गयाजी में एक दर्दनाक हादसे में 6 साल के मासूम बच्चे की पानी में डूबने से मौत हो गई। बच्चा खेलते-खेलते गांव के पास स्थित आहर के नजदीक पहुंच गया था। इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह आहर के गहरे पानी में चला गया। हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई और बच्चे को पानी से निकालने के लिए तलाश शुरू की गई।
बताया जा रहा है कि बच्चा घर के आसपास अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते वह आहर की तरफ पहुंच गया। बारिश के मौसम में आहर में पानी अधिक होने के कारण किनारे का हिस्सा भी फिसलन भरा था। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से बच्चा पानी में गिर गया।
बच्चे के पानी में गिरने की जानकारी मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे। लोगों ने आहर में उतरकर बच्चे की तलाश शुरू की। आसपास मौजूद लोगों ने भी बचाव में मदद की। काफी प्रयास के बाद बच्चे को पानी से बाहर निकाला गया।
बच्चे को बाहर निकालने के बाद परिजन उसे लेकर इलाज के लिए पहुंचे, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।
हादसे के बाद गांव में भी मातम का माहौल है। जिस बच्चे को कुछ देर पहले तक खेलते हुए देखा जा रहा था, उसकी अचानक मौत से ग्रामीणों को गहरा सदमा लगा है। परिजन इस घटना से पूरी तरह टूट गए हैं।
बारिश के मौसम में ग्रामीण इलाकों के आहर, पोखर, तालाब और दूसरे जलस्रोतों में पानी का स्तर अचानक बढ़ जाता है। कई जगह इनके किनारे फिसलन भरे हो जाते हैं। छोटे बच्चों के लिए ऐसे स्थान बेहद खतरनाक हो सकते हैं, खासकर जब वे खेलते हुए अकेले या बिना निगरानी के जलस्रोत के पास पहुंच जाते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण इलाकों में कई आहर और तालाब आबादी के आसपास ही स्थित होते हैं। बच्चे अक्सर खेलते-खेलते इन जलस्रोतों के पास पहुंच जाते हैं। ऐसे में बारिश के दिनों में अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखने की जरूरत होती है।
परिजनों के लिए यह हादसा बेहद अचानक हुआ। बच्चे के आहर के पास पहुंचने और पानी में गिरने के बीच इतना कम समय था कि परिवार को संभलने का मौका भी नहीं मिला। हादसे के बाद बच्चे को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन गहरे पानी के कारण स्थिति गंभीर हो गई।
ग्रामीणों के मुताबिक आहर के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की स्थिति में ऐसे हादसों का खतरा बना रहता है। जलस्रोतों के किनारे चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या अन्य सुरक्षा उपाय बच्चों को दुर्घटना से बचाने में मदद कर सकते हैं।
मासूम की मौत के बाद गांव के लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को बारिश के मौसम में आहर, तालाब और अन्य जलस्रोतों के पास जाने से रोकना जरूरी है। छोटे बच्चों को पानी के आसपास अकेला छोड़ना भी जोखिम भरा हो सकता है।
हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर घटना की जानकारी जुटाई गई। पुलिस की ओर से मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी घटनाओं में हादसे की परिस्थितियों और बच्चे के पानी में गिरने की स्थिति की जानकारी भी जुटाई जाती है।
गयाजी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान कई जलस्रोतों में पानी का स्तर बढ़ जाता है। सामान्य दिनों में जिन स्थानों को बच्चे सुरक्षित समझकर उनके आसपास खेलते हैं, बारिश के बाद वहां गहराई और फिसलन बढ़ सकती है। इसलिए स्थानीय लोगों के लिए भी ऐसे स्थानों को लेकर सतर्क रहना जरूरी है।
छह साल की उम्र में बच्चे खतरे का सही अनुमान नहीं लगा पाते। पानी की गहराई, फिसलन या तेज बहाव जैसी परिस्थितियों को वे समझ नहीं पाते। ऐसे में अभिभावकों की निगरानी उनकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हो जाती है।
इस घटना के बाद परिवार के घर में मातम छा गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की मौत ने परिवार की खुशियां छीन लीं। ग्रामीण भी इस घटना को लेकर दुखी हैं और बच्चे के परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
कुल मिलाकर, गयाजी में खेलते-खेलते आहर के पास पहुंचे 6 साल के मासूम की पैर फिसलने के बाद गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई। बच्चे को बचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल प्रयास किया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। हादसे के बाद परिवार में मातम और गांव में शोक का माहौल है। बारिश के मौसम में आहर और अन्य जलस्रोतों के आसपास बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।











