नाइजर की राजधानी नियामे में स्थित एयरपोर्ट के पास गुरुवार सुबह अचानक गोलीबारी और धमाकों की आवाजों से अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 6 बजे उस समय शुरू हुई जब मस्जिद में नमाज चल रही थी। एयरपोर्ट के प्रवेश द्वार के पास शुरू हुई यह फायरिंग करीब दो घंटे तक चलती रही, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस दौरान लगातार विस्फोटों की आवाजें भी सुनाई दीं, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
नियामे: पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर की राजधानी निआमे (Niamey) के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास गुरुवार सुबह अचानक गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनाई देने से हड़कंप मच गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह घटना सुबह लगभग 6 बजे के आसपास शुरू हुई जब लोग मस्जिद में थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लगातार लगभग दो घंटे तक गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें आती रहीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। घटना एयरपोर्ट के प्रवेश द्वार के पास हुई बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों और BBC रिपोर्ट में पुष्टि
BBC से बात करते हुए एक स्थानीय निवासी ने बताया कि उन्होंने पहली गोली सुबह 6 बजे सुनी और शुरुआती कुछ घंटों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी। हालांकि बाद में सुरक्षा बलों ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने AFP समाचार एजेंसी को बताया कि गोलीबारी एयरपोर्ट के मुख्य गेट के पास हुई और यह करीब दो घंटे तक चलती रही। घटना के बाद सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई।
सेना की कार्रवाई और हमलावरों का पीछे हटना
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नाइजर की सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलावरों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। बताया जा रहा है कि हमलावर घटनास्थल पर अपने हथियार छोड़कर भाग निकले और सुरक्षा बल अब उनकी तलाश कर रहे हैं।
हालांकि, अब तक न तो सरकार की ओर से इस घटना पर आधिकारिक बयान जारी किया गया है और न ही किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली है।
जिहादी हिंसा से जूझ रहा नाइजर
नाइजर पिछले एक दशक से इस्लामिक चरमपंथी संगठनों के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। देश के कई हिस्सों में जिहादी हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। नाइजर, अपने पड़ोसी देश बुर्किना फासो और माली की तरह, एक सैन्य सरकार (military junta) द्वारा शासित है, जिसने सत्ता इस आधार पर संभाली थी कि पूर्व सरकारें सुरक्षा स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, साहेल क्षेत्र (Sahel region) लंबे समय से आतंकवाद और अस्थिरता का केंद्र बना हुआ है, जहां इस्लामिक स्टेट से जुड़े गुट और अल-कायदा से जुड़े संगठन सक्रिय हैं।
![]()
जनवरी में भी हुआ था एयरपोर्ट पर हमला
यह पहली बार नहीं है जब निआमे एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया हो। जनवरी में भी इसी स्थान पर संदिग्ध जिहादी समूहों द्वारा हमला किया गया था। उस समय नाइजर के रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि हमले में 20 हमलावर मारे गए थे और चार सैन्यकर्मी घायल हुए थे।
उस घटना के बाद नाइजर की सैन्य सरकार ने रूस को मदद के लिए धन्यवाद दिया था और फ्रांस, बेनिन और आइवरी कोस्ट पर आरोप लगाए थे कि वे हमले के पीछे मौजूद ताकतों का समर्थन कर रहे हैं।
सुरक्षा स्थिति पर बढ़ती चिंता
ताजा हमले ने एक बार फिर नाइजर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और रणनीतिक स्थान पर हुई गोलीबारी यह दर्शाती है कि देश में सुरक्षा खतरा अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे हमले यह संकेत देते हैं कि चरमपंथी समूह अभी भी सक्रिय हैं और उन्हें पूरी तरह नियंत्रित करना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।
सैन्य सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
नाइजर में 2023 में सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता सेना के हाथों में आ गई थी। इसके बाद देश की विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। फ्रांस जैसे पारंपरिक सहयोगियों से दूरी बढ़ी है, जबकि रूस के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के संकेत मिले हैं। हालांकि, इन बदलावों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुरक्षा स्थिति में सुधार पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है।
स्थानीय नागरिकों में दहशत का माहौल
निआमे एयरपोर्ट के आसपास रहने वाले लोगों में इस घटना के बाद डर और असुरक्षा का माहौल है। कई लोगों ने कहा कि लगातार हिंसा और हमलों की वजह से सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है और लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सुबह की इस घटना ने लोगों को एक बार फिर 2010 के बाद से चल रहे सुरक्षा संकट की याद दिला दी, जिसमें देश लगातार आतंकवाद और विद्रोही गतिविधियों से जूझ रहा है।
जांच और आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल नाइजर की सेना और सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की तलाश में जुटी हुई हैं। क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
सरकार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि हमले के पीछे कौन सा समूह जिम्मेदार है और इसका उद्देश्य क्या था।








