चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दोहराए गए और मृत मतदाताओं के नाम हटाना है। यह प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी और अगले तीन साल में होने वाले विधानसभा चुनावों को सुरक्षित बनाएगी।
New Delhi: चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण यानी विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह काम मंगलवार से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक पूरा किया जाएगा। एसआईआर का उद्देश्य वोटर लिस्ट में दोहराए गए नामों को हटाना, मृत मतदाताओं के नाम हटाना और अन्य विसंगतियों को ठीक करना है। इससे आगामी तीन साल में होने वाले विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा।
एसआईआर की प्रक्रिया में कौन-कौन से राज्य शामिल
एसआईआर के दूसरे चरण में छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश और पुडुचेरी शामिल हैं। इसके अलावा लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार केंद्र शासित प्रदेश भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं। पहले चरण में बिहार में एसआईआर किया गया था। असम को बाद में शामिल किया जाएगा, क्योंकि वहां सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में नागरिकता जांच चल रही है।
अगले तीन साल में 10 राज्यों में चुनाव
एसआईआर से जुड़े राज्यों में 2026 में चार राज्यों में चुनाव होने हैं। ये हैं पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी। 2027 में गोवा, गुजरात और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे। 2028 में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में चुनाव होंगे। इस तरह अगले तीन सालों में एसआईआर वाले 10 राज्यों में चुनाव होंगे।

एसआईआर प्रक्रिया का महत्व
चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर प्रक्रिया इसलिए जरूरी है क्योंकि देश में तेजी से शहरीकरण और जनसंख्या का विस्थापन हो रहा है। इससे कई लोगों के नाम मतदाता सूची में दो बार दर्ज हो गए हैं या मृत मतदाताओं के नाम नहीं हटाए गए हैं। कुछ राज्यों में अवैध प्रवासियों के नाम भी मतदाता सूची में जुड़ गए हैं। एसआईआर के दौरान प्रत्येक मतदाता को यूनिक फॉर्म दिया जाएगा, जिसमें पुराना पता, फोटो और अन्य विवरण होंगे। मतदाता अपनी जानकारी में सुधार कर सकते हैं और रंगीन फोटो लगाकर पहचान सुनिश्चित कर सकते हैं।
12 राज्यों में एसआईआर का राजनीतिक असर
एसआईआर वाले राज्यों में बीजेपी और विपक्ष दोनों की सरकारें हैं। पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में विपक्ष की सरकारें हैं, जबकि गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी की सरकार है। पुडुचेरी में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में शामिल है। कुल मिलाकर इन राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता हैं। इसमें उत्तर प्रदेश में 15.44 करोड़, पश्चिम बंगाल में 7.66 करोड़, तमिलनाडु में 6.41 करोड़, मध्य प्रदेश में 5.74 करोड़, राजस्थान में 5.48 करोड़ और छत्तीसगढ़ में 2.12 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
विपक्ष का आरोप
विपक्ष ने एसआईआर पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए बीजेपी समर्थक मतदाताओं को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। टीएमसी, डीएमके और लेफ्ट पार्टियों ने चुनाव आयोग पर लोकतंत्र के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया है। डीएमके ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर कहा कि बिहार जैसी स्थिति तमिलनाडु में दोहराई नहीं जाएगी। टीएमसी और लेफ्ट पार्टियों ने बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी का रुख़
बीजेपी नेताओं का कहना है कि एसआईआर लोकतंत्र की रक्षा का एक कदम है। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस प्रक्रिया से देश में किसी भी घुसपैठिए या फर्जी मतदाता को बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने बूथ कब्जा करके या फ़र्ज़ी वोट डालकर चुनाव जीतने का प्रयास किया था, लेकिन एसआईआर से लोकतंत्र मजबूत होगा।










