NASA ने Voyager 2 की Power-Saving Upgrade की, इंटरस्टेलर मिशन कम से कम एक साल और बढ़ा

NASA ने Voyager 2 में Power-Saving Upgrade सफलतापूर्वक लागू किया। इससे तीन Science Instruments कम से कम एक साल और काम करेंगे और इंटरस्टेलर डेटा भेजेंगे।

NASA इंजीनियरों ने Voyager 2 में नया Power-Saving Upgrade सफलतापूर्वक लागू किया है। इससे करीब पांच दशक पुराने अंतरिक्ष यान के तीन वैज्ञानिक उपकरण कम से कम एक और साल काम करते रहेंगे और इंटरस्टेलर स्पेस से डेटा भेजेंगे।

अमेरिका: NASA ने करीब 49 साल पुराने Voyager 2 की ऊर्जा बचाने वाली नई तकनीकी व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की है। ‘Big Bang’ नाम के इस Power-Saving Upgrade के बाद अंतरिक्ष यान के बचे हुए तीन Science Instruments कम से कम एक साल और सक्रिय रह सकेंगे। Voyager 2 फिलहाल पृथ्वी से करीब 21.35 अरब किलोमीटर दूर इंटरस्टेलर स्पेस में वैज्ञानिक आंकड़े जुटा रहा है।

‘Big Bang’ Upgrade से बचाई गई Voyager 2 की ऊर्जा

Voyager 2 को 20 अगस्त 1977 को लॉन्च किया गया था। शुरुआत में इसका मिशन केवल कुछ वर्षों के लिए निर्धारित था, लेकिन यह अंतरिक्ष यान करीब पांच दशक बाद भी काम कर रहा है। फिलहाल यह पृथ्वी से लगभग 21.35 अरब किलोमीटर दूर है और इंटरस्टेलर स्पेस से वैज्ञानिक डेटा भेज रहा है।

Voyager 2 की ऊर्जा Radioisotope Thermoelectric Generators यानी RTGs से आती है। ये सिस्टम प्लूटोनियम के रेडियोधर्मी क्षय से पैदा होने वाली गर्मी को बिजली में बदलते हैं। हालांकि, समय के साथ इनकी ऊर्जा उत्पादन क्षमता घटती जाती है। हर साल करीब 4 वॉट बिजली कम होने के कारण NASA को लगातार उपकरणों और सिस्टम की बिजली खपत घटानी पड़ रही है।

इसी चुनौती से निपटने के लिए NASA के Jet Propulsion Laboratory के इंजीनियरों ने ‘Big Bang’ Power-Saving Fix तैयार किया।

हीटर और टेप रिकॉर्डर की सेटिंग बदली

नई व्यवस्था में Voyager 2 के दो ऐसे हीटर बंद किए गए, जिन्हें लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके साथ एक Digital Tape Recorder को भी बंद किया गया, जो मुख्य रूप से गर्मी पैदा करने के लिए रखा गया था।

इसके बदले दो दूसरे हीटर और एक अन्य डिवाइस को सक्रिय किया गया। ये कम बिजली खर्च करते हुए अंतरिक्ष यान के जरूरी हिस्सों को पर्याप्त गर्म रखने में सक्षम हैं।

इंजीनियरों ने मई और जून में इस बदलाव से जुड़े परीक्षण किए। इसके बाद 9 जुलाई को Voyager 2 को अंतिम कमांड भेजी गई। पृथ्वी और Voyager 2 के बीच विशाल दूरी के कारण एक कमांड को अंतरिक्ष यान तक पहुंचने में करीब 20 घंटे लगते हैं। इसके बाद कमांड के सफलतापूर्वक लागू होने की पुष्टि में भी लगभग 20 घंटे लगते हैं।

तीन Science Instruments कम से कम एक साल और चलेंगे

NASA के मुताबिक, इस Power-Saving Upgrade से Voyager 2 के तीन बचे हुए वैज्ञानिक उपकरण कम से कम एक अतिरिक्त वर्ष तक काम कर सकेंगे। इससे इंटरस्टेलर स्पेस से मिलने वाला महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा जारी रहेगा।

NASA ने Voyager 2 के ऑनबोर्ड सॉफ्टवेयर में भी बदलाव किया है। यदि किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण यान Safe Mode में चला जाता है, तो नई कम बिजली वाली व्यवस्था अपने आप सक्रिय बनी रहेगी। इससे अनावश्यक ऊर्जा खर्च होने की संभावना कम होगी।

Voyager 2 की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इंटरस्टेलर स्पेस के इस क्षेत्र का अध्ययन करने वाला कोई दूसरा सक्रिय अंतरिक्ष यान फिलहाल वहां मौजूद नहीं है।

अब Voyager 1 पर लागू होगा ऐसा ही Upgrade

Voyager 2 के सफल Upgrade के बाद NASA अब Voyager 1 पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। Voyager 1 फिलहाल पृथ्वी से करीब 25.4 अरब किलोमीटर दूर है और अपने जुड़वां यान से भी अधिक दूर स्थित है।

इंजीनियरों ने Voyager 1 पर शुरुआती Power Test पूरा कर लिया है। इस महीने के अंत में Thermal Test किया जाना है। परीक्षण सफल रहने पर Voyager 1 का मिशन भी आगे बढ़ सकता है।

इसके अलावा पर्याप्त बिजली उपलब्ध होने पर उसके Low-energy Charged Particles Experiment को दोबारा सक्रिय करने की संभावना है। यह उपकरण हेलियोस्फीयर के बाहर चार्ज्ड पार्टिकल्स और कॉस्मिक रे का अध्ययन कर चुका है और सौरमंडल तथा इंटरस्टेलर स्पेस के बीच की सीमा को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करता रहा है।

दोनों Voyager यान अब अपनी मूल योजना से कई दशक आगे काम कर रहे हैं। NASA के नए Power-Saving उपाय इन ऐतिहासिक मिशनों को तब तक जारी रखने की कोशिश हैं, जब तक उनके ऊर्जा स्रोत वैज्ञानिक उपकरणों को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली देते रहेंगे।

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