CBI ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि लीक प्रश्नपत्र राजस्थान के सीकर तक पहुंचा और करीब 1000 छात्रों तक फैलाया गया। मामले में कई राज्यों में पूछताछ और छापेमारी जारी है।
जयपुर/गुरुग्रप/पुणे: भारत की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ के बाद अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र राजस्थान समेत कई राज्यों में फैलाया गया था और यह करीब 1000 उम्मीदवारों तक पहुंच चुका था।
यह मामला केवल परीक्षा अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली, लाखों छात्रों के भविष्य और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
CBI की कार्रवाई: 24 घंटे पूछताछ के बाद गिरफ्तारियां
CBI ने 14 संदिग्धों से लंबी पूछताछ के बाद पांच लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत ने ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है और अब उन्हें आगे की जांच के लिए दिल्ली ले जाया जाएगा।
- गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
- मांगी लाल बिंवाल – सीकर, राजस्थान
- दिनेश बिंवाल – जमवारामगढ़, राजस्थान
- विकास बिंवाल – राजस्थान
- यश यादव – गुरुग्राम, हरियाणा
- शुभम खैरनार – नासिक, महाराष्ट्र
जांच एजेंसी के अनुसार शुभम खैरनार ने कथित तौर पर यश यादव को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था।
इसके अलावा कई अन्य लोगों से पूछताछ की गई, जिनमें कोचिंग संचालक, स्टाफ और कथित मध्यस्थ शामिल थे। पूछताछ के बाद कुछ लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि कई संदिग्ध अब भी जांच के दायरे में हैं।
पुणे की ब्यूटीशियन भी जांच के घेरे में
महाराष्ट्र के पुणे से एक ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे और अहिल्यानगर के धनंजय लोखंडे को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक मनीषा वाघमारे के 21 बैंक खातों में लगभग 10 लाख रुपये जमा किए गए थे। अधिकारियों को शक है कि ये रकम कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।
CBI अब बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
राजस्थान बना जांच का प्रमुख केंद्र
राजस्थान, विशेष रूप से सीकर जिला, इस मामले में जांच का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का दावा है कि लीक प्रश्नपत्र करीब 1000 छात्रों तक पहुंचाया गया था।
सूत्रों के अनुसार, हर छात्र से 2 लाख से 5 लाख रुपये तक वसूले गए थे। आरोप है कि पेपर छात्रों तक पहुंचाने के लिए संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।
सीकर लंबे समय से भारत के प्रमुख कोचिंग हब्स में गिना जाता है, जहां मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए देशभर से छात्र आते हैं।

कैसे फैलाया गया कथित प्रश्नपत्र?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी को पहले हाथ से लिखा गया और फिर स्कैन कर PDF फॉर्मेट में बदला गया।
सूत्रों का दावा है कि विकास बिंवाल के पिता दिनेश बिंवाल ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की कॉपी स्कैन कर डिजिटल रूप में तैयार की। इसके बाद यह सामग्री अलग-अलग माध्यमों से छात्रों तक पहुंचाई गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि हाथ से लिखे गए “गेस पेपर” और असली प्रश्नपत्र में कई सवाल हूबहू मेल खाते थे।
पुलिस के अनुसार:
- 300 से अधिक सवाल हाथ से लिखे गए थे
- उनमें से लगभग 150 सवाल वास्तविक परीक्षा में आए
इन दस्तावेजों की हैंडराइटिंग भी एक जैसी बताई जा रही है, जिससे जांच एजेंसियों को संगठित गतिविधि का संदेह मजबूत हुआ है।
NEET 2026 परीक्षा रद्द, दोबारा होगी परीक्षा
बढ़ते विवाद के बीच National Testing Agency (NTA) ने 12 मई को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।
इसके साथ ही:
- CBI को जांच सौंपी गई
- नई FIR दर्ज की गई
- दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई
यह फैसला लाखों छात्रों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि कई उम्मीदवार महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा में शामिल हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर परीक्षा को अदालत की निगरानी में दोबारा कराने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि परीक्षा संचालन एजेंसी NTA की विश्वसनीयता पर सवाल उठ चुके हैं और निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक निगरानी जरूरी है।
भारत में NEET केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के मेडिकल करियर का आधार मानी जाती है। इसलिए परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है।
NEET क्यों है इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा?
National Eligibility cum Entrance Test (NEET) भारत की राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा है।
- इसके माध्यम से देशभर के:
- सरकारी मेडिकल कॉलेज
- निजी मेडिकल कॉलेज
- डेंटल संस्थान
- आयुष और नर्सिंग संस्थानों
- में प्रवेश दिया जाता है।
इस परीक्षा के जरिए AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी दाखिला मिलता है।
भारत में वर्तमान में:
- 1 लाख से अधिक MBBS सीटें
- 27 हजार से अधिक BDS सीटें उपलब्ध हैं।
ऐसे में परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
2024 में भी हुआ था बड़ा विवाद
NEET परीक्षा पहली बार विवादों में नहीं आई है। 2024 में भी पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे।
उस समय:
- बिहार और झारखंड में जांच हुई
- कई गिरफ्तारियां हुईं
- कुछ परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा दोबारा कराई गई
- हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था।
उस विवाद में 67 छात्रों के 720/720 अंक आने और एक ही केंद्र से कई टॉपर्स निकलने पर भी सवाल उठे थे।
सुधार के लिए बनी थी हाई लेवल कमेटी
2024 विवाद के बाद केंद्र सरकार ने पूर्व ISRO प्रमुख के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई थी। इस समिति ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे।
मुख्य सिफारिशें थीं:
- परीक्षा केंद्रों और स्टाफ की आउटसोर्सिंग कम की जाए
- अधिक परीक्षाएं ऑनलाइन मोड में कराई जाएं
- हाइब्रिड परीक्षा मॉडल लागू किया जाए
- डिजिटल सुरक्षा और निगरानी मजबूत की जाए
हालांकि 2026 में फिर सामने आए इस विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सुझाए गए सुधार पर्याप्त रूप से लागू किए गए थे।
भारत की परीक्षा प्रणाली पर बढ़ते सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक मामलों ने भारत की प्रतिस्पर्धी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है।
हर साल करोड़ों छात्र विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में सुरक्षा चूक न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा भी कमजोर करती है।
अब सभी की नजर CBI जांच, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हुई है।











