सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे 'हजार छोटे-छोटे घाव' कर योजना खत्म करने की रणनीति बताया और कहा कि यह ग्रामीणों के रोजगार और अधिकारों पर गंभीर हमला है।
New Delhi: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की रणनीति अपना रही है। उन्होंने इसे 'डेथ बाई थाउजेंड कट्स' यानी हजार छोटे-छोटे घाव देकर योजना को खत्म करने की रणनीति करार दिया। सोनिया गांधी ने लिखा कि यह योजना महात्मा गांधी के सर्वोदय के दृष्टिकोण को साकार करने वाली थी और इसके खत्म होने को हमारी सामूहिक नैतिक विफलता माना जाना चाहिए।
मनरेगा पर मोदी सरकार के कदम
सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में मोदी सरकार ने मनरेगा को खत्म करने के लिए चर्चा, परामर्श या संसदीय प्रक्रियाओं का सम्मान नहीं किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच के संबंधों की अनदेखी करते हुए सरकार ने योजना की मूल संरचना को नष्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना केवल एक प्रतीक है, जबकि इसकी पूरी संरचना और मांग आधारित स्वरूप खत्म कर दिया गया।
सोनिया ने कहा कि मनरेगा दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा पहल रही है और इसे सबसे अधिक अध्ययन एवं मूल्यांकन वाले कार्यक्रमों में गिना गया। इन अध्ययनों ने समाज के कमजोर वर्गों पर इसके परिवर्तनकारी प्रभावों को रेखांकित किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्यों की वित्तीय स्थिति, जो पहले से ही संकटग्रस्त है, इस कदम से और भी खराब हो जाएगी।
मनरेगा का विकेंद्रीकृत स्वरूप समाप्त
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने योजना के विकेंद्रीकृत स्वरूप को खत्म कर दिया है। इसके अलावा सरकार का दावा कि उसने रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी, सोनिया गांधी के अनुसार भ्रामक है। उन्होंने लिखा कि पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने लगातार मनरेगा का गला घोंटने का प्रयास किया। यह सिलसिला प्रधानमंत्री द्वारा संसद में योजना का उपहास उड़ाने से शुरू हुआ और धीरे-धीरे इसे खत्म करने के लिए स्थिर बजट, लोगों को वंचित करने वाली तकनीकें और मजदूरों के भुगतान में देरी जैसी नीतियों के माध्यम से आगे बढ़ा।
काम के अधिकार पर हमला
सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा का समाप्त होना केवल योजना का अंत नहीं है, बल्कि यह काम के अधिकार और संविधान द्वारा सुनिश्चित अधिकारों पर सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान के लंबे हमले का हिस्सा है। उन्होंने जोर दिया कि मतदान का सबसे मौलिक अधिकार भी आज अभूतपूर्व हमले का सामना कर रहा है। मनरेगा ने काम के संवैधानिक अधिकार को लागू किया और महात्मा गांधी के सर्वोदय के दृष्टिकोण को साकार किया।
उनके अनुसार, इस योजना का खत्म होना करोड़ों मेहनतकश लोगों पर वित्तीय और मानवीय परिणाम डालेगा। इसे अलग-थलग करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे भारत में अधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर जारी हमलों के हिस्से के रूप में समझना होगा।
सामूहिक एकजुटता की जरूरत
सोनिया गांधी ने कहा कि अब पहले से कहीं अधिक यह आवश्यक है कि हम एकजुट हों और उन अधिकारों की रक्षा करें जो सभी की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि मजदूरों, किसानों और भूमिहीन ग्रामीण वर्ग के गरीबों के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाएं।
सोनिया ने पिछले शनिवार को एक वीडियो संदेश में भी आरोप लगाया था कि मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया है और इसके माध्यम से करोड़ों लोगों के जीवन और रोज़गार पर हमला किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल योजना का अंत नहीं, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे पर गंभीर चोट है।









