MPC बैठक: रीपो रेट में दिसंबर में 100 आधार अंक की कटौती, RBI की अब रणनीति पर नजर

MPC बैठक: रीपो रेट में दिसंबर में 100 आधार अंक की कटौती, RBI की अब रणनीति पर नजर

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने आर्थिक वृद्धि और महंगाई दर के आधार पर आगे की ब्याज दर नीति तय करने का संकेत दिया। दिसंबर में 100 आधार अंक की रीपो रेट कटौती की गई। अमेरिकी शुल्क और वैश्विक परिस्थितियों पर भी असर।

RBI Update: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee - MPC) ने संकेत दिया है कि महंगाई अनुकूल रहने के बावजूद आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए ब्याज दरों के आगे के कदम डेटा और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर तय किए जाएंगे। MPC के सदस्य नागेश कुमार के अनुसार महंगाई दर उम्मीद के मुताबिक बनी हुई है और वर्तमान ब्याज दरें पर्याप्त कम हैं।

उन्होंने बताया कि भारत पर लगे उच्च ट्रंप शुल्क और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के असर से कारोबार पर दबाव है। इसका असर खासतौर पर उन क्षेत्रों पर पड़ा है जिनका अमेरिका के साथ अच्छा व्यापार होता है।

दिसंबर MPC बैठक में रीपो रेट कटौती

नागेश कुमार ने बताया कि दिसंबर की नीतिगत बैठक में MPC ने वृद्धि को समर्थन देने के लिए चरणबद्ध तरीके से रीपो रेट में कुल 100 आधार अंक की कटौती की। इन कटौतियों का असर ऋण और जमा दरों तक पहुँच चुका है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों के शीर्ष स्तर पर रहने के कारण 25 आधार अंक और कटौती की संभावना देखी गई। सौभाग्य से महंगाई दर की स्थिति अनुकूल रही। अक्टूबर 2025 में समग्र महंगाई दर 0.3 प्रतिशत थी और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2 प्रतिशत महंगाई दर का अनुमान है।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देरी का असर

MPC ने यह भी ध्यान रखा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देरी और उच्च ट्रंप शुल्क से भारत के कारोबार पर असर पड़ा है। श्रम आधारित उद्योगों जैसे कपड़ा, गारमेंट, चमड़े के सामान, रत्न एवं आभूषण और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों जैसे झींगा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा।

इन उद्योगों में MSME का प्रभुत्व है और विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियों में इनकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। इस वजह से अमेरिका के शुल्क का असर MSME और नौकरियों पर गंभीर रूप से पड़ा। MPC ने पाया कि आर्थिक मांग को गति देने के लिए समर्थन आवश्यक है। इसके लिए राजकोषीय और मौद्रिक नीतिगत कदमों का समन्वय करना जरूरी है।

ब्याज दरों में और कटौती की संभावना

नागेश कुमार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा महंगाई दर बहुत कम है, खासतौर पर यदि सोने जैसी कीमती धातुओं को बाहर रखा जाए। यह दर लक्ष्य की निचली सीमा से भी कम है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए बहुत कम महंगाई दर बेहतर नहीं है। इससे मांग में कमी के संकेत मिलते हैं। ऐसे में वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए भविष्य में नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं। MPC आगे की ब्याज दर रणनीति आर्थिक वृद्धि और महंगाई के आंकड़ों के आधार पर तय करेगा।

वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में वृद्धि चरम पर

MPC ने माना कि अक्टूबर 2025 तक आर्थिक गतिविधियों का ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ समाप्त होने लगा। उच्च विकास और कम महंगाई दर का यह दौर अब समाप्त हो रहा है।

दूसरी तिमाही के परिणामों से पता चला कि आर्थिक गतिविधियां उस समय चरम पर थीं। अक्टूबर 2025 में औद्योगिक गतिविधियों की गति धीमी होनी शुरू हुई और 14 महीने में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई। विनिर्माण पीएमआई जैसे संकेतक 59.2 से गिरकर 56.6 पर आ गए।

वस्तु निर्यात में अक्टूबर में 12 प्रतिशत की गिरावट आई। नए ऑर्डर भी 12 महीने के निचले स्तर पर पहुँच गए। इसके अलावा रुपया दबाव में आ गया और एक डॉलर के मुकाबले 90 रुपये का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर गया।

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