महिला आरक्षण में OBC कोटे की मांग तेज, कांग्रेस ने राहुल गांधी की मौजूदगी में तैयार किया नया रणनीतिक रोडमैप

महिला आरक्षण बिल में OBC कोटे की मांग तेजी से उठ रही है। इस मुद्दे पर Rahul Gandhi की मौजूदगी में कांग्रेस ने नया रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है। जानिए इस

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बुधवार को यह फैसला लिया कि वह लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कोटा सुनिश्चित करने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाएगी।

नई दिल्ली: भारत में महिला आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच अब अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कोटा सुनिश्चित करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने और इसे एक व्यापक राजनीतिक विमर्श बनाने का निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि जब तक महिलाओं के लिए आरक्षण व्यवस्था में सामाजिक न्याय आधारित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक यह व्यवस्था अधूरी मानी जाएगी।

कांग्रेस की बड़ी रणनीतिक बैठक

इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा के लिए कांग्रेस की ओबीसी विभाग से संबंधित सलाहकार परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से Rahul Gandhi, Bhupesh Baghel, Ashok Gehlot और Sachin Pilot शामिल रहे। इसके अलावा ओबीसी विभाग के अध्यक्ष Anil Jaihind Yadav भी बैठक में मौजूद रहे। इस दौरान पार्टी ने महिला आरक्षण के भीतर OBC वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा की।

बैठक में शामिल नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अब तक OBC समुदायों से जुड़े डेटा की कमी के कारण उनकी वास्तविक हिस्सेदारी का आकलन कठिन रहा है। हालांकि, आने वाली जाति जनगणना के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो सकती है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि डेटा उपलब्ध होने के बाद विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक भागीदारी तय करना आसान होगा, जिससे नीतियों को अधिक न्यायसंगत बनाया जा सकेगा।

कांग्रेस का पुराना रुख और नया एजेंडा

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का यह रुख कोई नया नहीं है। पार्टी पहले भी इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने 2023 में संसद में चर्चा के दौरान कहा था कि महिला आरक्षण के लागू होने में OBC वर्ग के लिए भी विशेष प्रावधान होना चाहिए। अब पार्टी इस मुद्दे को फिर से मजबूती से उठाकर इसे राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाना चाहती है।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका। प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का प्रावधान था, लेकिन इसे आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। 

इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी। इस विधेयक में 2029 से महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव भी शामिल था।

राजनीतिक दलों में बढ़ती सहमति और मतभेद

महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक सहमति तो दिखाई देती है, लेकिन इसके भीतर OBC कोटा और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर मतभेद भी गहराते जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि केवल महिलाओं को आरक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के वंचित वर्गों की महिलाओं को भी समान अवसर मिलना चाहिए। पार्टी का मानना है कि बिना सामाजिक न्याय के महिला आरक्षण अधूरा रहेगा।

भारत में OBC समुदाय की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। विभिन्न दलों ने समय-समय पर इस वर्ग के लिए नीतिगत प्रतिनिधित्व की बात की है, लेकिन महिला आरक्षण में इसका स्पष्ट प्रावधान अब तक विवाद का विषय बना हुआ है।

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