जानकारी के अनुसार शुक्रवार को हाथीदह रेल पुलिस और मोकामा आरपीएफ ने संयुक्त अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान स्टेशन परिसर से एक कथित शराब तस्कर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक उसके पास से रेड लेबल और जॉनी वॉकर ब्रांड की विदेशी शराब बरामद हुई। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान बेगूसराय जिले के लाखो थाना क्षेत्र के वाजिदपुर गांव निवासी मुकेश साव के बेटे रोहित कुमार के रूप में बताई गई है। पुलिस अब बरामद शराब की मात्रा, उसके स्रोत और उसे कहां पहुंचाया जाना था, जैसे बिंदुओं पर जांच कर रही है।
रेलवे स्टेशन से शराब बरामद होने के बाद पुलिस के सामने एक बार फिर ट्रेनों के जरिए शराब की खेप लाने-ले जाने की चुनौती सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक शराब तस्करी के लिए रेल मार्ग का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी पुलिस को लगातार मिल रही है। इससे पहले गुरुवार को भी मरांची पुलिस ने एक ऑटो से बड़ी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की थी। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद शराब की अवैध आपूर्ति को पूरी तरह रोकना चुनौती बना हुआ है।
दूसरी ओर मोकामा थाना क्षेत्र में शराब पीकर सार्वजनिक जगह पर हंगामा करने के मामलों में भी पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार कुछ लोग शराब के नशे में अपने पड़ोसियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे और सड़क पर मजमा लगाकर हंगामा कर रहे थे। इसी तरह के मामलों में पुलिस ने आरोपितों को पकड़कर जेल भेजने की कार्रवाई की। रिपोर्ट में शिवनार इलाके से चाचा को गाली देने और नशे में हंगामा करने के आरोप में दो सहोदर भाइयों हरेराम और मनोज की गिरफ्तारी का उल्लेख है।
रिपोर्ट के मुताबिक बरहपुर गांव से सुबोध बिंद को भी पकड़ा गया। वहीं हाथीदह थाना क्षेत्र के दरियापुर इलाके में एक व्यक्ति के नशे की हालत में काफी देर तक हंगामा करने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलने के बाद अपर थानाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद वर्मा मौके पर पहुंचे और कार्रवाई की। संबंधित व्यक्ति की पहचान मोहम्मद शकील के रूप में बताई गई है।
मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रही। मोकामा पुलिस ने गोसाईं गांव निवासी अरविंद कुमार को एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामले में भी गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी दी है। हालांकि यह गिरफ्तारी शराब से जुड़े मामलों से अलग बताई गई है, इसलिए दोनों मामलों को अलग-अलग कानूनी कार्रवाई के तौर पर देखा जाना चाहिए।
मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब की उपलब्धता पुलिस और मद्य निषेध विभाग के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। खासकर ट्रेन, ऑटो और दूसरे वाहनों के जरिए शराब की खेप एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में पुलिस को सिर्फ शराब बरामद करने के बजाय उसके सप्लायर, परिवहन करने वाले व्यक्ति और संभावित खरीदारों की कड़ी तक पहुंचने की जरूरत होती है।
हाल के दिनों में बिहार के दूसरे जिलों में भी शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई हुई है। उदाहरण के लिए गोपालगंज में सितंबर में उत्पाद विभाग ने गांदक नदी में एक नाव से 574 लीटर भारतीय निर्मित और विदेशी शराब बरामद करने तथा एक कथित तस्कर को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी। इससे स्पष्ट है कि शराब की अवैध आवाजाही को रोकने के लिए सड़क, रेल और नदी मार्गों पर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
मोकामा की ताजा कार्रवाई के बाद पुलिस की नजर शराब की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क पर भी रहने की संभावना है। स्टेशन से शराब बरामदगी के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि खेप कहां से आई थी और इसे किसे सौंपा जाना था। वहीं सार्वजनिक स्थान पर शराब पीकर हंगामा करने के मामलों में पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई की है।
स्थानीय स्तर पर पुलिस की ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य शराबबंदी कानून के उल्लंघन को रोकने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर नशे की हालत में होने वाले उपद्रव पर नियंत्रण रखना है। मोकामा और घोसवरी क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता बढ़ने से शराब की अवैध बिक्री और सेवन से जुड़े मामलों पर निगरानी और सख्त हो सकती है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया न्यायालय में चलेगी और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत के स्तर पर होगा।











