Muzaffarpur- धान खरीद में जिला पिछड़ा

Muzaffarpur- धान खरीद में जिला पिछड़ा

मुजफ्फरपुर में इस खरीफ सीजन में सरकारी धान खरीद की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं चल पाई है। जिले में पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) के बावजूद किसानों की पहली पसंद स्थानीय बाजार बनता जा रहा है। नतीजा यह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीद के लक्ष्य के मुकाबले जिला काफी पीछे रह गया है।

पैक्स के बजाय बाजार क्यों चुन रहे किसान

किसानों का कहना है कि पैक्स के जरिए धान बेचने में देरी, कागजी औपचारिकताएं और भुगतान में विलंब बड़ी समस्या है। कई किसानों ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग और गुणवत्ता जांच जैसी प्रक्रियाओं में समय लग जाता है, जबकि स्थानीय बाजार में धान तुरंत बिक जाता है और नकद या उसी दिन भुगतान मिल जाता है। इसी कारण किसान मजबूरी में या सुविधा के लिहाज से बाजार का रुख कर रहे हैं।

एमएसपी से कम दाम पर भी बिक्री

हालांकि बाजार में किसानों को एमएसपी से कम कीमत मिल रही है, लेकिन समय पर भुगतान और झंझट से मुक्ति उन्हें आकर्षित कर रही है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए फसल कटाई के बाद तुरंत पैसे की जरूरत होती है—खासकर कर्ज चुकाने, मजदूरी देने और अगली फसल की तैयारी के लिए। ऐसे में वे पैक्स की लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं कर पाते।

पैक्स की तैयारी पर सवाल

जिले में कई पैक्स समय पर क्रियाशील नहीं हो सके। कहीं भंडारण की समस्या रही, तो कहीं तौल और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर पड़ी। कुछ पैक्स में स्टाफ की कमी और तकनीकी अड़चनें भी सामने आईं। इससे किसानों का भरोसा कमजोर हुआ और वे वैकल्पिक रास्ते के तौर पर बाजार की ओर मुड़ गए।

लक्ष्य से पीछे जिला

सरकारी आंकड़ों के अनुसार धान खरीद का निर्धारित लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। अन्य जिलों की तुलना में मुजफ्फरपुर की प्रगति धीमी रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीद की प्रक्रिया सरल नहीं की गई और भुगतान समयसीमा सुनिश्चित नहीं हुई, तो लक्ष्य हासिल करना और मुश्किल हो जाएगा।

प्रशासन और विभाग की कोशिशें

कृषि एवं सहकारिता विभाग का कहना है कि पैक्स को सक्रिय करने, भुगतान में तेजी लाने और किसानों की समस्याएं दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल करने और लंबित भुगतानों के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसान दोबारा पैक्स पर भरोसा कर सकें।

किसानों की प्रमुख मांगें

  • धान खरीद में तुरंत भुगतान की गारंटी
  • पंजीकरण और स्लॉट प्रक्रिया को सरल और ऑफलाइन विकल्प
  • गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता और एकरूपता
  • सभी पैक्स में पर्याप्त भंडारण और तौल व्यवस्था

निष्कर्ष

मुजफ्फरपुर में धान खरीद की सुस्त रफ्तार यह साफ संकेत देती है कि सरकारी व्यवस्था और जमीनी जरूरतों के बीच अभी भी अंतर है। जब तक पैक्स के माध्यम से खरीद तेज, सरल और भरोसेमंद नहीं बनेगी, तब तक किसान बाजार को ही अपनी पहली पसंद बनाते रहेंगे और जिला धान खरीद में पिछड़ता रहेगा।

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