NITI Aayog Report: भारत को 2047 तक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए चाहिए केंद्रित रणनीति, चार प्रमुख क्षेत्रों पर जोर

NITI Aayog Report में भारत को 2047 तक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए केंद्रित रणनीति अपनाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में चार प्रमुख क्षेत्रों को

नीति आयोग ने कहा है कि वर्ष 2047 तक भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य के लिए एक केंद्रित और दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी। इस रणनीति में उत्पादन का पैमाना बढ़ाने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से गहराई से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

NITI Aayog: भारत को वर्ष 2047 तक दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में स्थापित करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। नीति आयोग का मानना है कि देश को पैमाने, लागत प्रतिस्पर्धा, नवाचार, कौशल विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ गहरे जुड़ाव पर आधारित एक स्पष्ट और दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी। आयोग ने रसायन, वस्त्र, दूरसंचार एवं नेटवर्क उपकरण और सौर पीवी विनिर्माण को भारत की औद्योगिक प्रगति के लिए चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है।

नीति आयोग ने 13 अगस्त 2026 को ‘भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रमुख क्षेत्र’ विषय पर अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इस समय अपनी आर्थिक और औद्योगिक विकास यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। मजबूत विनिर्माण आधार न केवल निवेश और निर्यात बढ़ा सकता है, बल्कि बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार और तकनीकी क्षमताओं का भी विस्तार कर सकता है।

2047 के लक्ष्य के लिए विनिर्माण पर विशेष फोकस

भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का व्यापक लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नीति आयोग के अनुसार, दुनिया की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का अनुभव बताता है कि लंबे समय तक आर्थिक बदलाव और औद्योगिक विकास के लिए मजबूत तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार जरूरी होता है।

विनिर्माण का प्रभाव केवल कारखानों और औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहता। यह निवेश आकर्षित करता है, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देता है तथा निर्यात क्षमता को मजबूत करता है। इसके अलावा, उत्पादन से जुड़े परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सेवाओं और छोटे-मध्यम उद्योगों को भी लाभ मिलता है।रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत को केवल असेंबली आधारित उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय देश को डिजाइन, तकनीक, कंपोनेंट्स, अनुसंधान और उच्च मूल्य वाले उत्पादन सहित पूरी मूल्य श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी।

ये चार क्षेत्र बन सकते हैं भारत की विनिर्माण रणनीति की रीढ़

नीति आयोग ने चार क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता देने की वकालत की है—रसायन, वस्त्र, दूरसंचार एवं नेटवर्क उपकरण और सौर फोटोवोल्टिक (Solar PV) विनिर्माण।

रसायन उद्योग में बढ़ानी होगी घरेलू क्षमता

रसायन उद्योग भारत की कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए बुनियादी इनपुट उपलब्ध कराता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में घरेलू फीडस्टॉक की उपलब्धता मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर विकसित करने और डाउनस्ट्रीम उत्पादों में अधिक मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने की जरूरत है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू औद्योगिक श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

वस्त्र क्षेत्र में रोजगार और निर्यात की बड़ी संभावना

भारत का वस्त्र उद्योग लंबे समय से रोजगार और निर्यात का प्रमुख स्रोत रहा है। नीति आयोग की रणनीति में इस क्षेत्र को इसलिए अहम माना गया है क्योंकि यह श्रम-प्रधान होने के साथ वैश्विक बाजारों में भारत की भागीदारी बढ़ाने की क्षमता रखता है। आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन, गुणवत्ता, तेज आपूर्ति श्रृंखला और बड़े उत्पादन केंद्रों के जरिए भारत वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

दूरसंचार और नेटवर्क उपकरणों में तकनीकी आत्मनिर्भरता पर जोर

डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ दूरसंचार उपकरण और नेटवर्क तकनीक रणनीतिक महत्व हासिल कर चुके हैं। भारत के लिए इस क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण बढ़ाना केवल व्यावसायिक अवसर नहीं, बल्कि तकनीकी क्षमता और आपूर्ति सुरक्षा से भी जुड़ा है। रिपोर्ट में घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ उन्नत तकनीक, अनुसंधान एवं विकास और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ बेहतर एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

सौर पीवी विनिर्माण से ऊर्जा और उद्योग दोनों को मजबूती

स्वच्छ ऊर्जा की वैश्विक मांग बढ़ने के बीच सौर पीवी विनिर्माण भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर है। घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका भी बढ़ सकती है। हालांकि, इसके लिए केवल सोलर मॉड्यूल असेंबल करने से आगे बढ़कर पूरी उत्पादन श्रृंखला में क्षमता विकसित करना जरूरी होगा।

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