कर्नाटक सूखे पर खरगे ने PM मोदी को लिखा पत्र, ₹3,705 करोड़ की केंद्रीय मदद की मांग

कर्नाटक में गंभीर सूखे के बीच मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी को पत्र लिखकर ₹3,705.30 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी करने की मांग की है। राज्य में लाखों किसान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कर्नाटक में गंभीर सूखे की स्थिति का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जल्द जारी करने की अपील की है।

Mallikarjun Kharge Letter to PM Modi: कर्नाटक में गंभीर सूखे की स्थिति को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। खरगे ने केंद्र से कर्नाटक के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की सूखा राहत सहायता जारी करने का आग्रह किया है। राज्य में कमजोर मानसून के कारण कृषि, पेयजल, पशुधन और बिजली उत्पादन से जुड़ी चिंताएं बढ़ी हैं।

कर्नाटक में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश में भारी कमी दर्ज की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 2026 का मानसून राज्य के लिए 1971 के बाद सबसे कमजोर रहा और बारिश सामान्य से लगभग 35 फीसदी कम रही। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अक्टूबर और नवंबर में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है।

पीएम मोदी को पत्र में क्या बोले खरगे?

मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कर्नाटक की मौजूदा स्थिति को गंभीर बताते हुए केंद्र से जल्द राहत देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे का असर बड़े क्षेत्र में दिखाई दे रहा है और प्रभावित किसानों तथा ग्रामीण आबादी के लिए समय पर वित्तीय सहायता जरूरी है। खरगे के अनुसार, राज्य सरकार ने केंद्र से 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की है। 

इससे पहले कर्नाटक सरकार ने 10 सितंबर को केंद्र को 2026 के खरीफ सूखा ज्ञापन के तहत यह सहायता मांगी थी। शुरुआती तौर पर 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था। बाद में स्थिति बिगड़ने के साथ प्रभावित तालुकों की संख्या बढ़ी।

बारिश की कमी से बढ़ी मुश्किलें

कर्नाटक में कम बारिश का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। कमजोर मानसून ने जलाशयों, भूजल स्तर, पेयजल उपलब्धता और बिजली उत्पादन पर भी दबाव बढ़ाया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी सितंबर में प्रधानमंत्री मोदी से केंद्रीय सहायता जल्द जारी करने का अनुरोध किया था। उन्होंने केंद्र से मांगी गई राशि का 50 फीसदी हिस्सा अंतरिम सहायता के तौर पर जारी करने और केंद्रीय आपदा राहत कोष की राशि अग्रिम रूप से उपलब्ध कराने की मांग की थी।

राज्य सरकार का कहना है कि कम बारिश के कारण फसल नुकसान, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता और पेयजल आपूर्ति जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कावेरी बेसिन में जलाशयों का कम जलस्तर आने वाले महीनों में बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।

खरगे ने रखी राहत प्रक्रिया तेज करने की मांग

खरगे ने केंद्र से प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी आकलन कराने के लिए केंद्रीय टीम भेजने की अपील की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि राहत राशि तय करते समय किसानों और प्रभावित क्षेत्रों के मौजूदा आंकड़ों को ध्यान में रखा जाए। कर्नाटक सरकार की ओर से पहले ही केंद्रीय टीम भेजने की मांग की जा चुकी है। केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम को 3 से 6 अक्टूबर के बीच राज्य में जाकर सूखे की स्थिति का आकलन करना है।

खरगे ने सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या बढ़ने की स्थिति में उन्हें भी केंद्रीय राहत के दायरे में शामिल करने की मांग की है। उनका जोर इस बात पर है कि राहत प्रक्रिया में देरी न हो और किसानों को फसल नुकसान, पेयजल तथा पशुधन से जुड़ी समस्याओं के लिए समय पर सहायता मिल सके।

Leave a comment