नाइजीरियाई लेखिका Chimamanda Ngozi Adichie ने अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप, बेटे की मौत की जांच में बाधा का दावा

नाइजीरियाई लेखिका चिमामांडा अदीची ने अपने बेटे की मौत के मामले में अस्पताल पर जांच रोकने और मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाया है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

नाइजीरियाई लेखिका चिमामांडा अदीची ने लागोस के अस्पताल पर अपने 21 महीने के बेटे की मौत की जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अस्पताल ने मेडिकल रिकॉर्ड छुपाए और लापरवाही की जांच रोकने की कोशिश की।

अबुजा: प्रसिद्ध नाइजीरियाई लेखिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित साहित्यकार Chimamanda Ngozi Adichie ने लागोस स्थित एक निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल उनके 21 महीने के बेटे की मौत से जुड़े मामले की जांच (कोरोनियल इन्क्वायरी) को बाधित कर रहा है और कानूनी प्रक्रिया में देरी तथा भ्रम पैदा कर रहा है।

यह मामला अब न केवल नाइजीरिया में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इसमें चिकित्सा लापरवाही, कानूनी जांच और एक विश्व-प्रसिद्ध लेखिका के व्यक्तिगत दुख की संवेदनशील कहानी शामिल है।

बेटे की मौत और जांच का मामला

चिमामांडा एनगोज़ी अदिची के बेटे का नाम न्कानु (Nknau) था, जिनका जन्म 2024 में सरोगेसी के माध्यम से हुए जुड़वां बच्चों में से एक था। रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी में उनकी तबीयत खराब होने पर उन्हें लागोस के यूराकेयर अस्पताल (Euracare Hospital) में भर्ती कराया गया था।

7 जनवरी को विभिन्न मेडिकल टेस्ट और प्रक्रियाओं के बाद बच्चे की मृत्यु हो गई। प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस बताया गया, हालांकि परिवार ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं।

परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट में लापरवाही हुई और अत्यधिक सेडेशन (बेहोश करने वाली दवाओं) के कारण कार्डियक अरेस्ट हुआ, जिससे बच्चे की मौत हुई।

अस्पताल पर लापरवाही और रिकॉर्ड छुपाने के आरोप

अदिची और उनके परिवार ने अस्पताल पर चिकित्सा लापरवाही (medical negligence) के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों की ओर से उचित ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया गया और बच्चे की स्थिति को सही ढंग से मॉनिटर नहीं किया गया।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया है कि अस्पताल ने मेडिकल रिकॉर्ड अधूरे और गलत तरीके से प्रस्तुत किए, जिसे उन्होंने “गैर-पेशेवर व्यवहार” बताया है।

अदिची का कहना है कि इन खामियों के कारण मामले की जांच प्रभावित हो रही है और सच्चाई सामने आने में बाधा उत्पन्न की जा रही है।

कानूनी जांच और अदालत में मामला

इस घटना की जांच के लिए एक कोरोनियल इन्क्वायरी अप्रैल में शुरू होनी थी, लेकिन लेखिका का आरोप है कि अस्पताल ने इस प्रक्रिया को बार-बार रोकने और विलंबित करने की कोशिश की।

उन्होंने यह भी कहा है कि अब अस्पताल ने इस जांच को रोकने के लिए नाइजीरिया की संघीय उच्च न्यायालय (Federal High Court) में याचिका दायर की है।

इस मामले में पहले ही नाइजीरिया के मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल (Medical and Dental Council of Nigeria) द्वारा गठित एक जांच पैनल ने संभावित चिकित्सा लापरवाही के संकेत पाए थे, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

अदिची का सार्वजनिक बयान और भावनात्मक पीड़ा

चिमामांडा एनगोज़ी अदिची ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा किया, जिसे उन्होंने पहले अस्पताल के निदेशक को भेजा था। यह उनका बेटे की मृत्यु के बाद पहला सार्वजनिक बयान था।

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि वे अपने दुख को समझने और शांतिपूर्वक शोक मनाने के लिए समय चाहती हैं, लेकिन अस्पताल के रवैये ने उन्हें मानसिक रूप से और अधिक परेशान किया है।

उन्होंने भावनात्मक रूप से लिखा:

“सच्चाई की खोज के बजाय अस्पताल ने देरी, भ्रम और बाधाएं पैदा की हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि केवल वही व्यक्ति अपने दुख की गहराई को समझ सकता है जिसने उसे महसूस किया हो, और यह अनुभव बेहद अकेला और दर्दनाक होता है।

मौत के कारण पर विवाद

अस्पताल ने प्रारंभिक रूप से कहा था कि बच्चे की मौत बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस के कारण हुई। हालांकि, अदिची ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मृत्यु प्रमाणपत्र में इस तरह के निष्कर्ष का कोई ठोस चिकित्सीय आधार नहीं दिया गया है।

उनका आरोप है कि अस्पताल द्वारा दिए गए निष्कर्ष अस्पष्ट और अपूर्ण जानकारी पर आधारित हैं, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

अस्पताल का पक्ष

यूराकेयर अस्पताल ने इस मामले पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि वे परिवार के दुख में शामिल हैं। हालांकि, अस्पताल ने सभी प्रकार के गलत कामों या लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है।

अस्पताल का कहना है कि इलाज अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा मानकों के अनुसार किया गया था और सभी प्रक्रियाएं सही ढंग से पूरी की गई थीं।

इस बयान के बावजूद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और कानूनी लड़ाई की स्थिति बन गई है।

चिकित्सा रिकॉर्ड और जांच में बाधा के आरोप

अदिची के कानूनी दल द्वारा अदालत में दिए गए दस्तावेजों के अनुसार, बच्चे को पहले एक अन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बाद में अमेरिका के बाल्टीमोर स्थित जॉन्स हॉपकिन्स अस्पताल में उपचार के लिए स्थानांतरित करने की योजना थी।

हालांकि, प्री-फ्लाइट मेडिकल जांच के लिए उसे यूराकेयर अस्पताल भेजा गया, जहां एमआरआई और स्पाइनल टैप जैसे परीक्षण किए गए। इसके बाद ही उसकी स्थिति बिगड़ती गई और उसकी मृत्यु हो गई।

परिवार का कहना है कि इन प्रक्रियाओं के दौरान उचित देखभाल नहीं की गई।

वैश्विक साहित्यिक समुदाय की प्रतिक्रिया

Chimamanda Ngozi Adichie को दुनिया भर में उनकी प्रसिद्ध किताबों जैसे Half of a Yellow Sun और Americanah के लिए जाना जाता है। वे साहित्य और मानवाधिकार विषयों पर अपनी मजबूत आवाज़ के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रही हैं।

उनके बेटे की मौत और उसके बाद उठे कानूनी विवाद ने वैश्विक साहित्यिक समुदाय और मानवाधिकार संगठनों का ध्यान भी आकर्षित किया है।

कई लोग इस मामले को स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता के बड़े सवाल से जोड़कर देख रहे हैं।

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