महाराष्ट्र में नगर परिषद चुनावों में MVA की हार के बाद कांग्रेस नई रणनीति बना रही है। BMC चुनावों को देखते हुए पार्टी ने प्रकाश अंबेडकर की VBA के साथ संभावित गठबंधन पर बातचीत तेज कर दी है।
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों के बाद बड़ा सियासी हलचल देखने को मिल रही है। महा विकास अघाड़ी यानी MVA को इन चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार के बाद कांग्रेस अब नई रणनीति पर काम करती दिख रही है। सबसे अहम संकेत यह है कि कांग्रेस बृहन्मुंबई नगर निगम यानी BMC चुनावों को देखते हुए प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी VBA के साथ संभावित गठबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही है।
नगर परिषद चुनावों के नतीजों ने बदला राजनीतिक समीकरण
हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजे MVA के लिए निराशाजनक रहे। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने इन चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय जनता पार्टी BJP, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP ने अधिकांश नगर परिषदों पर कब्जा जमाया। इन नतीजों ने साफ कर दिया कि स्थानीय स्तर पर MVA का जनाधार कमजोर हुआ है।
राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार BJP ने नगर अध्यक्षों के 117 पद जीते। शिवसेना ने 53 और NCP ने 37 पदों पर जीत दर्ज की। इसके मुकाबले कांग्रेस को सिर्फ 28 पद मिले। उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT को 9 और शरद पवार की NCP SP को केवल 7 पदों से संतोष करना पड़ा। इन आंकड़ों ने कांग्रेस को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।
BMC चुनावों पर टिकी कांग्रेस की नजर
महाराष्ट्र की राजनीति में BMC चुनावों का खास महत्व है। देश की सबसे अमीर नगर पालिका मानी जाने वाली BMC पर लंबे समय से शिवसेना का दबदबा रहा है। अब 15 जनवरी को होने वाले BMC और 29 अन्य नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति तेज हो गई है। मतगणना 16 जनवरी को होगी।
नगर परिषद चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस जानती है कि अगर वह अकेले या कमजोर गठबंधन के साथ मैदान में उतरी, तो नुकसान और बढ़ सकता है। इसी वजह से कांग्रेस अब वैकल्पिक राजनीतिक साझेदारों की तलाश में है।
प्रकाश अंबेडकर से बढ़ी बातचीत
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और VBA के बीच पिछले 10 दिनों में चार अहम बैठकें हो चुकी हैं। रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने VBA प्रमुख प्रकाश अंबेडकर से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूबी वेंकटेश ने किया। बैठक में सचिन सावंत और असलम शेख भी शामिल रहे।

इस मुलाकात में BMC चुनावों के लिए संभावित गठबंधन, सीट शेयरिंग और साझा रणनीति पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि बातचीत सकारात्मक रही है और दोनों पक्षों में कई मुद्दों पर सहमति बनती दिख रही है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और VBA के गठबंधन की औपचारिक घोषणा हो सकती है।
कांग्रेस ने बनाई तीन सदस्यीय समिति
गठबंधन की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में अमीन पटेल, मधु चव्हाण और सचिन सावंत को शामिल किया गया है। यह समिति VBA के साथ समन्वय, सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति पर काम करेगी।
कांग्रेस का मानना है कि VBA के साथ गठबंधन करने से दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों में पार्टी की पकड़ मजबूत हो सकती है। खासकर मुंबई जैसे शहरी क्षेत्र में VBA का एक अलग वोट बेस माना जाता है, जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
MVA में दरार, सहयोगी दलों के बीच मतभेद
नगर परिषद चुनावों के बाद यह भी साफ हो गया है कि MVA के भीतर एकजुटता की कमी है। कांग्रेस, शिवसेना UBT और NCP SP BMC चुनावों के लिए अब तक एक साझा रणनीति नहीं बना पाए हैं।
शिवसेना UBT महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना MNS के साथ गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। हालांकि कांग्रेस इस विचार के खिलाफ है। कांग्रेस का मानना है कि MNS के साथ गठबंधन से उसका पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। इसी मतभेद के चलते कांग्रेस अब MVA से बाहर एक वैकल्पिक गठबंधन की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
VBA क्यों है कांग्रेस के लिए अहम विकल्प
प्रकाश अंबेडकर की VBA खुद को सामाजिक न्याय और बहुजन राजनीति की मजबूत आवाज के रूप में पेश करती रही है। दलित और वंचित समुदायों में VBA की मौजूदगी कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर कांग्रेस और VBA साथ आते हैं, तो यह गठबंधन मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में महायुति को कड़ी टक्कर दे सकता है। हालांकि यह भी सच है कि गठबंधन की सफलता सीट बंटवारे और जमीनी स्तर पर तालमेल पर निर्भर करेगी।











