भारत में मानसून की विदाई का दौर शुरू होने वाला है, लेकिन इसी बीच इसरो के मौसम सैटेलाइट INSAT-3DS से ली गई एक ताजा तस्वीर ने देश के मौसम की स्थिति को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।
नई दिल्ली: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे वापसी की ओर बढ़ रहा है। इसी बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मौसम उपग्रह INSAT-3DS से सामने आई एक ताजा सैटेलाइट तस्वीर ने देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के बीच बड़ा अंतर दिखाया है। तस्वीर में भारत का एक बड़ा हिस्सा घने बादलों से ढका नजर आ रहा है, जबकि उत्तर-पश्चिमी और पश्चिमी क्षेत्रों में आसमान अपेक्षाकृत साफ दिखाई दे रहा है।
अंतरिक्ष से ली गई यह तस्वीर बताती है कि मानसून की वापसी एक समान तरीके से नहीं होती। जहां राजस्थान, पंजाब और गुजरात सहित उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क नजर आ रहा है, वहीं मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई इलाकों में बादलों की सक्रियता बनी हुई है।
बंगाल की खाड़ी से पूर्वोत्तर तक छाए घने बादल
INSAT-3DS की तस्वीर में बंगाल की खाड़ी के आसपास बादलों का एक बड़ा समूह दिखाई देता है। यह बादल पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की ओर फैले हुए नजर आते हैं। दक्षिणी प्रायद्वीप और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में भी बादलों की अलग-अलग पट्टियां देखी जा सकती हैं। मौसम विज्ञान के लिहाज से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में बनने वाली मौसमी प्रणालियां भारत के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश को प्रभावित कर सकती हैं। समुद्र से आने वाली नमी, वायुमंडलीय दबाव में बदलाव और सक्रिय मौसम प्रणालियां बादलों के इस तरह के व्यापक विस्तार की वजह बन सकती हैं।
हालांकि, केवल सैटेलाइट तस्वीर के आधार पर किसी खास मौसम प्रणाली की सटीक पहचान या उसके पूरे प्रभाव का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। इसके लिए मौसम विभाग के अन्य आंकड़ों, जमीनी अवलोकन और वायुमंडलीय परिस्थितियों को भी देखना जरूरी होता है।
10.83 माइक्रोमीटर चैनल से ली गई तस्वीर

INSAT-3DS एक मौसम विज्ञान उपग्रह है, जिसे मौसम संबंधी निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के उपग्रह बादलों, तापमान और वायुमंडलीय गतिविधियों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बताया गया है कि सामने आई तस्वीर 10.83 माइक्रोमीटर वेवलेंथ वाले थर्मल इंफ्रारेड चैनल से प्राप्त हुई है।
इस तकनीक की मदद से पृथ्वी की सतह और बादलों से संबंधित तापीय जानकारी हासिल की जाती है। तस्वीर में भारत के अलावा आसपास के क्षेत्रों में मौजूद बादलों की स्थिति भी देखी जा सकती है।
पश्चिमी भारत में साफ नजर आया अंतर
सैटेलाइट तस्वीर का सबसे प्रमुख पहलू भारत के अलग-अलग हिस्सों के बीच दिखाई देने वाला अंतर है। पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत का बड़ा क्षेत्र बादलों से लगभग मुक्त नजर आता है। राजस्थान, गुजरात और पंजाब जैसे क्षेत्रों में अपेक्षाकृत साफ आसमान मानसून की वापसी के संकेतों से मेल खाता है। इसके विपरीत पूर्वी और मध्य भारत के ऊपर बादलों की मौजूदगी बताती है कि मानसूनी नमी और मौसम संबंधी गतिविधियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही समय पर मौसम का मिजाज काफी अलग दिखाई दे रहा है।
डीप डिप्रेशन ने बढ़ाई बारिश की गतिविधि
इस मौसम पैटर्न के दौरान पूर्वी और मध्य भारत में एक कमजोर पड़ता डीप डिप्रेशन भी मौसम को प्रभावित कर रहा है। ऐसे सिस्टम अपने आसपास के वातावरण में नमी और अस्थिरता पैदा कर सकते हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। जैसे-जैसे मौसम प्रणाली कमजोर होती है, इसका प्रभाव धीरे-धीरे कम हो सकता है। हालांकि, इसके अवशेष और नमी आसपास के इलाकों में बारिश को कुछ समय तक प्रभावित कर सकते हैं।











