दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने ACP विवेक भगत पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। FIR की मांग को लेकर पत्रकारों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन किया। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से मामले पर जवाब मांगा है।
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर बदसलूकी का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के दौरान ACP विवेक भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा और उन्हें धक्का देकर मौके से चले गए। मामले में FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन किया। महिला पत्रकार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस की ओर से इस आरोप पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने तक इसे आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
FIR दर्ज कराने के लिए घंटों इंतजार का दावा
रात करीब 11 बजे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने महिला पत्रकार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में महिला पत्रकार ने दावा किया कि वह करीब साढ़े 3 घंटे से थाने के बाहर मौजूद हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है।
महिला पत्रकार के इस दावे के बाद बड़ी संख्या में पत्रकार पार्लियामेंट्री स्ट्रीट थाने के बाहर जुट गए। प्रदर्शनकारियों ने कथित बदसलूकी के मामले में FIR दर्ज करने और कार्रवाई की मांग की।
मामले में पुलिस की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, शिकायत पर कानूनी कार्रवाई से पहले पुलिस की ओर से CCTV फुटेज की जांच किए जाने की बात सामने आई है।
CJP ने पुलिस पर लगाया FIR से इनकार का आरोप
CJP ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत में FIR दर्ज करने से इनकार किया है। पार्टी के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज करने से पहले घटनास्थल के CCTV फुटेज की जांच की जाएगी।
CJP ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस गंभीर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय संबंधित ACP को बचाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने लोगों से रविवार सुबह 11 बजे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर पहुंचने की अपील भी की।
यह पूरा मामला अभी आरोप, शिकायत और पुलिस की जांच के स्तर पर है। इसलिए घटना के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
राहुल गांधी ने गृह मंत्री से मांगा जवाब
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि दिल्ली की महिलाएं और छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और सत्याग्रह कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए गृह मंत्री अमित शाह को इस मामले पर जवाब देना चाहिए।
राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दिल्ली में चुनाव आयोग और SIR को लेकर प्रदर्शन जारी हैं और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।
लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी पहुंचे। प्रदर्शन में AISA सहित छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने पटेल चौक से जंतर-मंतर की ओर मार्च किया। उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री बलों की ओर से बैरिकेड लगाए गए थे। इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए गए थे।

पुलिस कार्रवाई के दौरान करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है।
पहले भी करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था
इससे पहले शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के दौरान करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में इनमें से कई लोगों को छोड़ दिया गया।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर कम से कम तीन FIR दर्ज की थीं। इनमें दो FIR पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने और एक FIR कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई।
इन मामलों में आदेश की अवहेलना, सरकारी काम में बाधा और सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
नई दिल्ली जिले में निषेधाज्ञा लागू थी
प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। इसके तहत बिना लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन और धरने पर रोक थी।
इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग और अतिरिक्त बल की तैनाती के जरिए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश की।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठे सवाल
दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े विवाद से भी जुड़ी है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कहा था कि कुछ फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से संबंधित आदेशों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हुआ।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने इन आरोपों और आपत्तियों को लेकर कहा है कि किसी भी संस्था में निर्णय लेने की प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य बात है।
आयोग के मुताबिक, उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी आधार हासिल है और इन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किया गया है।
इस तरह चुनाव आयोग ने अपने फैसलों की वैधानिकता पर उठ रहे सवालों को खारिज किया है। वहीं, विपक्षी दल SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
महिला पत्रकार के आरोप की जांच अहम
महिला पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोप ने चल रहे राजनीतिक और चुनावी विवाद के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर एक नया सवाल खड़ा किया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल, महिला पत्रकार के आरोप, FIR को लेकर किए गए दावे और पुलिस की ओर से CCTV जांच की बात सामने आई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्ष और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बीच यह मामला दिल्ली में कानून-व्यवस्था, पत्रकारों की सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर भी बहस को बढ़ा सकता है।












