नाइजीरिया में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: बोको हराम के कब्जे से 360 से अधिक बंधक मुक्त, मानवीय संकट पर फिर सवाल

नाइजीरिया के बोर्नो राज्य में बोको हराम के ठिकाने से 360 से अधिक बंधकों को रिहा किया गया है। सेना और स्थानीय समूह अलग-अलग दावा कर रहे हैं, जांच जारी है।

नाइजीरिया के उत्तर-पूर्व बोर्नो राज्य में बोको हराम के पहाड़ी ठिकाने से 360 से अधिक बंधकों को रिहा किया गया। सेना और स्थानीय समूह अलग-अलग दावा कर रहे हैं कि यह रिहाई किसकी कार्रवाई से हुई, जबकि पीड़ितों को उपचार दिया जा रहा है।

अबुजा: नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी बोर्नो राज्य में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान बोको हराम आतंकियों के कब्जे से कम से कम 360 लोगों को मुक्त कराया गया है। ये सभी लोग मार्च में एक मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय से अपहरण किए गए थे और उन्हें मंदरारा पर्वतीय इलाके में एक दूरस्थ ठिकाने पर रखा गया था।

यह रिहाई ऐसे समय में हुई है जब देश में सुरक्षा स्थिति और अपहरण की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।

रिहाई को लेकर अलग-अलग दावे

बंधकों की रिहाई को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। नाइजीरियाई सेना का कहना है कि यह एक खुफिया जानकारी आधारित, लंबे समय से योजनाबद्ध सैन्य अभियान का परिणाम था, जिसमें आतंकियों को आश्चर्यचकित कर दिया गया।

वहीं स्थानीय संगठन “बोर्नो साउथ यूथ इनिशिएटिव” का दावा है कि उसने आतंकियों से बातचीत कर बिना शर्त रिहाई सुनिश्चित कराई। संगठन ने कहा कि रिहा किए गए लोगों की संख्या 416 तक हो सकती है।

सैन्य अभियान और आतंकियों की पीछे हटने की स्थिति

सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल हरुना एम सानी के अनुसार यह अभियान रात के अंधेरे में शुरू किया गया, जिसमें सैनिकों ने पहाड़ी इलाके में स्थित आतंकियों के ठिकाने को घेर लिया।

सेना ने दावा किया कि तेज और सटीक कार्रवाई के कारण कई आतंकवादी अपने ठिकाने छोड़कर भाग गए, जबकि कुछ ने आत्मसमर्पण भी किया। इसे देश के उत्तर-पूर्व में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी रेस्क्यू कार्रवाइयों में से एक बताया जा रहा है।

कैदियों की हालत और मानवीय संकट

रिहा किए गए लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता और राहत शिविरों में भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय तक कैद और कठिन परिस्थितियों के कारण कई लोग कमजोर अवस्था में हैं।

नाइजीरियाई राष्ट्रपति के विशेष सलाहकार डैनियल बवाल ने बताया कि दुर्भाग्य से दो शिशुओं की मौत हो गई, जिनकी तबीयत लंबे समय तक कैद में रहने के कारण बिगड़ गई थी।

बोको हराम की पुरानी हिंसक रणनीति

बोको हराम ने 2009 में उत्तरी नाइजीरिया में इस्लामिक शासन लागू करने के लिए सशस्त्र संघर्ष शुरू किया था। इसके बाद से संगठन ने बड़े पैमाने पर अपहरण और हिंसा को अपनी रणनीति का हिस्सा बना लिया।

2014 में चिबोक गांव से 200 से अधिक स्कूली लड़कियों का अपहरण इस समूह की सबसे कुख्यात घटनाओं में से एक मानी जाती है, जिनमें से कई अब भी लापता हैं।

अपहरण और फिरौती का बढ़ता नेटवर्क

नाइजीरिया में हाल के वर्षों में अपहरण एक संगठित अपराध के रूप में उभरा है। विभिन्न सशस्त्र समूह, विद्रोही संगठन और आपराधिक गिरोह स्कूलों, धार्मिक स्थलों और दूरदराज के गांवों को निशाना बना रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि फिरौती की बढ़ती मांग और परिवारों की मजबूरी ने इस अपराध को और बढ़ावा दिया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ा है।

स्थानीय समूहों और सेना के बीच विवाद

बंधकों की रिहाई को लेकर सेना और स्थानीय संगठनों के बीच श्रेय को लेकर विवाद भी सामने आया है। स्थानीय संगठन का दावा है कि उसने बातचीत के जरिए रिहाई कराई, जबकि सेना इसे एक सफल सैन्य अभियान बता रही है।

इस विवाद ने इस मानवीय ऑपरेशन की पारदर्शिता और वास्तविक परिस्थितियों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीण इलाकों में दहशत और विस्थापन

बंधकों की रिहाई के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है। कई ग्रामीण अब भी अपने घरों को लौटने से डर रहे हैं, क्योंकि क्षेत्र में आतंकियों की गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

कुछ लोग सुरक्षा कारणों से पड़ोसी देश कैमरून में भी शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा चुनौतियां

नाइजीरिया की सेना को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से प्रशिक्षण और खुफिया सहायता मिल रही है, जिसमें अमेरिका की भूमिका भी शामिल है। इसके बावजूद देश में सुरक्षा चुनौतियां जटिल बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बोको हराम, अपहरण गिरोह और अलगाववादी हिंसा जैसी समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।

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