नई दिल्ली: मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित है। भोपाल में जलभराव, राजस्थान में भारी बारिश और हिमाचल में भूस्खलन से सड़कें व बिजली-पानी की व्यवस्था प्रभावित हुई है।
नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में मानसून के सक्रिय रहने से भारी बारिश का दौर जारी है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में तेज बारिश के कारण जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी है, जबकि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और चट्टानें गिरने से 259 सड़कें बंद हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश के कारण कई इलाकों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
MP और राजस्थान में भारी बारिश से हालात बिगड़े
मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। राजधानी भोपाल में पिछले दो दिनों से बारिश जारी है। बीते 24 घंटे में यहां सात इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। एक हजार से ज्यादा घरों के आसपास करीब पांच फीट तक पानी भरने की जानकारी सामने आई है।

लगातार बारिश को देखते हुए भोपाल में स्कूलों को दो दिन के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है। सीहोर में भी शनिवार से मंगलवार सुबह तक करीब आठ इंच बारिश दर्ज की गई। भीलाखेड़ी नदी के पास एक मकान बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया था, जिसमें फंसे 10 लोगों को पुलिस और ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
राजस्थान में भी बारिश का असर व्यापक है। राज्य के छह जिलों में मंगलवार को भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 17 जिलों के लिए यलो अलर्ट है। हाड़ौती क्षेत्र के कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ में पिछले 24 घंटे के दौरान 12 इंच तक बारिश दर्ज की गई।
हिमाचल में भूस्खलन से सड़क और बिजली व्यवस्था प्रभावित
हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। कुल्लू में एनएच-305 पर मंगलवार सुबह चलती कार पर अचानक चट्टानें और मलबा गिर गया। हादसे में कार सवार दो लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को मलबे से बाहर निकाला गया।
बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य में चंडीगढ़-मनाली फोरलेन समेत कुल 259 सड़कें प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा 161 बिजली ट्रांसफॉर्मर और 54 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित होने की जानकारी है। कुल्लू जिले में ही 56 सड़कें बंद हैं और पांच बिजली ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं।
मंडी-कुल्लू हाईवे भी भूस्खलन के कारण बाधित है। मनाली हाईवे के कई हिस्सों में भी पहाड़ से पत्थर गिरने के कारण यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों को नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।
उत्तराखंड में बादल फटने से पुल बहा
उत्तराखंड में भी पिछले दो दिनों से कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है। चमोली की नीती घाटी में सोमवार शाम बादल फटने के बाद तमक नाला उफान पर आ गया। तेज बहाव और मलबे की चपेट में आने से करीब 35 फीट लंबा वैली ब्रिज बह गया। यह पुल बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने 17 टन स्टील से तैयार किया था और भारत-चीन सीमा के पास महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग का हिस्सा था।
चंपावत में भी लोहाघाट-पिथौरागढ़ नेशनल हाईवे पर भूस्खलन के कारण यातायात बाधित हुआ है। पहाड़ी से मलबा सड़क पर आने के बाद हाईवे बंद हो गया।
यूपी और छत्तीसगढ़ में भी बारिश का असर
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बिजनौर में मंगलवार सुबह से तेज बारिश के कारण कई सड़कों पर करीब दो फीट तक पानी भर गया। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश का असर गंगा और यमुना के जलस्तर पर भी पड़ा है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की सीढ़ियां डूब गई हैं और कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं।
छत्तीसगढ़ में भी मंगलवार को कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।
मौसम सिस्टम के कारण अगले दिनों में भी बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार इस समय मध्य भारत में लो-प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ सक्रिय है। उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश और आसपास बने सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश, राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां जारी हैं। 11 और 12 अगस्त को पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में भी एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय है। इसके प्रभाव से 12 अगस्त के आसपास एक और लो-प्रेशर एरिया बनने की संभावना है। इसके आगे बढ़ने पर पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।
लगातार सक्रिय मौसम प्रणालियों को देखते हुए आने वाले दिनों में मध्य और पूर्वी भारत के साथ पहाड़ी राज्यों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।












