मणिपुर जातीय हिंसा की जांच रिपोर्ट में देरी, केंद्र ने चौथी बार बढ़ाई समयसीमा

मणिपुर जातीय हिंसा की जांच रिपोर्ट में देरी, केंद्र ने चौथी बार बढ़ाई समयसीमा

केंद्र सरकार ने मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा की जांच कर रहे आयोग को चौथी बार समय बढ़ाया है। गृह मंत्रालय के अनुसार आयोग अब 20 मई 2026 तक रिपोर्ट सौंपेगा। राज्य में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है।

Manipur: केंद्र सरकार ने मणिपुर में वर्ष 2023 में हुई भीषण जातीय हिंसा की जांच कर रहे आयोग को एक बार फिर अतिरिक्त समय दे दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को जारी नोटिफिकेशन में बताया कि जांच आयोग अब अपनी रिपोर्ट 20 मई, 2026 तक केंद्र सरकार को सौंप सकेगा। यह आयोग को दिया गया चौथा एक्सटेंशन है, जिससे साफ है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हो पाई है।

सरकार के अनुसार आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी रिपोर्ट जितनी जल्दी संभव हो सके सौंपे, लेकिन यह तय समय सीमा 20 मई, 2026 से आगे नहीं बढ़ेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में हालात सामान्य करने की कोशिशें लगातार जारी हैं और राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) भी लागू है।

क्यों बढ़ाई गई रिपोर्ट जमा करने की तारीख

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जांच आयोग को हिंसा से जुड़े कई जटिल पहलुओं की पड़ताल करनी है। अलग-अलग समुदायों को निशाना बनाकर हुई हिंसा, उसके कारण, फैलाव और इसके पीछे की घटनाओं की कड़ी को समझना आयोग की जिम्मेदारी है।

इससे पहले आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए 13 सितंबर, 2024, 3 दिसंबर, 2024 और 20 मई, 2025 तक का समय दिया जा चुका है। अब ताजा आदेश के तहत आयोग को 20 मई, 2026 तक की मोहलत दी गई है। यानी यह चौथी बार है जब आयोग की समयसीमा बढ़ाई गई है।

जांच आयोग का गठन कब हुआ

मणिपुर में 3 मई, 2023 को भड़की जातीय हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने 4 जून, 2023 को इस जांच आयोग का गठन किया था। यह फैसला मणिपुर सरकार की सिफारिश पर लिया गया था, जिसने जांच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत हिंसा के कारणों और उससे जुड़े कारकों की विस्तृत जांच की मांग की थी।

आयोग का गठन गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा की अध्यक्षता में किया गया। यह तीन सदस्यीय आयोग है, जिसमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हिमांशु शेखर दास और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आलोक प्रभाकर भी सदस्य हैं।

आयोग को क्या जिम्मेदारी सौंपी गई

जांच आयोग को मणिपुर में हुई हिंसा के हर पहलू की जांच करने का दायित्व सौंपा गया है। आयोग यह देखेगा कि हिंसा की ओर ले जाने वाली घटनाओं का क्रम क्या था और किन परिस्थितियों में हालात बेकाबू हुए।

इसके साथ ही आयोग को यह भी जांच करनी है कि क्या किसी अधिकारी या व्यक्ति की ओर से चूक या कर्तव्य में लापरवाही (dereliction of duty) हुई। इसके अलावा हिंसा और दंगों को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम पर्याप्त थे या नहीं, इसकी भी समीक्षा की जाएगी।

शिकायतों और आरोपों पर भी विचार

गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि आयोग के सामने किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा रखी गई शिकायतों और आरोपों पर भी विचार किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि आयोग केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों, पीड़ितों और संगठनों की बातों को भी सुनेगा।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच निष्पक्ष हो और हिंसा के पीछे की सच्चाई सामने आ सके। सरकार का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट भविष्य में शांति बहाली के लिए अहम भूमिका निभा सकती है।

3 मई, 2023 की हिंसा

गृह मंत्रालय के 4 जून, 2023 के नोटिफिकेशन के अनुसार, 3 मई, 2023 को मणिपुर में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में राज्य के कई निवासियों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।

आगजनी की घटनाओं में लोगों के घर और संपत्तियां जला दी गईं, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए। हिंसा ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया और लंबे समय तक सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाई।

हिंसा की मुख्य वजह क्या थी

मणिपुर में हिंसा तब शुरू हुई जब पहाड़ी जिलों में रहने वाले कुकी-ज़ो आदिवासियों ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की हाई कोर्ट की सिफारिश का विरोध किया। इस मुद्दे ने पहले तनाव को जन्म दिया और फिर यह हिंसक टकराव में बदल गया।

इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेई और आसपास की पहाड़ियों में रहने वाले कुकी-ज़ो समूहों के बीच यह जातीय संघर्ष तेजी से फैल गया। हालात इतने बिगड़ गए कि सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर तैनात करना पड़ा।

जानमाल का भारी नुकसान

इस जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। हिंसा का असर न केवल सामाजिक ताने-बाने पर पड़ा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है। यह फैसला 13 फरवरी, 2025 को लिया गया, जो 9 फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लागू हुआ। राष्ट्रपति शासन के तहत राज्य का प्रशासन सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में है।

3 जनवरी को मणिपुर के नए राज्यपाल का पद संभालने के बाद अजय कुमार भल्ला लगातार अलग-अलग वर्गों के लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। वह इस बात पर फीडबैक ले रहे हैं कि पूर्वोत्तर राज्य में सामान्य स्थिति कैसे बहाल की जा सकती है।

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