिक हितों की सुरक्षा से जोड़ा है। परिषद का कहना है कि राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनसंख्या और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड पारदर्शी और विश्वसनीय होना चाहिए।

भूमि और राजनीतिक प्रतिनिधित्व मणिपुर की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील विषय रहे हैं। राज्य की विविध जनजातीय और गैर-जनजातीय आबादी के बीच संसाधनों, प्रशासनिक व्यवस्था और प्रतिनिधित्व को लेकर अलग-अलग चिंताएं सामने आती रही हैं।

ऐसे में NRC की मांग को केवल नागरिकता सत्यापन के मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि भूमि, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े व्यापक सवालों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

JTCM ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार सार्वजनिक विरोध के बावजूद मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है, तो परिषद आंदोलन शुरू कर सकती है। संगठन ने संभावित आंदोलन के तहत बंद, रैलियां और धरना-प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों का संकेत दिया है।

परिषद ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और उसकी मांगों पर चर्चा करने की अपील की है। संगठन चाहता है कि नागरिकता सत्यापन, जनगणना और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर सरकार स्पष्ट नीति और समयबद्ध प्रक्रिया सामने रखे।

यदि सरकार और संगठन के बीच बातचीत नहीं होती है, तो इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका बनी रह सकती है। वहीं, किसी भी आंदोलन के दौरान आम लोगों, व्यापार और परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना भी रहेगी।

केंद्र और मणिपुर सरकार के सामने चुनौती

JTCM की मांगों ने केंद्र और मणिपुर सरकार के सामने एक जटिल नीति संबंधी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ नागरिकता और सीमा प्रबंधन से जुड़े सवाल हैं, तो दूसरी तरफ जनगणना और चुनावी परिसीमन जैसी संवैधानिक तथा प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं।

सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि किसी भी नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया में कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच और प्रभावित लोगों के लिए उचित अपील व्यवस्था मौजूद हो। साथ ही, मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में सामाजिक सद्भाव और समुदायों के बीच विश्वास बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

आगे की राह

मणिपुर में NRC की मांग आने वाले समय में राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन सकती है। JTCM ने स्पष्ट किया है कि वह जनगणना और परिसीमन से पहले नागरिकता सत्यापन चाहता है। अब सरकार के सामने संगठन की मांगों पर संवाद करने और मौजूदा कानूनी व्यवस्था के भीतर समाधान तलाशने की चुनौती है।

फिलहाल, JTCM की मांगें परिषद का रुख हैं। NRC लागू करने, जनगणना स्थगित करने या परिसीमन के क्रम में बदलाव जैसे किसी भी फैसले के लिए संबंधित संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होगा।

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