महिला आरक्षण पर नरेंद्र मोदी का सन्देश, बोले- बेटियों को हक के लिए इंतजार नहीं

PM नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के नाम पत्र लिखकर 2029 से महिला आरक्षण लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई। कहा- बेटियों को उनके हक के लिए और इंतजार नहीं कराया जा सकता।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने महिलाओं के नाम पत्र लिखकर 2029 से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि बेटियों को उनके हक के लिए और इंतजार नहीं कराया जा सकता।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देश की महिलाओं के नाम एक खुला पत्र जारी कर महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। मंगलवार को जारी इस संदेश में उन्होंने कहा कि भारत की बेटियों को उनके अधिकारों के लिए और लंबा इंतजार नहीं करना चाहिए। अगर 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए पूर्ण आरक्षण के साथ होते हैं, तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत, समावेशी और जीवंत बनेगा।

प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह पत्र भारत की ‘नारी शक्ति’ के नाम है और इसका उद्देश्य दशकों से लंबित उस वादे को दोहराना है, जो महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने से जुड़ा है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने-अपने सांसदों को पत्र लिखें और संसद के मौजूदा सत्र में इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करने के लिए उनका उत्साह बढ़ाएं।

2029 चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी

प्रधानमंत्री के इस संदेश का सबसे अहम हिस्सा 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने की संभावना है। मौजूदा व्यवस्था के तहत महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान तो है, लेकिन इसका क्रियान्वयन परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

मौजूदा कानून के अनुसार, यह व्यवस्था 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू हो सकती थी। इस वजह से आशंका थी कि महिलाओं को 2034 तक इंतजार करना पड़ सकता है।

अब सरकार इस प्रक्रिया को तेज करने और 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए कानूनी रास्ता तैयार कर रही है। इसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जाने की संभावना है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं ने शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि विधायी संस्थाओं में भी उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम और संभावित बदलाव

सितंबर 2023 में संसद ने Nari Shakti Vandan Adhiniyam पारित किया था। इसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून कहा जाता है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया।

यह कानून भारत में महिलाओं की राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा संवैधानिक कदम माना गया था। हालांकि, इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसका लागू होने का समय था। सरकार अब इस कानून में संशोधन कर इसे 2029 के चुनावों से पहले लागू करने की योजना बना रही है। इसके लिए दो अहम बदलाव प्रस्तावित हैं:

  • परिसीमन प्रक्रिया को तेज करने या विशेष प्रावधान लाने पर विचार
  • सीट आरक्षण के क्रियान्वयन के लिए संवैधानिक संशोधन

इन संशोधनों के पारित होने के बाद महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों का स्पष्ट आरक्षण तय हो सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी केवल प्रतीकात्मक नहीं रहेगी, बल्कि नीतिगत फैसलों में उनकी सीधी भूमिका बढ़ेगी।

संसद सत्र, राजनीतिक असर और महिलाओं की भागीदारी

महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। कई दशकों तक विभिन्न सरकारों ने इस पर पहल की, लेकिन ठोस क्रियान्वयन में देरी होती रही। प्रधानमंत्री मोदी के ताजा पत्र को 2029 चुनावों से पहले महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की बड़ी रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

अगर प्रस्तावित संशोधन संसद में पारित हो जाते हैं, तो लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़कर 816 तक पहुंच सकती है। इनमें से लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। इससे संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी मौजूदा स्तर से कहीं अधिक बढ़ जाएगी।

हालांकि, इस प्रस्ताव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) महिलाओं के लिए अलग आरक्षण का प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए मौजूदा आरक्षण व्यवस्था पहले की तरह जारी रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिला आरक्षण समय पर लागू होता है, तो इससे भारत की लोकतांत्रिक संरचना अधिक प्रतिनिधिक और संतुलित बनेगी। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में बड़ी भूमिका मिल सकती है।

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में यह भी कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा तभी पूर्ण मानी जाएगी, जब देश की आधी आबादी को समान प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने महिलाओं से इस बदलाव का सक्रिय हिस्सा बनने और अपने जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में समर्थन देने की अपील की।

महिला आरक्षण को लेकर यह पहल आने वाले महीनों में संसद, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के बीच बड़ी बहस का विषय बन सकती है। अगर यह प्रस्ताव तय समय में आगे बढ़ता है, तो 2029 का चुनाव भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।

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